कोशिका

कोशिका (Cell)

सामान्य विज्ञान (General Science) और जीव विज्ञान (Biology) के खंड में ‘कोशिका’ सबसे आधारभूत और महत्वपूर्ण विषय है। सिविल सेवा परीक्षाओं की बात हो या कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की, हर वर्ष इस अध्याय से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रश्न पूछे ही जाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में जहाँ तथ्यों और अंगों के कार्यों (Organelles functions) पर ज़ोर होता है, वहीं मुख्य परीक्षा (Mains) में स्टेम सेल तकनीक (Stem Cell Technology) और आनुवंशिकी (Genetics) जैसे एप्लाइड साइंस (Applied Science) के प्रश्न कोशिका की गहरी समझ की मांग करते हैं।

इस विस्तृत लेख में हम कोशिका विज्ञान (Cytology) के शून्य से लेकर शिखर तक के सभी पहलुओं का वैज्ञानिक और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन करेंगे।

1. कोशिका क्या है? (What is a Cell?)

कोशिका (Cell) जीवों के शरीर की सबसे छोटी रचनात्मक (Structural) और क्रियात्मक (Functional) इकाई है। जिस प्रकार एक विशाल इमारत का निर्माण छोटी-छोटी ईंटों से होता है, उसी प्रकार पृथ्वी पर मौजूद हर एक जीवित प्राणी (चाहे वह सूक्ष्म जीवाणु हो या विशालकाय ब्लू व्हेल) का शरीर कोशिकाओं से मिलकर बना है। यह एक स्वायत्त (Autonomous) इकाई है, जो स्वयं जनन (Reproduction) करने की क्षमता रखती है।

कोशिका विज्ञान (Cytology) का इतिहास

प्रतियोगी परीक्षाओं में खोजकर्ताओं के नाम अक्सर मिलान (Match the following) या वन-लाइनर के रूप में पूछे जाते हैं:

  • रॉबर्ट हुक (Robert Hooke – 1665): इन्होंने कॉर्क की पतली काट में मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचनाएं देखीं और इन्हें ‘Cellula’ (लैटिन शब्द, जिसका अर्थ है छोटा कमरा) नाम दिया। याद रखें, रॉबर्ट हुक ने मृत कोशिका (Dead Cell) की खोज की थी।

  • एंटोन वॉन ल्यूवेनहॉक (Antonie van Leeuwenhoek – 1674): इन्होंने अपने द्वारा विकसित उन्नत सूक्ष्मदर्शी की मदद से तालाब के पानी में पहली बार जीवित कोशिका (Living Cell) (बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ) को देखा और इसका वर्णन किया।

  • रॉबर्ट ब्राउन (Robert Brown – 1831): इन्होंने ऑर्किड की जड़ों की कोशिकाओं में केंद्रक (Nucleus) की खोज की।

  • पुरकिंजे (Purkinje – 1839): इन्होंने कोशिका के अंदर पाए जाने वाले जीवित तरल पदार्थ को जीवद्रव्य (Protoplasm) नाम दिया।

कोशिका सिद्धांत (Cell Theory)

वर्ष 1838-39 में दो जर्मन वैज्ञानिकों—मैथियास श्लाइडेन (Matthias Schleiden) (वनस्पति वैज्ञानिक) और थियोडोर श्वान (Theodor Schwann) (जंतु वैज्ञानिक) ने संयुक्त रूप से कोशिका सिद्धांत प्रस्तुत किया।

  • सिद्धांत के मुख्य बिंदु:

    1. सभी जीव (पौधे और जंतु) कोशिकाओं और उनके उत्पादों से बने होते हैं।

    2. कोशिका जीवन की मूल इकाई है।

  • वर्ष 1855 में रुडोल्फ विर्चो (Rudolf Virchow) ने इस सिद्धांत को आगे बढ़ाया और एक बहुत ही महत्वपूर्ण कथन दिया: “Omnis cellula-e-cellula”, जिसका अर्थ है कि नई कोशिकाओं की उत्पत्ति हमेशा पूर्ववर्ती (पहले से मौजूद) कोशिकाओं के विभाजन से होती है।

