
कॉकरोच (Cockroach)
1. विस्तृत प्रस्तावना: कॉकरोच (Cockroach) क्या है?
कॉकरोच (Cockroach) (तिलचट्टा) एक ऐसा जीव है जो डायनासोर के समय से पृथ्वी पर मौजूद है और अपनी अद्भुत उत्तरजीविता (Survival) क्षमता के लिए जाना जाता है। जीव विज्ञान में इसे संघ – आर्थ्रोपोडा (Arthropoda) और वर्ग – कीट (Insecta) में रखा गया है। भारत और दुनिया भर में पाई जाने वाली कॉकरोच की सबसे सामान्य प्रजाति का वैज्ञानिक नाम ‘पेरिप्लैनेटा अमेरिकाना’ (Periplaneta americana) है।
कॉकरोच की कुछ प्रमुख विशेषताएं:
रात्रिचर (Nocturnal): ये दिन के समय अंधेरी और नम जगहों (जैसे सीवर, रसोई की नालियों) में छिपकर रहते हैं और रात में सक्रिय होते हैं।
सर्वाहारी (Omnivorous): ये कुछ भी खा सकते हैं—कागज़, कपड़े, बचा हुआ खाना और यहाँ तक कि मरे हुए जीव भी।
ये बहुत तेज़ दौड़ने वाले (Cursorial) जीव हैं। यद्यपि इनमें पंख होते हैं, लेकिन ये बहुत कम उड़ते हैं।
2. बाह्य आकारिकी (Morphology – बाहरी बनावट)
एक वयस्क कॉकरोच (Cockroach)की लंबाई लगभग 34 से 53 मिमी (1.5 से 2 इंच) होती है। इसका पूरा शरीर लाल-भूरे रंग का होता है और एक बहुत कठोर बाह्य कंकाल (Exoskeleton) से ढका होता है जो ‘काइटिन’ (Chitin) का बना होता है।
काइटिन के इस कंकाल की प्लेटों को ‘स्क्लेराइट्स’ (Sclerites) कहते हैं। कॉकरोच का शरीर मुख्य रूप से तीन भागों में बंटा होता है: सिर (Head), वक्ष (Thorax) और उदर (Abdomen)।
A. सिर (Head)
इसका सिर तिकोना (Triangular) होता है और यह वक्ष के समकोण (90 डिग्री) पर नीचे की ओर झुका रहता है। इसकी गर्दन बहुत लचीली होती है, जिससे सिर सभी दिशाओं में घूम सकता है।
संयुक्त आंखें (Compound Eyes): सिर के ऊपरी हिस्से पर दो बड़ी, काले रंग की संयुक्त आंखें होती हैं। प्रत्येक आंख में लगभग 2000 छोटी-छोटी षट्कोणीय (Hexagonal) इकाइयां होती हैं जिन्हें ‘ओमाटीडिया’ (Ommatidia) कहते हैं। इससे कॉकरोच को एक वस्तु की कई छवियां (Mosaic vision) दिखती हैं। यह दृष्टि रात के लिए बहुत संवेदनशील (Sensitive) होती है।
श्रृंगिकाएं (Antennae): आंखों के पास से धागे जैसी दो लंबी श्रृंगिकाएं निकलती हैं, जो एक ‘राडार’ की तरह काम करती हैं और आसपास के वातावरण (स्पर्श और गंध) को महसूस करती हैं।
मुखांग (Mouth Parts): कॉकरोच (Cockroach) के मुखांग काटने और चबाने (Biting and Chewing) प्रकार के होते हैं। इसके जबड़ों को ‘मैंडिबल’ (Mandibles) कहते हैं जिनमें दांत जैसी रचनाएं होती हैं।
B. वक्ष (Thorax)
वक्ष को तीन भागों में बांटा गया है: प्रोथोरेक्स (अग्र वक्ष), मिजोथोरेक्स (मध्य वक्ष), और मेटाथोरेक्स (पश्च वक्ष)।
पैर (Legs): कॉकरोच (Cockroach) में पैरों के 3 जोड़े (कुल 6 पैर) होते हैं। (कीट वर्ग की यही मुख्य पहचान है)।
