
न्यूरॉन
1. विस्तृत प्रस्तावना: न्यूरॉन क्या है और इसका क्या महत्व है?
मानव शरीर प्रकृति की इंजीनियरिंग का सबसे जटिल और अद्भुत नमूना है। इस शरीर को संचालित करने, सोचने, समझने, महसूस करने और बाहरी दुनिया के प्रति प्रतिक्रिया देने के लिए एक बेहद उन्नत ‘कंट्रोल रूम’ की आवश्यकता होती है, जिसे हम तंत्रिका तंत्र (Nervous System) कहते हैं। इस तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी, मूलभूत, संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई को न्यूरॉन (Neuron) या तंत्रिका कोशिका कहा जाता है।
जब हम न्यूरॉन की संरचना और कार्य का गहराई से अध्ययन करते हैं, तो हमें पता चलता है कि यह हमारे शरीर के ‘इलेक्ट्रिकल वायर्स’ (Electrical Wires) की तरह काम करते हैं। यदि आपके पैर में एक कांटा भी चुभता है, तो उस दर्द का अहसास दिमाग तक पलक झपकते ही (लगभग 120 मीटर प्रति सेकंड की गति से) पहुँचाने का काम इन्हीं न्यूरॉन्स का होता है। मानव मस्तिष्क में लगभग 86 अरब (86 Billion) न्यूरॉन्स पाए जाते हैं, जो आपस में एक अटूट और जटिल नेटवर्क बनाते हैं। न्यूरॉन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें जन्म के बाद विभाजन (Cell Division) नहीं होता, यानी यदि एक बार दिमाग की कोशिकाएं नष्ट हो जाएं, तो वे दोबारा खुद को ठीक नहीं कर सकतीं।
2. न्यूरॉन की विस्तृत संरचना (Detailed Structure of a Neuron)
सूक्ष्मदर्शी (Microscope) के नीचे देखने पर न्यूरॉन की बनावट किसी पेड़ या जड़ जैसी दिखाई देती है। न्यूरॉन की संरचना और कार्य को समझने के लिए इसे मुख्य रूप से तीन बड़े भागों में विभाजित किया जाता है:
A. कोशिका काय या सायटन (Cell Body or Cyton / Soma)
यह न्यूरॉन का मुख्य और केंद्रीय भाग होता है, जिसे ‘सोमा’ भी कहा जाता है।
केंद्रक (Nucleus): इसके ठीक बीच में एक बड़ा और स्पष्ट केंद्रक पाया जाता है, जो कोशिका की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm): इसके अंदर मौजूद द्रव्य को ‘न्यूरोप्लाज्म’ कहते हैं, जिसमें माइटोकॉन्ड्रिया और गॉल्जीकाय जैसे सभी सामान्य अंगक होते हैं।
निस्ल के कण (Nissl’s Granules): सायटन के अंदर गहरे रंग के छोटे-छोटे दानेदार कण पाए जाते हैं, जिन्हें ‘निस्ल के कण’ कहते हैं। UPSC फैक्ट: ये कण वास्तव में ‘रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम’ (RER) और राइबोसोम के बने होते हैं, जिनका मुख्य कार्य न्यूरॉन के लिए प्रोटीन का निर्माण करना है।
B. द्रुमाक्ष्य या डेंड्राइट्स (Dendrites)
कोशिका काय (Cyton) से बाहर की ओर निकले हुए छोटे, शाखित (Branched) और पेड़ की जड़ों जैसे प्रवर्धों को डेंड्राइट्स कहा जाता है।
कार्य: इनका मुख्य कार्य शरीर के संवेदी अंगों (Sensory organs) से या किसी दूसरे न्यूरॉन से आने वाले उद्दीपन या रासायनिक संकेतों को ग्रहण करना और उन्हें विद्युत आवेग (Electrical Impulse) में बदलकर कोशिका काय (Cyton) की तरफ भेजना है।
C. तंत्रिकाक्ष या एक्सॉन (Axon) – सबसे लंबा भाग