  • अपवाद: वायरस (Virus) कोशिका सिद्धांत का पालन नहीं करते हैं, क्योंकि शरीर के बाहर ये निर्जीव होते हैं और किसी जीवित कोशिका के संपर्क में आते ही सजीव की तरह व्यवहार करने लगते हैं।

2. कोशिकाओं के प्रकार (Types of Cells)

विकास (Evolution) और केंद्रक (Nucleus) की जटिलता के आधार पर कोशिकाओं को दो मुख्य भागों में बांटा गया है: प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक। यह अंतर UPSC और SSC दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

2.1 प्रोकैरियोटिक कोशिका (Prokaryotic Cell)

  • ‘Pro’ का अर्थ है प्राचीन (Primitive) और ‘Karyon’ का अर्थ है केंद्रक।

  • ये पृथ्वी पर सबसे पहले विकसित होने वाली सरल कोशिकाएं हैं।

  • इनमें स्पष्ट केंद्रक (Well-defined Nucleus) का अभाव होता है। आनुवंशिक पदार्थ (DNA) कोशिका द्रव्य में स्वतंत्र रूप से बिखरा रहता है, जिसे न्यूक्लियॉइड (Nucleoid) कहा जाता है।

  • कोशिकांग (Organelles): इनमें झिल्ली-युक्त अंग जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय, और एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम नहीं पाए जाते हैं।

  • उदाहरण: जीवाणु (Bacteria), नीले-हरे शैवाल (Blue-Green Algae / Cyanobacteria), और माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma – जो कि दुनिया की सबसे छोटी जीवित कोशिका है)।

2.2 यूकैरियोटिक कोशिका (Eukaryotic Cell)

  • ‘Eu’ का अर्थ है सत्य (True) और ‘Karyon’ का अर्थ है केंद्रक।

  • ये पूर्ण रूप से विकसित और जटिल कोशिकाएं हैं।

  • इनमें दोहरी झिल्ली (Double-membrane) से घिरा एक स्पष्ट केंद्रक (Nucleus) होता है।

  • कोशिकांग: माइटोकॉन्ड्रिया, लाइसोसोम, गॉल्जीकाय आदि सभी झिल्ली-युक्त अंग मौजूद होते हैं।

  • उदाहरण: सभी पादप (Plants), जंतु (Animals), कवक (Fungi), और प्रोटिस्टा।

 प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक में मुख्य अंतर

लक्षण (Characteristics)प्रोकैरियोटिक कोशिका (Prokaryotic)यूकैरियोटिक कोशिका (Eukaryotic)
आकार (Size)सामान्यतः छोटा (1-10 µm)बड़ा और जटिल (5-100 µm)
केंद्रक (Nucleus)झिल्ली रहित (न्यूक्लियॉइड)पूर्ण विकसित, झिल्ली युक्त
DNAवृत्ताकार (Circular) और हिस्टोन प्रोटीन रहितरेखीय (Linear) और हिस्टोन प्रोटीन युक्त
राइबोसोम (Ribosome)70S प्रकार के80S प्रकार के (माइटोकॉन्ड्रिया में 70S)
श्वसन (Respiration)प्लाज्मा झिल्ली (Mesosomes) के द्वारामाइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) के द्वारा
कोशिका विभाजनविखंडन या मुकुलन (Amitosis)समसूत्री (Mitosis) और अर्धसूत्री (Meiosis)

3. कोशिका की संरचना और प्रमुख कोशिकांग (Cell Organelles)

एक यूकैरियोटिक कोशिका के भीतर कई छोटे-छोटे अंग होते हैं, जिन्हें कोशिकांग (Organelles) कहा जाता है। हर अंग का अपना एक विशिष्ट कार्य है, बिल्कुल एक शहर के अलग-अलग विभागों की तरह।

3.1 कोशिका भित्ति (Cell Wall)

