खनिज

1. खनिज (Minerals) क्या हैं?

हमारी पृथ्वी का संपूर्ण धरातल (Crust) विभिन्न प्रकार की चट्टानों से बना है, और ये चट्टानें स्वयं जिन मूल तत्वों से मिलकर बनती हैं, उन्हें ‘खनिज’ (Minerals) कहा जाता है।

भूविज्ञान (Geology) के अनुसार, “खनिज एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला, अकार्बनिक (Inorganic) ठोस पदार्थ है, जिसकी एक निश्चित रासायनिक संरचना (Definite Chemical Composition) और एक व्यवस्थित आंतरिक परमाण्विक संरचना (Ordered Atomic Structure) होती है।”

सरल शब्दों में, पृथ्वी के निर्माण के समय जो तत्व एक विशिष्ट अनुपात और रासायनिक बंधों (Chemical bonds) में जुड़कर ठोस रूप ले चुके हैं, वे खनिज कहलाते हैं। यद्यपि प्रकृति में लगभग 2000 से अधिक प्रकार के खनिजों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन पृथ्वी की पर्पटी (Crust) का लगभग 98% भाग केवल आठ प्रमुख तत्वों (ऑक्सीजन, सिलिकॉन, एल्युमीनियम, लोहा, कैल्शियम, सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम) से बना है।

चट्टान और खनिज में अंतर (Rock vs Mineral): एक खनिज में केवल एक ही प्रकार का रासायनिक यौगिक होता है (जैसे- क्वार्ट्ज या हीरा)। वहीं, एक चट्टान (Rock) कई अलग-अलग खनिजों का सम्मिश्रण होती है। उदाहरण के लिए, ‘ग्रेनाइट’ एक चट्टान है जो क्वार्ट्ज, फेल्सपार और माइका (अभ्रक) नामक खनिजों के मिलने से बनती है।

2. खनिजों के प्रमुख भौतिक गुण (Physical Properties of Minerals)

खनिजों की पहचान उनके रासायनिक परीक्षणों के साथ-साथ उनके भौतिक गुणों के आधार पर की जाती है। परीक्षा के दृष्टिकोण से ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  1. कठोरता (Hardness): यह खनिज का खरोंच (Scratch) के प्रति प्रतिरोध है। इसे मापने के लिए ‘मोह्स स्केल’ (Mohs Scale) का प्रयोग किया जाता है, जो 1 से 10 तक होता है। इसमें ‘टैल्क’ (Talc) सबसे मुलायम (कठोरता 1) और ‘हीरा’ (Diamond) सबसे कठोर (कठोरता 10) खनिज है।

  2. चमक (Luster): प्रकाश के परावर्तन के कारण खनिज की सतह कैसी दिखती है। यह धात्विक (Metallic), कांच जैसी (Glassy), या रेशमी (Silky) हो सकती है।

  3. विदलन (Cleavage): जब किसी खनिज को तोड़ा जाता है, तो उसका एक निश्चित और चिकने समतल (Flat planes) के साथ टूटने का गुण विदलन कहलाता है। अभ्रक (Mica) इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।

  4. विभंजन (Fracture): जब खनिज एक निश्चित समतल की बजाय अनियमित, खुरदरे या घुमावदार तरीके से टूटता है (जैसे क्वार्ट्ज)।

  5. विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity): किसी खनिज के वजन और उसी आयतन वाले पानी के वजन का अनुपात। धातुओं का विशिष्ट गुरुत्व बहुत अधिक होता है।

  6. धारियां (Streak): जब किसी खनिज को किसी खुरदरी सतह पर रगड़ा जाता है, तो उससे निकलने वाले चूर्ण (Powder) का रंग ‘स्ट्रीक’ कहलाता है। कभी-कभी खनिज के असली रंग और उसकी स्ट्रीक के रंग में अंतर होता है।

3. खनिजों का विस्तृत वर्गीकरण (Classification of Minerals)

उपयोगिता और रासायनिक गुणों के आधार पर खनिजों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जाता है:

A. धात्विक खनिज (Metallic Minerals)

ये वे खनिज हैं जिन्हें पिघलाकर धातु (Metals) प्राप्त की जा सकती है। ये विद्युत और ऊष्मा के सुचालक होते हैं। इन्हें भी तीन उप-श्रेणियों में बांटा जाता है:

  1. लौह धातु खनिज (Ferrous Minerals): जिन खनिजों में लोहे का अंश पाया जाता है। (उदाहरण: लौह अयस्क, मैंगनीज, निकल, कोबाल्ट)।