यह कोशिका काय से निकलने वाला एक बहुत ही लंबा, बेलनाकार और धागे जैसा प्रवर्ध होता है। यह संदेशों को दूर तक ले जाने वाला ‘मुख्य हाईवे’ है।
एक्सॉन हिलॉक (Axon Hillock): सायटन का वह हिस्सा जहाँ से एक्सॉन की शुरुआत होती है, उसे एक्सॉन हिलॉक कहते हैं। यहीं से विद्युत आवेग उत्पन्न होता है।
माइलिन आवरण (Myelin Sheath): कई न्यूरॉन्स के एक्सॉन के ऊपर वसा (Fat) की एक सफेद परत चढ़ी होती है, जिसे माइलिन आवरण कहते हैं। यह इंसुलेटर (इलेक्ट्रिक वायर के ऊपर के प्लास्टिक) की तरह काम करता है, जिससे विद्युत संदेश बिना भटके बहुत तेजी से आगे बढ़ता है। इसे बनाने का काम ‘श्वान कोशिकाएं’ (Schwann Cells) करती हैं।
रैनवियर के नोड (Nodes of Ranvier): एक्सॉन पर जहाँ-जहाँ माइलिन आवरण अनुपस्थित होता है (यानी बीच-बीच में जो खाली जगह होती है), उसे ‘रैनवियर के नोड’ कहते हैं। इनके कारण विद्युत संदेश छलांग लगाते हुए (Saltatory Conduction) और भी तीव्र गति से आगे बढ़ता है।
एक्सॉन टर्मिनल (Axon Terminal): एक्सॉन का अंतिम सिरा कई छोटी शाखाओं में बंट जाता है। इन शाखाओं के अंतिम छोर पर गोल बटन जैसी संरचनाएं होती हैं, जिन्हें ‘सिनैप्टिक नोब’ (Synaptic Knob) कहा जाता है। इन नोब्स के अंदर छोटी-छोटी थैलियां होती हैं, जिनमें न्यूरोट्रांसमीटर (Neurotransmitters) नामक रासायनिक पदार्थ भरे होते हैं।
3. न्यूरॉन के विभिन्न प्रकार (Types of Neurons)
मानव शरीर में न्यूरॉन की संरचना और कार्य उनकी स्थिति और दिशा के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। इन्हें दो मुख्य आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है:
A. कार्य के आधार पर (Based on Function)
संवेदी न्यूरॉन (Sensory / Afferent Neurons): ये न्यूरॉन उद्दीपनों को हमारे संवेदी अंगों (त्वचा, आंख, कान, नाक, जीभ) से ग्रहण करके केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड) तक पहुँचाते हैं। जैसे—गर्म बर्तन को छूने पर दिमाग को खबर देना।
प्रेरक न्यूरॉन (Motor / Efferent Neurons): ये दिमाग या स्पाइनल कॉर्ड से मिलने वाले आदेशों को हमारी मांसपेशियों या ग्रंथियों (Effectors) तक वापस लाते हैं। जैसे—दिमाग का आदेश लाकर हाथ को तुरंत पीछे हटाना।
अंतरा-न्यूरॉन (Interneurons / Relay Neurons): ये केवल हमारे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के अंदर पाए जाते हैं। इनका काम संवेदी और प्रेरक न्यूरॉन्स के बीच एक ‘पुल’ या कड़ी का काम करना और संदेशों का विश्लेषण करना है।
B. ध्रुवों या संरचना के आधार पर (Based on Structure)
अध्रुवीय (Apolar): इनमें कोई निश्चित एक्सॉन या डेंड्राइट नहीं होता। (उदा: हाइड्रा जैसे निचले जीवों में)।
एकध्रुवीय (Unipolar): इसमें केवल कोशिका काय से एक ही प्रवर्ध (एक्सॉन) निकलता है। UPSC फैक्ट: ये मुख्य रूप से मनुष्यों की भ्रूणीय अवस्था (Embryonic stage) में पाए जाते हैं।
द्विध्रुवीय (Bipolar): इसमें एक एक्सॉन और एक डेंड्राइट विपरीत दिशाओं में होते हैं। यह हमारी आंख की रेटिना (Retina) और नाक के सूंघने वाले मार्ग में पाए जाते हैं।