  • उपस्थिति: यह केवल पादप कोशिकाओं (Plant Cells), कवक (Fungi) और जीवाणुओं में पाई जाती है। जंतु कोशिकाओं (Animal Cells) में यह अनुपस्थित होती है।

  • संरचना: पादपों में यह मुख्य रूप से सेल्यूलोज़ (Cellulose) की बनी होती है। कवकों में यह काइटिन (Chitin) और जीवाणुओं में पेप्टिडोग्लाइकन की बनी होती है।

  • कार्य: यह कोशिका को एक निश्चित आकार, कठोरता और यांत्रिक सुरक्षा (Mechanical support) प्रदान करती है। यह पूर्णतः पारगम्य (Freely permeable) होती है।

3.2 कोशिका झिल्ली / प्लाज्मा झिल्ली (Cell / Plasma Membrane)

  • यह पादप और जंतु, दोनों कोशिकाओं में पाई जाती है। जंतु कोशिका की यह सबसे बाहरी परत है।

  • संरचना: यह लिपिड (Lipids) और प्रोटीन (Proteins) की दोहरी परत से बनी होती है। 1972 में सिंगर और निकोलसन द्वारा दिया गया ‘तरल मोज़ेक मॉडल’ (Fluid Mosaic Model) इसकी संरचना की सबसे सटीक व्याख्या करता है।

  • प्रकृति: यह अर्धपारगम्य (Semi-permeable) या चयनात्मक पारगम्य (Selectively permeable) होती है।

  • कार्य: यह तय करती है कि कौन सा पदार्थ कोशिका के अंदर जाएगा और कौन सा बाहर आएगा (जैसे ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का विसरण/Diffusion)।

3.3 जीवद्रव्य (Protoplasm)

  • कोशिका झिल्ली के अंदर मौजूद संपूर्ण जीवित तरल पदार्थ को जीवद्रव्य कहते हैं। हक्सले (Huxley) ने इसे “जीवन का भौतिक आधार” (Physical basis of life) कहा था।

  • इसके दो भाग होते हैं:

    1. कोशिका द्रव्य (Cytoplasm): केंद्रक और कोशिका झिल्ली के बीच का तरल।

    2. केंद्रक द्रव्य (Nucleoplasm): केंद्रक के अंदर का तरल।

3.4 माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria)

  • खोज: इसकी खोज कोलिकर और ऑल्टमैन ने की थी, जबकि ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ नाम कार्ल बेंडा (C. Benda) ने दिया था।

  • संरचना: यह दोहरी झिल्ली वाला अंग है। इसकी आंतरिक झिल्ली में कई वलय (Folds) होते हैं, जिन्हें क्रिस्टी (Cristae) कहते हैं।

  • कार्य: यहाँ कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration) होता है, जिससे ऊर्जा ATP (Adenosine Triphosphate) के रूप में उत्पन्न होती है। इसी कारण इसे कोशिका का “ऊर्जा गृह” (Powerhouse of the Cell) कहा जाता है।

  • विशेष तथ्य: माइटोकॉन्ड्रिया के पास अपना स्वयं का DNA और राइबोसोम (70S) होता है, इसलिए इसे ‘अर्ध-स्वायत्त अंग’ (Semi-autonomous organelle) भी कहते हैं।

3.5 अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum – ER)

  • यह झिल्लियों का एक विस्तृत नेटवर्क है जो केंद्रक से लेकर कोशिका झिल्ली तक फैला रहता है।

  • प्रकार:

    1. खुरदरी (Rough ER – RER): इसकी सतह पर राइबोसोम चिपके होते हैं। इसका मुख्य कार्य प्रोटीन का निर्माण (Protein Synthesis) करना है।

    2. चिकनी (Smooth ER – SER): इस पर राइबोसोम नहीं होते। यह लिपिड (Lipids) और स्टेरॉयड के निर्माण में मदद करती है, साथ ही यकृत (Liver) कोशिकाओं में विषैले पदार्थों को खत्म (Detoxification) करने का महत्वपूर्ण काम करती है।