  2. अलौह धातु खनिज (Non-Ferrous Minerals): जिनमें लोहे का अंश नहीं होता, लेकिन अन्य धातुएं होती हैं। (उदाहरण: तांबा, सीसा, जस्ता, बॉक्साइट/एल्युमीनियम)।

  3. बहुमूल्य खनिज (Precious Minerals): जिनका आर्थिक मूल्य बहुत अधिक होता है। (उदाहरण: सोना, चांदी, प्लैटिनम)।

B. अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)

इन खनिजों में धातु का अंश बिल्कुल नहीं होता है। इन्हें पीटने पर ये टूटकर चूर-चूर हो जाते हैं (भंगुरता)।

  • अकार्बनिक खनिज: जिनमें जीवों का अंश नहीं होता। (उदाहरण: अभ्रक (Mica), चूना पत्थर (Limestone), जिप्सम, ग्रेफाइट, नमक)।

  • कार्बनिक खनिज (जीवाश्म): इनका निर्माण वनस्पतियों और जीवों के दबने से होता है। (उदाहरण: कोयला, पेट्रोलियम)। इन्हें ‘ऊर्जा खनिज’ भी कहा जाता है।

4. भारत में प्रमुख खनिजों का भौगोलिक वितरण (Distribution of Minerals in India)

भारत खनिज संपदा के मामले में एक समृद्ध देश है। यहाँ अधिकांश धात्विक खनिज प्रायद्वीपीय पठार की ‘धारवाड़’ और ‘कुडप्पा’ क्रम की प्राचीन चट्टानों में पाए जाते हैं।

1. लौह अयस्क (Iron Ore)

भारत लौह अयस्क के उत्पादन और भंडार में विश्व के अग्रणी देशों में से एक है। लोहे के अंश के आधार पर इसके चार प्रमुख प्रकार होते हैं:

  • मैग्नेटाइट (Magnetite – 72% लोहा): यह सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला काला अयस्क है जिसमें उत्कृष्ट चुंबकीय गुण होते हैं। भारत में यह मुख्य रूप से कर्नाटक (कुद्रेमुख खदान), आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पाया जाता है।

  • हेमेटाइट (Hematite – 60-70% लोहा): यह लाल और भूरे रंग का होता है। भारत में सबसे ज्यादा (औद्योगिक रूप से) यही अयस्क निकाला जाता है।

  • लिमोनाइट और सिडेराइट: ये निम्न कोटि के अयस्क हैं जिनमें लोहे की मात्रा 40% से कम होती है।

  • प्रमुख उत्पादक राज्य:

    • ओडिशा: भारत का सबसे बड़ा उत्पादक (मयूरभंज, क्योंझर, सुंदरगढ़)।

    • छत्तीसगढ़: बैलाडिला (एशिया की सबसे बड़ी यंत्रीकृत खदान) और दल्ली-राजहरा।

    • झारखंड: सिंहभूम (नोवामुंडी खदान)।

2. मैंगनीज (Manganese)

मैंगनीज का मुख्य उपयोग इस्पात (Steel) और फेरो-मैंगनीज मिश्र धातु बनाने में किया जाता है। एक टन इस्पात बनाने में लगभग 10 किलो मैंगनीज की आवश्यकता होती है। इसके अलावा इसका उपयोग ब्लीचिंग पाउडर और कीटनाशकों में भी होता है।

  • प्रमुख उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश (बालाघाट, छिंदवाड़ा), महाराष्ट्र (नागपुर, भंडारा) और ओडिशा भारत के शीर्ष मैंगनीज उत्पादक राज्य हैं।

3. बॉक्साइट (Bauxite)

बॉक्साइट एल्युमीनियम (Aluminium) का मुख्य अयस्क है। एल्युमीनियम अपनी हल्की प्रकृति, सुचालकता और जंग-प्रतिरोधी होने के कारण विमानन (Aviation) और विद्युत उद्योग में बहुत महत्वपूर्ण है।

  • प्रमुख उत्पादक राज्य: ओडिशा भारत का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक है (कालाहांडी, कोरापुट)। इसके बाद गुजरात और झारखंड (लोहरदगा) का स्थान आता है।

4. तांबा (Copper)

भारत में तांबे का भंडार काफी सीमित है, इसलिए हमें इसका आयात करना पड़ता है। तांबा विद्युत का एक उत्कृष्ट सुचालक है, इसलिए इसका भारी उपयोग बिजली के तार, मोटर और इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है।

