s ब्लॉक के तत्व

s ब्लॉक के तत्व

1. विस्तृत प्रस्तावना: s ब्लॉक के तत्व क्या हैं?

आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table) के एकदम बायीं ओर (Extreme Left) स्थित तत्वों के समूह को s ब्लॉक के तत्व कहा जाता है। रसायन विज्ञान की तकनीकी भाषा में, “वे तत्व जिनके परमाणुओं का अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश के s-उपकोश (s-orbital) में प्रवेश करता है, s-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।”

चूंकि s-उपकोश में अधिकतम केवल 2 इलेक्ट्रॉन ही आ सकते हैं, इसलिए आवर्त सारणी में s-ब्लॉक को केवल दो वर्गों (Groups) में बांटा गया है:

  1. वर्ग 1 (Group 1): क्षार धातुएं (Alkali Metals) – इनका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $ns^1$ होता है।

  2. वर्ग 2 (Group 2): क्षारीय मृदा धातुएं (Alkaline Earth Metals) – इनका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $ns^2$ होता है।

ये तत्व आवर्त सारणी के सबसे अधिक विद्युतधनी (Electropositive) और सबसे अधिक क्रियाशील (Reactive) तत्व हैं। इनकी क्रियाशीलता इतनी अधिक होती है कि ये प्रकृति में कभी भी स्वतंत्र या शुद्ध अवस्था (Free state) में नहीं पाए जाते, बल्कि हमेशा यौगिकों (Compounds) के रूप में मिलते हैं। आइए, इन दोनों वर्गों का अलग-अलग और अत्यंत गहराई से विश्लेषण करें।

2. वर्ग 1: क्षार धातुएं (Alkali Metals)

वर्ग 1 के तत्वों में लिथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K), रूबिडियम (Rb), सीजियम (Cs) और फ्रांशियम (Fr) शामिल हैं।

‘क्षार’ (Alkali) नाम क्यों पड़ा?

अरबी भाषा में ‘अल-कली’ (Al-qali) का अर्थ होता है ‘पौधों की राख’ (Plant ashes)। चूंकि सोडियम और पोटैशियम के यौगिक सबसे पहले पौधों की राख से ही प्राप्त किए गए थे, इसलिए इन्हें यह नाम मिला। इसके अलावा, ये धातुएं जल (Water) के साथ अभिक्रिया करके प्रबल क्षारीय हाइड्रॉक्साइड (Strong basic hydroxides जैसे NaOH, KOH) बनाती हैं, इसलिए इन्हें क्षार धातुएं कहा जाता है। इनमें ‘फ्रांशियम’ (Fr) एक रेडियोधर्मी (Radioactive) तत्व है।

A. भौतिक गुण (Physical Properties)

s ब्लॉक के तत्व में वर्ग 1 की धातुओं के भौतिक गुण बहुत ही विशिष्ट होते हैं:

  • नरम प्रकृति (Softness): ये धातुएं इतनी नरम (Soft) होती हैं कि इन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है (विशेषकर सोडियम को)। इनका घनत्व बहुत कम होता है (लिथियम, सोडियम और पोटैशियम पानी से भी हल्के होते हैं और उस पर तैर सकते हैं)।

  • परमाणु और आयनिक त्रिज्या (Atomic and Ionic Radii): अपने संबंधित आवर्त (Period) में इन तत्वों का आकार सबसे बड़ा होता है। वर्ग में ऊपर से नीचे (Li से Cs) जाने पर परमाणु त्रिज्या लगातार बढ़ती है क्योंकि नए कोश (Shells) जुड़ते जाते हैं।

  • आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy): आकार बड़ा होने के कारण बाह्यतम इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण बहुत कम होता है। इसलिए इनकी आयनन ऊर्जा पूरी आवर्त सारणी में सबसे कम होती है। (नीचे जाने पर यह और घटती है)।

  • ज्वाला परीक्षण (Flame Test): जब इन धातुओं या इनके लवणों को बुन्सेन बर्नर की लौ (Flame) पर गर्म किया जाता है, तो इनके बाहरी इलेक्ट्रॉन ऊर्जा पाकर उच्च ऊर्जा स्तर में कूद जाते हैं। जब वे वापस लौटते हैं, तो दृश्य प्रकाश (Visible light) के रूप में ऊर्जा छोड़ते हैं, जिससे लौ को एक विशिष्ट रंग मिलता है:

    • लिथियम (Li): किरमिजी लाल (Crimson Red)

    • सोडियम (Na): सुनहरा पीला (Golden Yellow)

    • पोटैशियम (K): हल्का बैंगनी (Pale Violet / Lilac)

    • रूबिडियम (Rb): लाल-बैंगनी (Red Violet)

    • सीजियम (Cs): नीला (Blue)

B. रासायनिक गुण (Chemical Properties)

  • वायु के प्रति क्रियाशीलता: ये हवा (Oxygen और Moisture) के प्रति अत्यधिक क्रियाशील होते हैं और तुरंत मलिन (Tarnish) हो जाते हैं। इसलिए सोडियम और पोटैशियम को हमेशा केरोसिन (मिट्टी के तेल) में डुबोकर रखा जाता है