पंख (Wings): कॉकरोच (Cockroach)में पंखों के 2 जोड़े होते हैं।
अग्र पंख (Forewings / Tegmina): ये ‘मिजोथोरेक्स’ से निकलते हैं। ये गहरे रंग के, अपारदर्शी और चमड़े जैसे (Leathery) होते हैं। ये उड़ने के काम नहीं आते, बल्कि विश्राम की अवस्था में पीछे के पंखों को ढंककर रखते हैं।
पश्च पंख (Hindwings): ये ‘मेटाथोरेक्स’ से निकलते हैं। ये पारदर्शी (Transparent) और झिल्लीदार होते हैं तथा केवल यही पंख उड़ने में काम आते हैं।
C. उदर (Abdomen)
नर और मादा दोनों के उदर (पेट) में 10 खंड (Segments) होते हैं।
उदर के 10वें खंड पर धागे जैसी दो संरचनाएं पाई जाती हैं जिन्हें ‘गुद लूम’ (Anal Cerci) कहते हैं। ये ध्वनि और कंपन (Vibrations) को महसूस करने का काम करती हैं। (ये नर और मादा दोनों में होती हैं)।

3. आंतरिक शरीर रचना (Anatomy of Cockroach)
A. पाचन तंत्र (Digestive System)
कॉकरोच (Cockroach) की आहारनाल तीन भागों में बंटी होती है: अग्रांत्र (Foregut), मध्यांत्र (Midgut) और पश्चांत्र (Hindgut)।
भोजन ग्रसनी और ग्रसिका से होकर एक थैलीनुमा रचना में जमा होता है जिसे ‘अन्नपुट’ (Crop) कहते हैं।
अन्नपुट के बाद ‘पेषणी’ (Gizzard / Proventriculus) होती है। इसमें काइटिन के बने 6 बहुत मजबूत दांत होते हैं, जो भोजन को पीसने की मशीन (Grinder) का काम करते हैं।
अग्रांत्र (Foregut) और मध्यांत्र (Midgut) के जोड़ पर 6-8 अंधी नलिकाएं होती हैं जिन्हें ‘यकृतीय अंधनाल’ (Hepatic caeca) कहते हैं। ये पाचक रस (Digestive juices) बनाती हैं।
B. रक्त परिसंचरण तंत्र (Blood Vascular System)
कॉकरोच (Cockroach) में खुले प्रकार (Open type) का परिसंचरण तंत्र होता है। रक्त नलिकाओं में नहीं बहता, बल्कि शरीर की गुहा (हीमोसील) में खुला भरा रहता है।
कॉकरोच (Cockroach) के रक्त को ‘हीमोलिम्फ’ (Hemolymph) कहते हैं। इसमें श्वसन वर्णक (जैसे हीमोग्लोबिन) नहीं होता, इसलिए इसका खून रंगहीन (सफेद) होता है। (अर्थात इसका खून ऑक्सीजन नहीं ढोता)।
हृदय (Heart): कॉकरोच (Cockroach) का हृदय एक लंबी नली के रूप में पीठ (Dorsal) की तरफ होता है, जो 13 कक्षों (13-Chambers) में बंटा होता है।
C. श्वसन तंत्र (Respiratory System)
चूंकि कॉकरोच (Cockroach) का खून ऑक्सीजन नहीं ले जाता, इसलिए इसमें ऑक्सीजन को सीधे ऊतकों तक पहुँचाने के लिए पाइपों का एक जाल होता है जिसे ‘श्वासनली तंत्र’ (Tracheal System) कहते हैं।
शरीर के दोनों किनारों पर 10 जोड़ी छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें ‘श्वास रंध्र’ (Spiracles) कहा जाता है। (2 जोड़े वक्ष पर और 8 जोड़े उदर पर)।