3.6 राइबोसोम (Ribosomes)

  • खोज: जॉर्ज पैलाडे (George Palade)।

  • संरचना: ये सबसे छोटे अंग हैं और इनके चारों ओर कोई झिल्ली (Membrane-less) नहीं होती। ये RNA और प्रोटीन से बने होते हैं।

  • कार्य: इन्हें कोशिका की “प्रोटीन फैक्ट्री” (Protein Factory) कहा जाता है, क्योंकि यहीं पर एमिनो एसिड्स को जोड़कर प्रोटीन का निर्माण होता है।

3.7 गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus / Golgi Body)

  • खोज: कैमिलो गॉल्जी (Camillo Golgi)। पादप कोशिकाओं में इसे डिक्टियोसोम (Dictyosome) कहा जाता है।

  • कार्य: इसे कोशिका का “यातायात प्रबंधक” (Traffic Police / Post Office) कहा जाता है। ER में बने हुए प्रोटीन और लिपिड को पैक करना, उन्हें रूपांतरित (Modify) करना और कोशिका के विभिन्न हिस्सों (या कोशिका के बाहर) गंतव्य तक पहुंचाना इसका मुख्य कार्य है।

3.8 लाइसोसोम (Lysosomes)

  • खोज: क्रिश्चियन डी डुवे (Christian de Duve)।

  • संरचना: ये गॉल्जीकाय द्वारा बनाए जाते हैं और इनमें बेहद शक्तिशाली जल-अपघटनीय एंजाइम (Hydrolytic enzymes) भरे होते हैं।

  • कार्य: यह कोशिका के अंदर आने वाले बाहरी हानिकारक पदार्थों (बैक्टीरिया आदि) और पुराने टूट-फूट चुके अंगों को पचाकर कोशिका को साफ रखता है।

  • आत्मघाती थैली (Suicide Bags): जब कोशिका क्षतिग्रस्त या मृत हो जाती है, तो लाइसोसोम फट जाते हैं और उनके एंजाइम अपनी ही कोशिका को पचा (नष्ट) देते हैं। इसलिए इन्हें ‘कोशिका की आत्मघाती थैली’ कहा जाता है।

3.9 लवक (Plastids)

  • ये केवल पादप कोशिकाओं में पाए जाते हैं।

  • प्रकार:

    1. अवर्णीलवक (Leucoplast): रंगहीन होते हैं। ये जड़ों और भूमिगत तनों में पाए जाते हैं जहाँ सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंचता। इनका काम भोजन (स्टार्च, प्रोटीन, वसा) का संचय (Storage) करना है।

    2. वर्णीलवक (Chromoplast): ये रंगीन होते हैं (हरे रंग को छोड़कर)। ये फूलों की पंखुड़ियों और फलों को आकर्षक रंग (लाल, पीला, नारंगी) प्रदान करते हैं, जो परागण (Pollination) में मदद करता है। (जैसे टमाटर का लाल रंग ‘लाइकोपीन’ के कारण, गाजर का रंग ‘कैरोटीन’ के कारण)।

    3. हरितलवक (Chloroplast): इनमें हरे रंग का वर्णक क्लोरोफिल (Chlorophyll) होता है। यहाँ प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की क्रिया द्वारा भोजन बनता है, इसलिए इसे “पादप कोशिका की रसोई” (Kitchen of the cell) कहा जाता है। (माइटोकॉन्ड्रिया की तरह इसमें भी अपना DNA होता है)।

3.10 रसधानी / रिक्तिका (Vacuoles)

  • ये तरल पदार्थ से भरी थैलियां होती हैं।

  • जंतु कोशिकाओं में ये आकार में बहुत छोटी और अस्थायी होती हैं।

  • पादप कोशिकाओं में ये बहुत बड़ी (कोशिका का 50-90% हिस्सा घेर लेती हैं) और स्थायी होती हैं। ये कोशिका को स्फीति (Turgidity) और कठोरता प्रदान करती हैं।