  • प्रमुख खदानें:

    • मध्य प्रदेश: बालाघाट की ‘मलंजखंड’ खदान (भारत में तांबे का सबसे बड़ा भंडार)।

    • राजस्थान: झुंझुनू जिले की ‘खेतड़ी’ खदान (सिंधु घाटी सभ्यता के समय से प्रसिद्ध)।

    • झारखंड: सिंहभूम जिला।

5. अभ्रक (Mica)

अभ्रक एक पारदर्शी, लचीला और ताप-प्रतिरोधी (Heat-resistant) अधात्विक खनिज है। इसका उपयोग मुख्य रूप से विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में ‘इंसुलेटर’ के रूप में होता है।

  • उत्पादन: भारत कभी ‘शीट माइका’ के उत्पादन में विश्व में एकाधिकार (Monopoly) रखता था।

  • प्रमुख उत्पादक राज्य: आंध्र प्रदेश (नेल्लोर जिला) भारत का सबसे बड़ा अभ्रक उत्पादक है। इसके बाद राजस्थान (भीलवाड़ा, अजमेर) और झारखंड (कोडरमा – जिसे ‘भारत की अभ्रक राजधानी’ कहा जाता है) का नंबर आता है।

6. सोना (Gold)

भारत में सोने का भंडार बहुत सीमित है। यह धारवाड़ क्रम की शिराओं (Veins) में पाया जाता है।

  • प्रमुख खदानें:

    • कर्नाटक: ‘कोलार स्वर्ण क्षेत्र (KGF)’ और रायचूर जिले की ‘हट्टी’ की खदानें। (भारत का 90% से अधिक सोना कर्नाटक से आता है)।

    • आंध्र प्रदेश: रामगिरी की खदानें।

7. चूना पत्थर (Limestone)

चूना पत्थर (Calcium Carbonate) एक अधात्विक अवसादी खनिज है। यह सीमेंट उद्योग (Cement Industry) का मुख्य कच्चा माल है। इसके अलावा लोहे को गलाने (Smelting) में इसका उपयोग ‘फ्लक्स’ (Flux) के रूप में किया जाता है।

  • प्रमुख उत्पादक राज्य: राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और गुजरात।

5. खनिजों का संरक्षण (Conservation of Minerals)

खनिज प्रकृति की ‘अनवीकरणीय’ (Non-renewable) संपदा हैं। इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं, जबकि मानव इनका दोहन बहुत तीव्र गति से कर रहा है। ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) के लिए खनिजों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

संरक्षण के उपाय:

  1. पुनर्चक्रण (Recycling): धातुओं (विशेषकर तांबा, एल्युमीनियम, सीसा) को कबाड़ (Scrap) से दोबारा पिघलाकर इस्तेमाल करना।

  2. प्रतिस्थापन (Substitution): बहुमूल्य या दुर्लभ खनिजों की जगह सस्ते और नवीकरणीय विकल्पों का उपयोग करना (जैसे तांबे के तारों की जगह फाइबर ऑप्टिक्स या एल्युमीनियम का उपयोग)।

  3. प्रौद्योगिकी में सुधार: ऐसी खनन तकनीकों का विकास करना जिससे निम्न कोटि के अयस्कों (Low-grade ores) का भी कम लागत में लाभकारी उपयोग हो सके।

  4. खनिज अन्वेषण (Exploration): उन्नत सैटेलाइट (Remote Sensing) तकनीक के माध्यम से नए और गहरे भंडारों की खोज करना।

6. निष्कर्ष (Conclusion)

किसी भी राष्ट्र की औद्योगिक और आर्थिक शक्ति इस बात पर निर्भर करती है कि उसके पास खनिज संसाधनों (Mineral Resources) का कितना मजबूत भंडार है और वह उनका किस प्रकार उपयोग करता है। भारत लौह अयस्क, अभ्रक और बॉक्साइट के मामले में अत्यंत भाग्यशाली और आत्मनिर्भर है, लेकिन तांबा, सोना और पेट्रोलियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात पर निर्भर है। आधुनिक तकनीकी युग में केवल खनिजों का दोहन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका न्यायसंगत उपयोग और पुनर्चक्रण ही हमारे भविष्य के औद्योगिक विकास की कुंजी है।

7. अभ्यास प्रश्न (PYQ Type Practice Questions for Mains)