हवा इन रंध्रों (Spiracles) से अंदर जाती है और पतली ‘ट्रैकिओल्स’ (Tracheoles) के माध्यम से ऑक्सीजन सीधे शरीर की कोशिकाओं में मिल जाती है।
D. उत्सर्जन तंत्र (Excretory System)
कॉकरोच (Cockroach) में उत्सर्जन का मुख्य कार्य ‘मैल्पीघियन नलिकाओं’ (Malpighian Tubules) द्वारा किया जाता है। ये मध्यांत्र और पश्चांत्र के जोड़ पर पाई जाने वाली 100-150 पतली, पीले रंग की नलिकाएं होती हैं।
ये नलिकाएं शरीर के तरल से अपशिष्ट पदार्थ सोखती हैं और उसे ‘यूरिक अम्ल’ (Uric acid) में बदल देती हैं।
यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करने के कारण कॉकरोच को ‘यूरिकोटेलिक’ (Uricotelic) जंतु कहा जाता है। (इससे पानी की बहुत बचत होती है)।
E. तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
कॉकरोच (Cockroach) का तंत्रिका तंत्र शरीर के निचले हिस्से (Ventral side) में स्थित गुच्छिकाओं (Ganglia) से बना होता है।
कुल 9 गुच्छिकाएं होती हैं: 3 वक्ष (Thorax) में और 6 उदर (Abdomen) में।
UPSC फैक्ट: कॉकरोच (Cockroach) का मस्तिष्क (Head) में तंत्रिका तंत्र का बहुत छोटा हिस्सा (Supra-oesophageal ganglion) होता है। यही कारण है कि यदि कॉकरोच का सिर काट दिया जाए, तो भी वह एक सप्ताह (7 दिन) तक जीवित रह सकता है, क्योंकि उसका मुख्य तंत्रिका तंत्र उसके शरीर (पेट वाले हिस्से) में सुरक्षित रहता है। अंत में वह केवल भूख/प्यास से मरता है।
4. प्रजनन तंत्र (Reproductive System)
कॉकरोच एकलिंगी (Dioecious) जीव हैं। नर और मादा अलग-अलग होते हैं।
नर कॉकरोच: इनमें छठे से आठवें उदर खंड में एक जोड़ी ‘वृषण’ (Testes) होते हैं। शुक्र नलिकाएं एक विशेष आकार की ग्रंथि में खुलती हैं जिसे ‘मशरूम ग्रंथि’ (Mushroom gland) कहते हैं, जो शुक्राणुओं को पोषण देती है।
मादा कॉकरोच: इनमें दो बड़े ‘अंडाशय’ (Ovaries) होते हैं। निषेचन (Fertilization) मादा के शरीर के अंदर होता है।
अंडकवच (Ootheca): मादा कॉकरोच अपने निषेचित अंडों को एक गहरे लाल/काले रंग के कैप्सूल में बंद करती है जिसे ‘ऊथिका’ (Ootheca) कहते हैं। एक मादा अपने जीवन में 9 से 10 ऊथिकाएं देती है, और प्रत्येक ऊथिका में 14 से 16 अंडे होते हैं। (यानी एक बार में औसतन 150 बच्चे)।
विकास (Development): अंडे से सीधा वयस्क कॉकरोच नहीं निकलता। अंडे से एक छोटा, बिना पंखों वाला कॉकरोच निकलता है जिसे ‘निंफ’ (Nymph) कहते हैं।
निंफ 13 बार अपनी बाहरी त्वचा को उतारता है (जिसे मोल्टिंग / Moulting कहते हैं) और तब जाकर पंखों वाला वयस्क कॉकरोच बनता है। इस प्रकार के विकास को ‘पॉरोमेटाबोलस’ (Paurometabolous) विकास कहा जाता है।

5. नर और मादा कॉकरोच में अंतर (Male vs Female Cockroach)
यह UPSC और NEET का सबसे पसंदीदा प्रश्न है। इन्हें बाहर से देखकर कैसे पहचाना जा सकता है?