3.11 तारककाय (Centrosome)

  • उपस्थिति: यह केवल जंतु कोशिकाओं में पाया जाता है (उच्च पादपों में अनुपस्थित)।

  • कार्य: यह जंतु कोशिकाओं में कोशिका विभाजन (Cell Division) के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है (तर्कु तंतुओं / Spindle fibers का निर्माण करके)।

3.12 केंद्रक (Nucleus) – कोशिका का मस्तिष्क

  • कोशिका का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण अंग है। यह कोशिका की सभी उपापचयी (Metabolic) गतिविधियों पर नियंत्रण रखता है, इसलिए इसे “कोशिका का मस्तिष्क / नियंत्रक कक्ष” (Brain / Control Room of the Cell) कहा जाता है।

  • संरचना:

    • इसके ऊपर दोहरी झिल्ली (Nuclear Envelope) होती है जिसमें छोटे छिद्र (Nuclear pores) होते हैं।

    • अंदर के तरल को केंद्रक द्रव्य (Nucleoplasm) कहते हैं।

    • इसमें एक या अधिक गोलाकार संरचनाएं होती हैं जिन्हें केंद्रिका (Nucleolus) कहते हैं (जहाँ राइबोसोम बनते हैं)।

  • क्रोमेटिन जालक (Chromatin Network): केंद्रक में धागे जैसी संरचनाएं होती हैं जो DNA और हिस्टोन प्रोटीन से बनी होती हैं। कोशिका विभाजन के समय ये धागे सिकुड़कर मोटे हो जाते हैं, जिन्हें गुणसूत्र (Chromosomes) कहते हैं। गुणसूत्रों पर जीन (Genes) स्थित होते हैं, जो आनुवंशिक गुणों को माता-पिता से संतानों में ले जाते हैं।

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4. पादप कोशिका और जंतु कोशिका में अंतर (Plant vs Animal Cell)

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथन (Statement) आधारित प्रश्नों के लिए यह अंतर अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विशेषतापादप कोशिका (Plant Cell)जंतु कोशिका (Animal Cell)
आकार (Shape)सामान्यतः आयताकार या निश्चित आकार की।गोलाकार या अनिश्चित आकार की।
कोशिका भित्ति (Cell Wall)सेल्यूलोज़ की बनी मजबूत कोशिका भित्ति उपस्थित होती है।पूर्ण रूप से अनुपस्थित होती है।
लवक (Plastids)हरितलवक (Chloroplast) सहित सभी लवक उपस्थित होते हैं।लवक (Plastids) अनुपस्थित होते हैं।
रिक्तिकाएं (Vacuoles)बहुत बड़ी और केंद्र में स्थित होती हैं (जिससे केंद्रक किनारे खिसक जाता है)।छोटी, अस्थायी होती हैं या बिल्कुल नहीं होतीं।
तारककाय (Centrosome)उच्च पादप कोशिकाओं में अनुपस्थित होता है।कोशिका विभाजन के लिए तारककाय उपस्थित होता है।
भोजन संचय (Food Storage)अतिरिक्त भोजन स्टार्च (Starch) के रूप में जमा होता है।अतिरिक्त भोजन ग्लाइकोजन (Glycogen) के रूप में जमा होता है।

5. कोशिका विभाजन (Cell Division)

रुडोल्फ विर्चो के अनुसार, नई कोशिकाएं पुरानी कोशिकाओं के बंटने से बनती हैं। एक जीव की वृद्धि, विकास, और घावों के भरने के लिए कोशिका विभाजन अनिवार्य है।

5.1 असूत्री विभाजन (Amitosis)

  • यह सबसे सरल विभाजन है। यह अविकसित कोशिकाओं जैसे—जीवाणु (Bacteria), यीस्ट (Yeast), अमीबा आदि में होता है।

  • इसमें केंद्रक सीधा खिंचकर दो भागों में बंट जाता है।

5.2 समसूत्री विभाजन (Mitosis)