प्रश्न 1: खनिजों के धात्विक (Metallic) और अधात्विक (Non-Metallic) वर्गीकरण को स्पष्ट करें। भारत में लौह अयस्क (Iron Ore) के भौगोलिक वितरण और उसके आर्थिक महत्व की विस्तृत विवेचना कीजिए। (250 शब्द)

प्रश्न 2: भारत में अभ्रक (Mica) और तांबे (Copper) के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए। भारत के विद्युत उद्योग में इन दोनों खनिजों की उपयोगिता क्या है? (200 शब्द)

प्रश्न 3: “खनिज संपदा अनवीकरणीय (Non-renewable) है, इसलिए खनिजों का संरक्षण समय की मांग है।” इस कथन के आलोक में खनिजों के संरक्षण की प्रमुख रणनीतियों और उपायों पर प्रकाश डालिए। (150 शब्द)

प्रश्न 4: खनिज की भौतिक विशेषताओं की पहचान किन आधारों (जैसे कठोरता, विदलन, विशिष्ट गुरुत्व) पर की जाती है? मोह्स स्केल (Mohs Scale) के महत्व को स्पष्ट करें। (200 शब्द)

प्रश्न 5: बॉक्साइट और मैंगनीज खनिजों के प्रमुख औद्योगिक उपयोग क्या हैं? भारत में इनके शीर्ष उत्पादक राज्यों के भौगोलिक वितरण का वर्णन करें। (150 शब्द)

8. परीक्षा के लिए 50 अति महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (Mega Quick Revision Notes)

  1. भूविज्ञान में ‘खनिज’ (Mineral) उस अकार्बनिक ठोस पदार्थ को कहा जाता है जिसकी अपनी एक निश्चित रासायनिक संरचना और सुव्यवस्थित परमाण्विक बनावट होती है।

  2. एक ही रासायनिक तत्व से बने खनिज को ‘मूल खनिज’ कहा जाता है, जैसे सोना (Gold), चांदी, तांबा और ग्रेफाइट।

  3. पृथ्वी की भू-पर्पटी (Crust) का लगभग 98% हिस्सा केवल आठ तत्वों से बना है, जिनमें ऑक्सीजन और सिलिकॉन की मात्रा सबसे अधिक है।

  4. खनिजों की कठोरता मापने के लिए फ्रेडरिक मोह्स द्वारा 1812 में ‘मोह्स स्केल’ (Mohs Scale of Hardness) का निर्माण किया गया था।

  5. मोह्स स्केल के अनुसार, ‘टैल्क’ (Talc) प्रकृति का सबसे मुलायम खनिज है (कठोरता 1), जबकि ‘हीरा’ (Diamond) सबसे कठोर खनिज है (कठोरता 10)।

  6. ‘क्लीवेज’ (Cleavage) या विदलन वह गुण है जिसके तहत किसी खनिज को तोड़ने पर वह एक चिकनी और समतल सतह (Planes) के साथ टूटता है (जैसे अभ्रक)।

  7. धात्विक खनिज मुख्य रूप से आग्नेय (Igneous) और रूपांतरित (Metamorphic) चट्टानों की दरारों, भ्रंशों और शिराओं (Veins/Lodes) में पाए जाते हैं।

  8. कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन ‘अधात्विक ऊर्जा खनिज’ हैं, जो केवल और केवल अवसादी (Sedimentary) चट्टानों की परतों में पाए जाते हैं।

  9. भारत के अधिकांश मूल्यवान धात्विक खनिज (सोना, लोहा, तांबा) प्रायद्वीपीय भारत की प्राचीन ‘धारवाड़ क्रम’ की चट्टानों में संचित हैं।

  10. लौह अयस्क (Iron Ore) को आधुनिक औद्योगिक विकास की ‘रीढ़ की हड्डी’ माना जाता है, क्योंकि इस्पात उद्योग पूरी तरह से इसी पर निर्भर है।

  11. ‘मैग्नेटाइट’ (Fe3O4) लौह अयस्क का सबसे उत्तम प्रकार है जिसमें लोहे की मात्रा 72% तक होती है; इसका रंग काला होता है और इसमें उच्च चुंबकीय गुण होते हैं।

  12. भारत में औद्योगिक रूप से सबसे अधिक मात्रा में उपयोग किया जाने वाला लौह अयस्क ‘हेमेटाइट’ (Fe2O3) है, जो लाल और भूरे रंग का होता है।

  13. छत्तीसगढ़ की ‘बैलाडिला खदान’ भारत और एशिया की सबसे बड़ी यंत्रीकृत (Mechanized) लौह अयस्क खदान है, जहाँ से निकाला गया अयस्क मुख्य रूप से जापान को निर्यात किया जाता है।