| आधार | नर कॉकरोच (Male Cockroach) | मादा कॉकरोच (Female Cockroach) |
| गुद कंटक (Anal Styles) | नर के 9वें खंड पर एक जोड़ी छोटे और कांटेदार ‘गुद कंटक’ (Anal styles) पाए जाते हैं। | मादा में ‘गुद कंटक’ (Anal styles) बिल्कुल नहीं होते हैं। |
| उदर (Abdomen) | इनका उदर (पेट) लंबा और संकरा (Narrow) होता है। | इनका उदर चौड़ा (Broad) और नाव के आकार का होता है। |
| पंखों की लंबाई | नर के पंख उसके उदर (पेट) के अंतिम सिरे से भी आगे तक निकले होते हैं। | मादा के पंख छोटे होते हैं और उदर से आगे नहीं निकलते। |
| ब्रूड पाउच (Brood Pouch) | नर में अंडों को रखने के लिए कोई पाउच नहीं होता। | मादा के 7वें, 8वें और 9वें खंड मिलकर एक बड़ी नाव जैसी ‘ब्रूड पाउच’ (अंडकोष्ठ) बनाते हैं। |
(नोट: ‘गुद लूम’ (Anal cerci) नर और मादा दोनों में पाए जाते हैं, लेकिन ‘गुद कंटक’ (Anal styles) केवल नर में पाए जाते हैं।)
6. निष्कर्ष (Conclusion)
कॉकरोच (Periplaneta americana) जीव विज्ञान की दृष्टि से प्रकृति का एक सफल प्रयोग है। अपने काइटिन के मजबूत कंकाल, यूरिक अम्ल के रूप में पानी बचाने वाले उत्सर्जन तंत्र, और बिना सिर के भी हफ्तों तक जीवित रहने की तंत्रिका व्यवस्था के कारण, ये पृथ्वी के हर कठोर वातावरण (चाहे भयंकर गर्मी हो या गहरी सीलन) में सफलतापूर्वक जीवित रह सकते हैं। यद्यपि ये हैजा, डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों के वाहक (Vectors) हैं और खाद्य पदार्थों को दूषित करते हैं, लेकिन इनकी शारीरिक रचना कीट वर्ग (Insecta) को समझने के लिए सबसे उत्तम मॉडल (Model Organism) है।
7. अभ्यास प्रश्न (PYQ Type Practice Questions for Mains)
प्रश्न 1: कॉकरोच (Periplaneta americana) के पाचन तंत्र का विस्तृत वर्णन करें। ‘पेषणी’ (Gizzard) और ‘यकृतीय अंधनाल’ (Hepatic caeca) का इसमें क्या विशेष कार्य है? (200 शब्द)
प्रश्न 2: कॉकरोच का रक्त लाल क्यों नहीं होता? इसके ‘खुले परिसंचरण तंत्र’ (Open circulatory system) और ‘श्वसन तंत्र’ (Tracheal system) के बीच संबंध स्पष्ट करें। (200 शब्द)
प्रश्न 3: बाह्य आकारिकी (Morphology) के आधार पर नर कॉकरोच (Male) और मादा कॉकरोच (Female) के बीच पाए जाने वाले प्रमुख अंतरों को स्पष्ट करें। ‘गुद कंटक’ (Anal styles) का महत्व बताएं। (150 शब्द)
प्रश्न 4: “कॉकरोच का सिर काट देने पर भी वह कई दिनों तक जीवित रह सकता है।” जीव विज्ञान और उसके तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की संरचना के आधार पर इस कथन की वैज्ञानिक पुष्टि करें। (150 शब्द)
प्रश्न 5: कॉकरोच के उत्सर्जन तंत्र (मैल्पीघियन नलिकाएं) और प्रजनन तंत्र (निंफ का कायांतरण) की उन विशेषताओं का उल्लेख करें, जो इसे स्थलीय जीवन में सफल बनाती हैं। (250 शब्द)
8. परीक्षा के लिए 50 अति महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (Mega Quick Revision Notes)
कॉकरोच जंतु जगत के ‘आर्थ्रोपोडा’ संघ (Arthropoda) और ‘कीट’ वर्ग (Class Insecta) का सदस्य है।