  • कहाँ होता है? यह हमारे शरीर की कायिक कोशिकाओं (Somatic Cells) में होता है। (जैसे त्वचा, बाल, हड्डियों की कोशिकाएं)।

  • विशेषता: इस विभाजन में एक मातृ कोशिका (Mother Cell) से दो संतति कोशिकाएं (Daughter Cells) बनती हैं।

  • गुणसूत्रों की संख्या: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बनने वाली नई कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या (Number of chromosomes) मातृ कोशिका के समान (Equal) रहती है (मनुष्य में 46 गुणसूत्र)।

  • महत्व: शरीर की वृद्धि (Growth), घावों के भरने (Repair), और पुरानी कोशिकाओं के प्रतिस्थापन में इसकी अहम भूमिका है। कैंसर (Cancer) वास्तव में अनियंत्रित समसूत्री विभाजन का ही परिणाम है।

5.3 अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis)

  • कहाँ होता है? यह केवल जनन अंगों की जनन कोशिकाओं (Reproductive Cells) (जैसे पुरुषों में वृषण/Testis और महिलाओं में अंडाशय/Ovary) में होता है।

  • विशेषता: इस विभाजन में एक मातृ कोशिका से चार (4) नई कोशिकाएं बनती हैं।

  • गुणसूत्रों की संख्या: इसमें नई कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका की आधी (Half) रह जाती है (मनुष्य के शुक्राणु और अंडाणु में 23-23 गुणसूत्र)।

  • महत्व: यह जीवों में आनुवंशिक विविधता (Genetic Variation) पैदा करता है। इसमें ‘क्रॉसिंग ओवर’ (Crossing Over) की घटना होती है, जिससे संतानों में माता-पिता से कुछ भिन्न गुण आते हैं।

6. स्टेम सेल (Stem Cells) और मुख्य परीक्षा (Mains) दृष्टिकोण

UPSC और State PSC की मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन (GS Paper 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) के दृष्टिकोण से ‘स्टेम सेल’ एक अत्यंत ज्वलंत और महत्वपूर्ण विषय है।

स्टेम कोशिकाएं (Stem Cells) क्या हैं?

स्टेम कोशिकाएं शरीर की वे ‘मास्टर कोशिकाएं’ या ‘बुनियादी कोशिकाएं’ हैं, जिनमें विभाजन करके शरीर के किसी भी अन्य प्रकार की कोशिका (जैसे- हृदय की मांसपेशी, तंत्रिका कोशिका, यकृत कोशिका) में विकसित होने की अद्वितीय क्षमता (Pluripotency/Totipotency) होती है।

स्टेम सेल तकनीक का महत्व

  1. चिकित्सा क्षेत्र (Regenerative Medicine): अल्जाइमर, पार्किंसंस रोग, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, और टाइप-1 डायबिटीज जैसी लाइलाज बीमारियों के इलाज में क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को बदलकर नई स्टेम कोशिकाएं लगाने (Stem Cell Therapy) पर शोध चल रहा है।

  2. अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant): भविष्य में रोगी के अपने स्टेम सेल का उपयोग करके प्रयोगशाला में पूरे अंग (जैसे किडनी, लिवर) विकसित किए जा सकेंगे, जिससे अंगों की कमी और इम्यून सिस्टम द्वारा अंगों को खारिज (Rejection) करने की समस्या खत्म हो जाएगी।

  3. कैंसर का इलाज: ल्यूकेमिया (Blood Cancer) जैसी बीमारियों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Bone Marrow Transplant) वास्तव में वयस्क स्टेम सेल थेरेपी का ही एक सफल रूप है।

7. SSC, State PSC और UPSC के लिए अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)

क) प्रारंभिक परीक्षा (Prelims Objective MCQs)

प्रश्न 1: पादप कोशिका जंतु कोशिका से किस प्रकार भिन्न है? (UPPSC/SSC)