बहुध्रुवीय (Multipolar): इसमें एक लंबा एक्सॉन और कई सारे डेंड्राइट्स होते हैं। हमारे मस्तिष्क के प्रमस्तिष्क वल्कुट (Cerebral Cortex) में पाए जाने वाले अधिकांश न्यूरॉन इसी प्रकार के होते हैं।

4. न्यूरॉन कैसे कार्य करता है? तंत्रिका आवेग का संचरण
न्यूरॉन की संरचना और कार्य को पूरी तरह समझने के लिए इसकी कार्यप्रणाली को आणविक स्तर पर समझना होगा। न्यूरॉन के अंदर संदेश दो चरणों में आगे बढ़ता है:
I. न्यूरॉन के अंदर विद्युत संचरण (Action Potential)
विश्राम की अवस्था में न्यूरॉन की झिल्ली के बाहर ‘सोडियम आयन ($Na^+$)’ अधिक होते हैं (धनात्मक आवेश) और अंदर ‘पोटेशियम आयन ($K^+$)’ तथा ऋणात्मक प्रोटीन होते हैं। इसे विराम विभव (Resting Potential) कहते हैं।
जैसे ही कोई उद्दीपन (Signal) डेंड्राइट को मिलता है, झिल्ली के सोडियम चैनल खुल जाते हैं और सोडियम तेजी से अंदर भागता है।
इससे अंदर का आवेश धनात्मक हो जाता है, जिसे ध्रुवण (Depolarization) या ‘Action Potential’ कहते हैं। यही वह विद्युत करंट है जो एक्सॉन से होता हुआ सिनैप्टिक नोब तक दौड़ता है।
इस पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए कोशिका झिल्ली पर सोडियम-पोटेशियम पंप ($Na^+-K^+$ Pump) काम करता है, जो लगातार 3 सोडियम आयनों को बाहर फेंकता है और 2 पोटेशियम आयनों को अंदर लाता है (इसमें ATP की ऊर्जा खर्च होती है)।
II. दो न्यूरॉन्स के बीच रासायनिक संचरण: सिनैप्स (Synapse)
दो न्यूरॉन्स कभी भी एक-दूसरे से सीधे भौतिक रूप से जुड़े नहीं होते। उनके बीच एक बहुत ही सूक्ष्म खाली जगह होती है, जिसे सिनैप्स (Synapse / युग्मानुबंधन) या सिनैप्टिक दरार कहते हैं।
जब विद्युत आवेग एक्सॉन के अंतिम सिरे (Synaptic Knob) पर पहुँचता है, तो वहाँ मौजूद थैलियां फट जाती हैं।
इन थैलियों से न्यूरोट्रांसमीटर (Neurotransmitter) नामक रसायन बाहर निकलते हैं और तैरकर अगले न्यूरॉन के डेंड्राइट से जुड़ जाते हैं।
प्रमुख न्यूरोट्रांसमीटर:
एसिटाइलकोलीन (Acetylcholine): यह मांसपेशियों के संकुचन और याददाश्त में मदद करता है।
डोपामाइन (Dopamine): इसे ‘हैप्पी हार्मोन’ या मोटिवेशन केमिकल भी कहते हैं। इसकी कमी से पार्किंसंस (Parkinson’s) नामक बीमारी होती है, जिसमें हाथ-पैर कांपने लगते हैं
5. न्यूरॉन से जुड़े प्रमुख रोग और विकार (Disorders)
जब न्यूरॉन की संरचना और कार्य में कोई गड़बड़ी आ जाती है, तो मानव शरीर का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है:
अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s Disease): इसमें मस्तिष्क के न्यूरॉन्स धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं और एसिटाइलकोलीन का स्तर गिर जाता है, जिससे व्यक्ति की याददाश्त (Memory) पूरी तरह खत्म होने लगती है।
पार्किंसंस रोग (Parkinson’s Disease): मस्तिष्क के ‘सबस्टेंशिया नाइग्रा’ भाग में डोपामाइन बनाने वाले न्यूरॉन मर जाते हैं, जिससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और स्वैच्छिक गतियों पर नियंत्रण खत्म हो जाता है।
मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple Sclerosis): यह एक ऑटो-इम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद ही न्यूरॉन्स के ऊपर चढ़े माइलिन आवरण (Myelin Sheath) को नष्ट कर देती है, जिससे संदेशों का बहना रुक जाता है और लकवा (Paralysis) मार सकता है।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में, न्यूरॉन की संरचना और कार्य मानव चेतना और जीवन का मुख्य आधार हैं। 86 अरब न्यूरॉन्स का यह जैविक सुपरकंप्यूटर बिना थके, बिना रुके माइक्रो-सेकंड में अरबों संदेशों का आदान-प्रदान करता है। सोडियम-पोटेशियम के आयनिक संतुलन से उत्पन्न होने वाला एक छोटा सा विद्युत करंट ही हमारे विचारों, सपनों, भावनाओं और स्मृतियों को जन्म देता है। विज्ञान आज कितनी भी तरक्की कर ले, लेकिन न्यूरॉन के इस जटिल नेटवर्क (Neural Network) की हूबहू नकल करना आज भी असंभव है। तंत्रिका तंत्र के इस अद्भुत तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, अच्छी नींद और मानसिक कसरत अनिवार्य है।
7. अभ्यास प्रश्न (PYQ Type Practice Questions for Mains)
प्रश्न 1: न्यूरॉन की संरचना और कार्य का सचित्र (यदि संभव हो) वर्णन करें। निस्ल के कणों (Nissl’s Granules) और सिनैप्टिक नोब का इसमें क्या महत्व है? (250 शब्द)
प्रश्न 2: तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse) के संचरण की विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया को स्पष्ट करें। इस प्रक्रिया में सोडियम-पोटेशियम पंप ($Na^+-K^+$ Pump) और ATP की भूमिका की विवेचना करें। (250 शब्द)
प्रश्न 3: ‘सिनैप्स’ (Synapse) क्या है? दो न्यूरॉन्स के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान न्यूरोट्रांसमीटर्स के माध्यम से किस प्रकार होता है? डोपामाइन की कमी से होने वाले विकार पर प्रकाश डालें। (200 शब्द)
प्रश्न 4: ध्रुवों या संरचना के आधार पर न्यूरॉन्स के विभिन्न प्रकारों को वर्गीकृत करें। ‘द्विध्रुवीय न्यूरॉन’ (Bipolar Neuron) मानव शरीर में कहाँ पाए जाते हैं? (150 शब्द)
प्रश्न 5: न्यूरॉन के ऊपर पाए जाने वाले ‘माइलिन आवरण’ (Myelin Sheath) और ‘रैनवियर के नोड्स’ (Nodes of Ranvier) के कार्यों का मूल्यांकन कीजिए। (150 शब्द)
8. परीक्षा के लिए 50 अति महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (Mega Quick Revision Notes)
मानव तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई को न्यूरॉन (Neuron) या तंत्रिका कोशिका कहते हैं।
मानव शरीर में पाई जाने वाली सभी कोशिकाओं में न्यूरॉन सबसे लंबी कोशिका (Longest Cell) होती है।
एक वयस्क मानव मस्तिष्क में लगभग 86 अरब (86 Billion) न्यूरॉन्स पाए जाते हैं।
न्यूरॉन में जन्म के बाद ‘तारककाय’ (Centrosome) न होने के कारण कोशिका विभाजन (Cell Division) नहीं होता है।
न्यूरॉन की संरचना और कार्य का वैज्ञानिक अध्ययन जीव विज्ञान की ‘न्यूरोलॉजी’ (Neurology) शाखा के अंतर्गत किया जाता है।