भारत में पाई जाने वाली कॉकरोच की सबसे सामान्य प्रजाति का वैज्ञानिक नाम ‘पेरिप्लैनेटा अमेरिकाना’ (Periplaneta americana) है।
कॉकरोच रात्रिचर (Nocturnal) और सर्वाहारी (Omnivorous) जीव होते हैं।
कॉकरोच का पूरा शरीर लाल-भूरे रंग के एक कठोर ‘बाह्य कंकाल’ से ढका होता है जो शर्करा ‘काइटिन’ (Chitin) का बना होता है।
काइटिन कंकाल की कठोर प्लेटों को जीव विज्ञान में ‘स्क्लेराइट्स’ (Sclerites) कहा जाता है।
कॉकरोच का शरीर मुख्य रूप से तीन भागों में बंटा होता है: सिर (Head), वक्ष (Thorax) और उदर (Abdomen)।
सिर में स्थित दो बड़ी ‘संयुक्त आंखों’ (Compound eyes) में लगभग 2000 छोटी इकाइयां होती हैं, जिन्हें ‘ओमाटीडिया’ (Ommatidia) कहते हैं।
ओमाटीडिया के कारण कॉकरोच को एक वस्तु की कई छवियां दिखाई देती हैं, जिसे ‘मोज़ेक विज़न’ (Mosaic vision) कहा जाता है।
कॉकरोच के मुखांग (Mouth parts) काटने और चबाने (Biting and Chewing) वाले प्रकार के होते हैं।
कॉकरोच के वक्ष (Thorax) में 3 खंड होते हैं और इसके पास पैरों के कुल 3 जोड़े (यानी 6 पैर) होते हैं।
कॉकरोच में पंखों के 2 जोड़े होते हैं: अग्र पंख (Tegmina – जो उड़ने के काम नहीं आते) और पश्च पंख (Hindwings – जो उड़ने के काम आते हैं)।
अग्र पंख (Tegmina) गहरे रंग के होते हैं और विश्राम के समय पीछे के झिल्लीदार पंखों को सुरक्षित रखने का काम करते हैं।
नर और मादा कॉकरोच दोनों के उदर (Abdomen) में खंडों (Segments) की संख्या 10 होती है।
कॉकरोच के 10वें उदर खंड पर एक जोड़ी धागे जैसी संरचना पाई जाती है जिसे ‘गुद लूम’ (Anal cerci) कहते हैं, जो कंपन को महसूस करती है।
नर कॉकरोच के 9वें खंड पर एक जोड़ी छोटे ‘गुद कंटक’ (Anal styles) पाए जाते हैं, जो मादा में नहीं होते। (नर-मादा पहचानने का मुख्य तरीका)।
मादा कॉकरोच का उदर नर की तुलना में चौड़ा और नाव के आकार का होता है।
नर कॉकरोच के पंख उसके उदर (पेट) के अंतिम सिरे से भी आगे तक फैले होते हैं, जबकि मादा के पंख छोटे होते हैं।
कॉकरोच के पाचन तंत्र में भोजन जमा करने वाली थैली को ‘अन्नपुट’ (Crop) कहा जाता है।
‘पेषणी’ (Gizzard / Proventriculus) में काइटिन के 6 मजबूत दांत होते हैं जो भोजन को बारीक पीसने का काम करते हैं।
अग्रांत्र और मध्यांत्र के जोड़ पर पाई जाने वाली 6-8 नलिकाओं को ‘यकृतीय अंधनाल’ (Hepatic caeca) कहते हैं, जो पाचक रस स्रावित करती हैं।
कॉकरोच में ‘खुले प्रकार’ (Open type) का रक्त परिसंचरण तंत्र पाया जाता है।
कॉकरोच के रक्त को ‘हीमोलिम्फ’ (Hemolymph) कहते हैं, जो रंगहीन (सफेद) होता है क्योंकि इसमें हीमोग्लोबिन नहीं पाया जाता।
कॉकरोच का खून रंगहीन होने के कारण यह शरीर में ऑक्सीजन का परिवहन (Transportation) नहीं करता है।
कॉकरोच के शरीर में पीठ (Dorsal) की ओर एक लंबा, नलिकाकार हृदय होता है।
कॉकरोच का हृदय जंतु जगत में सबसे बड़ा माना जाता है क्योंकि इसमें ’13 कक्ष’ (13-Chambers) होते हैं।