  14. ओडिशा का मयूरभंज और क्योंझर जिला, तथा झारखंड का सिंहभूम जिला हेमेटाइट लौह अयस्क के भारत के सबसे बड़े भंडार क्षेत्रों में से हैं।

  15. मैंगनीज एक अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है जिसका उपयोग इस्पात (Steel) को कठोर बनाने और उसमें जंग लगने से रोकने (Anti-corrosion) के लिए किया जाता है।

  16. भारत में मैंगनीज का सबसे बड़ा भंडार और उत्पादक राज्य मुख्य रूप से ओडिशा और मध्य प्रदेश (बालाघाट) हैं।

  17. ‘बॉक्साइट’ एल्युमीनियम धातु का मुख्य अयस्क है; इसका निर्माण उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण चट्टानों की ‘लेटराइजेशन’ (लैटराइट मिट्टी के बनने) प्रक्रिया से होता है।

  18. भारत के बॉक्साइट उत्पादन में ओडिशा का कालाहांडी और कोरापुट क्षेत्र सबसे आगे है, जो देश का लगभग आधा बॉक्साइट उत्पादित करता है।

  19. एल्युमीनियम एक अलौह धातु है जिसे विमानन उद्योग (Aeronautics) में इसके हल्केपन और मजबूती के कारण अत्यधिक पसंद किया जाता है।

  20. तांबा (Copper) मानव द्वारा खोजी और उपयोग की गई पहली धातु है; इसका उपयोग सबसे पहले ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic Age) में किया गया था।

  21. तांबा विद्युत का बहुत अच्छा सुचालक है, इसलिए भारत के तांबा उत्पादन का अधिकांश हिस्सा बिजली के तार (Cables) और मोटर बनाने में खप जाता है।

  22. राजस्थान का ‘खेतड़ी’ क्षेत्र (झुंझुनू जिला) सिंधु घाटी सभ्यता के समय से ही तांबे के उत्खनन के लिए भारत का सबसे प्रसिद्ध स्थल रहा है।

  23. मध्य प्रदेश की ‘मलंजखंड खदान’ (बालाघाट) वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी और उत्पादक तांबे की खदान है।

  24. अभ्रक (Mica) एक ऐसा अधात्विक खनिज है जिसे कितनी भी पतली चादरों (Sheets) में विभाजित किया जा सकता है, और यह विद्युत धारा का कुचालक (Insulator) होता है।

  25. भारत के कुल अभ्रक उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा आंध्र प्रदेश के ‘नेल्लोर’ जिले से प्राप्त होता है, जो अपने उच्च गुणवत्ता वाले अभ्रक के लिए विश्व विख्यात है।

  26. झारखंड के कोडरमा, गिरिडीह और हजारीबाग क्षेत्र को भारत की ‘अभ्रक मेखला’ (Mica Belt) कहा जाता है।

  27. कर्नाटक का ‘कोलार स्वर्ण क्षेत्र’ (KGF – Kolar Gold Fields) भारत की सबसे पुरानी और सबसे गहरी सोने की खदानों में से एक रहा है।

  28. भारत में सोने का दूसरा सबसे बड़ा भंडार कर्नाटक के ही रायचूर जिले में ‘हट्टी की खदानों’ (Hutti Gold Mines) में स्थित है।

  29. सीसा (Lead) और जस्ता (Zinc) अक्सर एक साथ पाए जाते हैं, इसलिए इन्हें ‘जुड़वां खनिज’ (Twin Minerals) भी कहा जाता है।

  30. सीसा (Lead) का प्रमुख अयस्क ‘गैलेना’ (Galena) है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से कार की बैटरी (Storage Batteries) और केबल कवरिंग में किया जाता है।

  31. भारत में जस्ता (Zinc) और सीसा के उत्पादन में राजस्थान का ‘जावर’ (Zawar) और ‘भीलवाड़ा’ क्षेत्र सबसे बड़ा और लगभग एकाधिकार (Monopoly) वाला क्षेत्र है।

  32. ‘चूना पत्थर’ (Limestone) अवसादी चट्टानों में पाया जाने वाला वह प्रमुख अधात्विक खनिज है जो सीमेंट उद्योग (Cement Industry) के लिए बुनियादी कच्चा माल है।

  33. लौह-इस्पात (Iron & Steel) उद्योगों में लौह अयस्क को गलाने और उसकी अशुद्धियों को दूर करने के लिए ‘चूना पत्थर’ को भट्टियों में डाला जाता है।