(A) माइटोकॉन्ड्रिया की उपस्थिति के कारण

(B) कोशिका भित्ति की उपस्थिति के कारण

(C) जीवद्रव्य की उपस्थिति के कारण

(D) कोशिका झिल्ली की उपस्थिति के कारण

उत्तर: (B) कोशिका भित्ति (Cell Wall) केवल पादपों में होती है, जंतुओं में नहीं।

प्रश्न 2: कोशिका के भीतर श्वसन (Respiration) का केंद्र कौन सा अंग होता है? (BPSC/SSC)

(A) राइबोसोम

(B) गॉल्जीकाय

(C) माइटोकॉन्ड्रिया

(D) लाइसोसोम

उत्तर: (C) माइटोकॉन्ड्रिया, जहाँ ATP के रूप में ऊर्जा बनती है।

प्रश्न 3: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए (UPSC Level):

  1. माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक (Chloroplast) दोनों में अपना स्वयं का DNA और राइबोसोम पाया जाता है।

  2. प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में राइबोसोम पूरी तरह से अनुपस्थित होते हैं।

    उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

    (A) केवल 1

    (B) केवल 2

    (C) 1 और 2 दोनों

    (D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (A) केवल 1। कथन 2 गलत है क्योंकि प्रोकैरियोटिक में 70S प्रकार के राइबोसोम मौजूद होते हैं।

ख) मुख्य परीक्षा (Mains Descriptive Questions)

प्रश्न: “लाइसोसोम को कोशिका की आत्मघाती थैली क्यों कहा जाता है? कोशिका के अपशिष्ट निपटान तंत्र में इसकी भूमिका स्पष्ट करें।” (150 शब्द – State PSC)

संकेत (Model Frame):

  • भूमिका: लाइसोसोम की परिभाषा और इसकी खोज (क्रिश्चियन डी डुवे) का संक्षेप में जिक्र करें।

  • मुख्य भाग: बताएं कि लाइसोसोम में शक्तिशाली जल-अपघटनीय (Hydrolytic) एंजाइम होते हैं। इसका प्राथमिक काम टूटे-फूटे अंगों, मृत कोशिकाओं और बाहरी जीवाणुओं को पचाकर कोशिका को साफ (Scavenger of cell) रखना है। जब कोशिका किसी कारणवश बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती है या पुरानी हो जाती है, तो लाइसोसोम फट जाते हैं। इसके शक्तिशाली एंजाइम अपनी ही कोशिका के संपूर्ण घटकों को पचा डालते हैं।

  • निष्कर्ष: इस प्रकार, यह कोशिका के लिए एक कुशल अपशिष्ट निपटान प्रणाली (Waste disposal system) के साथ-साथ एक आत्म-विनाशकारी तंत्र के रूप में भी कार्य करता है, इसलिए इसे आत्मघाती थैली (Suicide bag) कहा जाता है।

 8. वन-लाइनर क्विक रिवीजन पॉइंट्स (Quick Revision Points)

  • ▫️ सबसे बड़ी कोशिका: शुतुरमुर्ग का अंडा (Ostrich Egg)।

  • ▫️ मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका: तंत्रिका कोशिका (Neuron)।

  • ▫️ प्रोटीन की फैक्ट्री: राइबोसोम (Ribosome)।

  • ▫️ ऊर्जा का सिक्का (Energy Currency): ATP (Adenosine Triphosphate)।

  • ▫️ कोशिका का यातायात प्रबंधक: गॉल्जीकाय (Golgi Body)।

  • ▫️ कोशिका का कंकाल तंत्र (Cytoskeleton): एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER)।

  • ▫️ डीएनए (DNA) की उपस्थिति: मुख्य रूप से केंद्रक में, इसके अलावा माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट में।

  • ▫️ कोशिका झिल्ली की प्रकृति: अर्ध-पारगम्य (Semi-permeable)।

  • ▫️ समसूत्री विभाजन (Mitosis): शरीर की वृद्धि और घाव भरने में सहायक (कायिक कोशिकाओं में)।

  • ▫️ अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): जनन कोशिकाओं में, आनुवंशिक विविधता के लिए जिम्मेदार।

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