कॉकरोच श्वसन (Respiration) के लिए पाइपों के एक जाल का उपयोग करता है जिसे ‘श्वासनली तंत्र’ (Tracheal system) कहते हैं।
हवा कॉकरोच के शरीर में 10 जोड़ी छिद्रों के माध्यम से प्रवेश करती है, जिन्हें ‘श्वास रंध्र’ (Spiracles) कहते हैं।
कॉकरोच में उत्सर्जन का मुख्य कार्य ‘मैल्पीघियन नलिकाओं’ (Malpighian Tubules) द्वारा किया जाता है।
मैल्पीघियन नलिकाओं की संख्या लगभग 100 से 150 होती है और ये पीले रंग की होती हैं।
कॉकरोच ‘यूरिक अम्ल’ (Uric acid) का उत्सर्जन करता है, जिससे पानी की बहुत बचत होती है। इसे यूरिकोटेलिक जंतु कहते हैं।
कॉकरोच के तंत्रिका तंत्र में कुल 9 गुच्छिकाएं (Ganglia) होती हैं (3 वक्ष में और 6 उदर में)।
कॉकरोच का सिर कट जाने पर भी वह एक सप्ताह तक इसलिए जिंदा रहता है क्योंकि उसका मुख्य तंत्रिका तंत्र उसके उदर (पेट) में स्थित होता है।
कॉकरोच एकलिंगी (Dioecious) जीव हैं, जिनमें नर और मादा जननांग अलग-अलग जीवों में होते हैं।
नर कॉकरोच में शुक्राणुओं को पोषण देने के लिए एक विशेष ग्रंथि होती है जिसे ‘मशरूम ग्रंथि’ (Mushroom gland) कहते हैं।
मादा कॉकरोच निषेचित अंडों को एक गहरे भूरे रंग के कैप्सूल में बंद करती है, जिसे ‘ऊथिका’ (Ootheca) कहा जाता है।
एक मादा कॉकरोच अपने जीवनकाल में 9 से 10 ऊथिकाएं देती है, और प्रत्येक में 14 से 16 अंडे होते हैं।
अंडे से बाहर निकलने वाले शिशु कॉकरोच को ‘निंफ’ (Nymph) कहा जाता है।
निंफ वयस्क कॉकरोच के समान ही दिखता है, लेकिन उसमें ‘पंख’ (Wings) नहीं होते हैं।
निंफ वयस्क कॉकरोच बनने तक लगभग 13 बार अपनी बाहरी त्वचा को उतारता है (इस प्रक्रिया को Moulting कहते हैं)।
कॉकरोच के इस क्रमिक विकास को जीव विज्ञान में ‘पॉरोमेटाबोलस’ (Paurometabolous – क्रमिक कायांतरण) कहा जाता है।
कॉकरोच के शरीर पर मौजूद संवेदी बाल उसे हवा के दबाव में बदलाव को भांपने में मदद करते हैं, जिससे वह तुरंत भाग जाता है।
कॉकरोच गंदे स्थानों से भोजन तक हैजा (Cholera) और डायरिया जैसी खतरनाक बीमारियों के जीवाणुओं को फैलाते हैं (Vectors of diseases)।
‘ओमाटीडिया’ (Ommatidia) कॉकरोच की आंख की मूलभूत संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है।
कॉकरोच के ‘प्रोथोरेक्स’ (अग्र वक्ष) में पंख नहीं पाए जाते हैं।
कॉकरोच के उदर का 7वां, 8वां और 9वां स्टरनम (प्लेट) मिलकर मादा में ‘ब्रूड पाउच’ (अंडकोष्ठ) का निर्माण करते हैं।
यूरिक एसिड के अलावा, कॉकरोच में वसा पिंड (Fat body) और यूरिकोज़ ग्रंथियां भी उत्सर्जन में मदद करती हैं।
कॉकरोच की लार (Saliva) में एमाइलेज एंजाइम होता है जो स्टार्च को पचाने का काम करता है।
कॉकरोच के हृदय में रक्त पीछे से आगे (उदर से सिर) की दिशा में पंप होता है।
कॉकरोच के 13-कक्षीय हृदय में रक्त को पंप करने में ‘ऐलरी पेशियां’ (Alary muscles) मदद करती हैं।
कॉकरोच का बाह्य कंकाल (Exoskeleton) इतना मजबूत होता है कि यह हल्का रेडियोधर्मी विकिरण (Radiation) भी सहन कर सकता है।