न्यूरॉन के मुख्य केंद्रीय भाग को कोशिका काय, सायटन (Cyton) या सोमा (Soma) कहा जाता है।
सायटन के अंदर मौजूद कोशिकाद्रव्य को ‘न्यूरोप्लाज्म’ (Neuroplasm) कहते हैं।
सायटन के अंदर पाए जाने वाले छोटे दानेदार कणों को ‘निस्ल के कण’ (Nissl’s Granules) कहा जाता है।
निस्ल के कण वास्तव में रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम और राइबोसोम के बने होते हैं, जो प्रोटीन बनाते हैं।
कोशिका काय (Cyton) से निकले हुए छोटे और शाखित प्रवर्धों को ‘डेंड्राइट्स’ (Dendrites) कहते हैं।
डेंड्राइट्स का मुख्य कार्य बाहरी उद्दीपनों या अन्य न्यूरॉन्स से संकेतों को ग्रहण करना है।
कोशिका काय से निकलने वाले सबसे लंबे, बेलनाकार धागे जैसे भाग को ‘एक्सॉन’ (Axon / तंत्रिकाक्ष) कहते हैं।
सायटन का वह त्रिकोणीय हिस्सा जहाँ से एक्सॉन निकलता है, उसे ‘एक्सॉन हिलॉक’ (Axon hillock) कहा जाता है।
तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse) की शुरुआत हमेशा एक्सॉन हिलॉक से ही होती है।
एक्सॉन के ऊपर पाई जाने वाली वसायुक्त सफेद सुरक्षात्मक परत को ‘माइलिन आवरण’ (Myelin Sheath) कहते हैं।
माइलिन आवरण का निर्माण करने वाली विशेष कोशिकाओं को ‘श्वान कोशिकाएं’ (Schwann Cells) कहा जाता है।
एक्सॉन पर जहाँ-जहाँ माइलिन आवरण अनुपस्थित होता है, उन खाली स्थानों को ‘रैनवियर के नोड’ (Nodes of Ranvier) कहते हैं।
रैनवियर के नोड्स के कारण विद्युत आवेग छलांग लगाते हुए बहुत तेजी से आगे बढ़ता है, जिसे ‘साल्टेटरी संचरण’ कहते हैं।
एक्सॉन के अंतिम छोर पर स्थित गोल बटन जैसी संरचनाओं को ‘सिनैप्टिक नोब’ (Synaptic Knob) कहा जाता है।
सिनैप्टिक नोब के अंदर भरी थैलियों में ‘न्यूरोट्रांसमीटर’ (Neurotransmitters) नामक रासायनिक पदार्थ होते हैं।
संवेदी अंगों से संदेशों को मस्तिष्क तक ले जाने वाले न्यूरॉन्स को ‘संवेदी न्यूरॉन’ (Sensory / Afferent Neuron) कहते हैं।
मस्तिष्क के आदेशों को मांसपेशियों तक वापस लाने वाले न्यूरॉन्स को ‘प्रेरक न्यूरॉन’ (Motor / Efferent Neuron) कहा जाता है।
मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड के अंदर संवेदी और प्रेरक न्यूरॉन को जोड़ने वाले न्यूरॉन को ‘अंतरा-न्यूरॉन’ (Interneuron) कहते हैं।
भ्रूणीय अवस्था (Embryonic stage) में मुख्य रूप से ‘एकध्रुवीय’ (Unipolar) न्यूरॉन पाए जाते हैं, जिनमें केवल एक्सॉन होता है।
मानव आंख की रेटिना (Retina) और नाक के घ्राण मार्ग में ‘द्विध्रुवीय’ (Bipolar) न्यूरॉन पाए जाते हैं।
मानव मस्तिष्क के प्रमस्तिष्क वल्कुट (Cerebral Cortex) में अधिकांशतः ‘बहुध्रुवीय’ (Multipolar) न्यूरॉन पाए जाते हैं।
विश्राम की अवस्था में न्यूरॉन की झिल्ली के बाहर का विभव ‘विराम विभव’ (Resting Potential) कहलाता है, जो लगभग -70 mV होता है।
विराम अवस्था में न्यूरॉन के बाहर सोडियम आयन ($Na^+$) अधिक होते हैं और अंदर पोटेशियम आयन ($K^+$) अधिक होते हैं।