  34. यूरेनियम (Uranium) और थोरियम (Thorium) प्रमुख ‘परमाणु या रेडियोएक्टिव खनिज’ हैं, जिनका उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों में बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।

  35. भारत में यूरेनियम की सबसे प्रसिद्ध खदान झारखंड के ‘जादूगोड़ा’ (Jaduguda) में स्थित है, जो देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का मुख्य आधार है।

  36. ‘मोनोजाइट रेत’ (Monazite Sand) जो कि भारत के केरल तट (मालाबार तट) पर पाई जाती है, उसमें ‘थोरियम’ का दुनिया का सबसे बड़ा भंडार मौजूद है।

  37. ‘जिप्सम’ (Gypsum) एक अधात्विक अवसादी खनिज है जिसका उपयोग सीमेंट की जमने की गति को धीमा करने के लिए और क्षारीय मिट्टी के उपचार (Soil Treatment) में किया जाता है।

  38. ‘प्लैटिनम’ को उसकी दुर्लभता, रासायनिक स्थिरता और अत्यधिक आर्थिक मूल्य के कारण ‘सफेद सोना’ (White Gold) भी कहा जाता है।

  39. प्लेसर निक्षेप (Placer Deposits) खनिजों के वे भंडार हैं जो नदियों द्वारा बहाकर लाए गए रेत और बजरी के साथ घाटियों में जमा हो जाते हैं; सोना और टिन अक्सर प्लेसर निक्षेपों में मिलते हैं।

  40. भारत में हीरा (Diamond) मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में ‘विंध्यन क्रम’ की प्राचीन अवसादी चट्टानों में पाया जाता है।

  41. ‘क्रोमाइट’ (Chromite) का उपयोग स्टेनलेस स्टील बनाने में किया जाता है और भारत के कुल क्रोमाइट भंडार का लगभग 95% हिस्सा अकेले ओडिशा (सुकिंदा घाटी) में स्थित है।

  42. राजस्थान का मकराना क्षेत्र अपने ‘सफेद संगमरमर’ (White Marble) के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जो वास्तव में चूना पत्थर का कायांतरित रूप (Metamorphic Rock) है।

  43. ‘कोबाल्ट’ (Cobalt) एक लौह धातु खनिज है जिसका उपयोग उच्च शक्ति वाले चुंबक (Magnets) बनाने और कैंसर के उपचार (रेडियोथेरेपी) में किया जाता है।

  44. जब विभिन्न खनिजों का आर्थिक रूप से लाभकारी मात्रा में एक साथ जमाव होता है, तो उसे ‘अयस्क’ (Ore) कहा जाता है। (सभी अयस्क खनिज होते हैं, लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते)।

  45. भारत का ‘रूर प्रदेश’ (Ruhr of India) छोटानागपुर के पठार को कहा जाता है क्योंकि यह क्षेत्र खनिजों और जीवाश्म ईंधनों (कोयला, लोहा, अभ्रक) की दृष्टि से भारत का सबसे समृद्ध हिस्सा है।

  46. समुद्री जल में भी विभिन्न खनिज घुले होते हैं, जिनमें ‘मैग्नीशियम’, ‘ब्रोमीन’ और ‘सामान्य नमक’ (Sodium Chloride) प्रमुख हैं जो वाष्पीकरण से प्राप्त किए जाते हैं।

  47. खनिजों के ‘पुनर्चक्रण’ (Recycling) का सबसे बड़ा लाभ यह है कि धातु को उसके अयस्क से निकालने की तुलना में कबाड़ (Scrap) को पिघलाकर धातु बनाने में काफी कम ऊर्जा (बिजली) खर्च होती है।

  48. भारत सरकार की ‘राष्ट्रीय खनिज नीति’ (National Mineral Policy) का मुख्य उद्देश्य खनन में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को बढ़ाना और पर्यावरण के अनुकूल सतत खनन (Sustainable Mining) को बढ़ावा देना है।

  49. समुद्र तल (Ocean Floor) पर पाए जाने वाले ‘पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स’ (Polymetallic Nodules) भविष्य के लिए मैंगनीज, तांबा और कोबाल्ट के बहुत बड़े संभावित भंडार हैं।

  50. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI – Geological Survey of India) भारत की वह प्रमुख संस्था है जो देश भर में नए खनिजों की खोज और उनके मानचित्रण का कार्य करती है (मुख्यालय: कोलकाता)।

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