उद्दीपन मिलने पर झिल्ली के सोडियम चैनल खुलने और सोडियम के अंदर आने की प्रक्रिया को ‘ध्रुवण’ (Depolarization) कहते हैं।
ध्रुवण के कारण उत्पन्न होने वाले विद्युत करंट को ही ‘सक्रिय विभव’ या क्रियात्मक विभव (Action Potential) कहते हैं।
न्यूरॉन में आयनों के संतुलन को बनाए रखने के लिए सोडियम-पोटेशियम पंप ($Na^+-K^+$ Pump) सक्रिय रूप से कार्य करता है।
सोडियम-पोटेशियम पंप प्रत्येक चक्र में 3 सोडियम आयनों को बाहर भेजता है और 2 पोटेशियम आयनों को अंदर लाता है।
इस पंप को चलाने के लिए कोशिका की ऊर्जा ATP के रूप में खर्च होती है।
दो न्यूरॉन्स के बीच पाए जाने वाले अत्यंत सूक्ष्म खाली स्थान को ‘सिनैप्स’ (Synapse / युग्मानुबंधन) कहा जाता है।
तंत्रिका आवेगों का सिनैप्स के पार जाना ‘रासायनिक संचरण’ कहलाता है, जो न्यूरोट्रांसमीटर द्वारा होता है।
मानव शरीर में खोजा गया सबसे पहला न्यूरोट्रांसमीटर ‘एसिटाइलकोलीन’ (Acetylcholine) था।
एसिटाइलकोलीन मुख्य रूप से मांसपेशियों के संकुचन और तंत्रिका-पेशी जोड़ (Neuromuscular junction) पर काम करता है।
‘डोपामाइन’ (Dopamine) एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क में खुशी, प्रेरणा और गतियों के नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।
मस्तिष्क में डोपामाइन की भारी कमी हो जाने से ‘पार्किंसंस रोग’ (Parkinson’s Disease) हो जाता है।
पार्किंसंस रोग का मुख्य लक्षण हाथों-पैरों का अनियंत्रित रूप से कांपना (Tremors) है।
मस्तिष्क में एसिटाइलकोलीन का स्तर गिरने और न्यूरॉन्स के नष्ट होने से ‘अल्जाइमर रोग’ (Alzheimer’s) होता है, जिसमें याददाश्त चली जाती है।
‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम खुद ही न्यूरॉन के ‘माइलिन आवरण’ को नष्ट कर देता है।
न्यूरॉन के अंदर तंत्रिका आवेग के बहने की गति लगभग 100 से 120 मीटर प्रति सेकंड तक हो सकती है।
तंत्रिका तंत्र में न्यूरॉन्स के अलावा ‘न्यूरोग्लिया’ (Neuroglia) कोशिकाएं भी होती हैं, जो न्यूरॉन्स को सहारा और सुरक्षा देती हैं।
मस्तिष्क के जिस हिस्से में माइलिन युक्त एक्सॉन अधिक होते हैं, उसे ‘श्वेत द्रव्य’ (White Matter) कहा जाता है।
मस्तिष्क के जिस हिस्से में कोशिका काय (Cyton) और बिना माइलिन वाले हिस्से होते हैं, उसे ‘धूसर द्रव्य’ (Grey Matter) कहते हैं।
केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में माइलिन आवरण का निर्माण ‘ओलिगोडेंड्रोसाइट्स’ (Oligodendrocytes) नामक ग्लिया कोशिकाओं द्वारा होता है।
परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS) में माइलिन आवरण श्वान कोशिकाओं (Schwann cells) द्वारा बनाया जाता है।
सिनैप्स के प्रकारों में ‘विद्युत सिनैप्स’ (Electrical Synapse) भी होते हैं, जहाँ दो न्यूरॉन इतने पास होते हैं कि करंट सीधा पार हो जाता है (यह बहुत तीव्र होता है)।
न्यूरॉन की संरचना और कार्य का यह अनोखा नेटवर्क ही मानव की बुद्धि, चेतना, भावनाओं और ‘आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क’ (AI/ANN) की प्रेरणा का मुख्य स्रोत है।