  • जल के साथ अभिक्रिया: ये पानी के साथ भयंकर और विस्फोटक अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस ($H_2$) मुक्त करते हैं और आग पकड़ लेते हैं। (जैसे $2Na + 2H_2O \rightarrow 2NaOH + H_2$)

  • अपचायक प्रकृति (Reducing Nature): चूँकि ये अपना एक बाहरी इलेक्ट्रॉन ($ns^1$) बहुत आसानी से त्याग देते हैं, इसलिए ये बहुत ही प्रबल अपचायक (Strong Reducing Agents) होते हैं।

  • द्रव अमोनिया में विलयन (Solution in Liquid Ammonia): यह इनका सबसे अनोखा गुण है। क्षार धातुएं द्रव अमोनिया में घुलकर गहरे नीले रंग (Deep Blue) का विलयन बनाती हैं। यह नीला रंग ‘अमोनियाकृत इलेक्ट्रॉनों’ (Ammoniated electrons) के कारण होता है। यह विलयन विद्युत का सुचालक और अनुचुंबकीय (Paramagnetic) होता है।

3. लिथियम का असंगत व्यवहार (Anomalous Behavior of Lithium)

s ब्लॉक के तत्व पढ़ते समय यह जानना बहुत जरूरी है कि प्रत्येक वर्ग का पहला तत्व अपने ही परिवार के बाकी सदस्यों से थोड़ा अलग व्यवहार करता है। लिथियम (Li) भी अपने वर्ग में कुछ अनोखे गुण दिखाता है:

  • कारण: इसका परमाणु आकार अत्यंत छोटा होता है और इसकी ध्रुवण क्षमता (Polarizing power) बहुत उच्च होती है।

  • विशेषताएं: लिथियम वर्ग 1 की सबसे कठोर धातु है। यह पानी के साथ सबसे कम उग्र अभिक्रिया करता है। इसके यौगिक (जैसे LiCl) सहसंयोजक (Covalent) प्रकृति के होते हैं, जबकि अन्य क्षार धातुओं के यौगिक आयनिक (Ionic) होते हैं।

4. वर्ग 2: क्षारीय मृदा धातुएं (Alkaline Earth Metals)

वर्ग 2 के तत्वों में बेरीलियम (Be), मैग्नीशियम (Mg), कैल्शियम (Ca), स्ट्रोंशियम (Sr), बेरियम (Ba) और रेडियम (Ra) शामिल हैं।

नामकरण:

इन्हें ‘क्षारीय मृदा धातुएं’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके ऑक्साइड (Oxides) और हाइड्रॉक्साइड प्रकृति में क्षारीय (Basic) होते हैं, और ये धातुएं मुख्य रूप से पृथ्वी की भूपर्पटी (Earth’s crust) या मिट्टी (Mridha/Earth) में खनिजों के रूप में पाई जाती हैं। इनमें ‘रेडियम’ (Ra) एक रेडियोधर्मी तत्व है जिसकी खोज मैडम क्यूरी ने की थी।

A. भौतिक गुण (Physical Properties)

  • त्रिज्या और कठोरता: वर्ग 1 की तुलना में वर्ग 2 के तत्वों का आकार छोटा होता है। आकार छोटा होने और बाह्यतम कोश में 2 इलेक्ट्रॉन ($ns^2$) होने के कारण इनमें धात्विक बंध (Metallic bonding) अधिक मजबूत होता है। इसलिए ये क्षार धातुओं की तुलना में अधिक कठोर और सघन (Dense) होते हैं।

  • आयनन एन्थैल्पी: आकार छोटा होने के कारण इनकी प्रथम आयनन ऊर्जा क्षार धातुओं से अधिक होती है।

  • ज्वाला परीक्षण (Flame Colors): क्षारीय मृदा धातुएं भी ज्वाला को विशिष्ट रंग प्रदान करती हैं:

    • कैल्शियम (Ca): ईंट जैसा लाल (Brick Red)

    • स्ट्रोंशियम (Sr): किरमिजी लाल (Crimson)

    • बेरियम (Ba): सेब जैसा हरा (Apple Green)

    • अपवाद: बेरीलियम (Be) और मैग्नीशियम (Mg) ज्वाला को कोई रंग नहीं देते, क्योंकि इनका आकार छोटा होता है और इनके इलेक्ट्रॉनों को उत्तेजित करने के लिए ज्वाला की ऊष्मा पर्याप्त नहीं होती।

B. रासायनिक गुण (Chemical Properties)

  • जल के साथ अभिक्रिया: ये क्षार धातुओं की तुलना में कम क्रियाशील होते हैं। बेरीलियम (Be) पानी या भाप के साथ बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करता। मैग्नीशियम (Mg) केवल गर्म पानी या भाप के साथ अभिक्रिया करता है, जबकि Ca, Sr और Ba ठंडे पानी के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं।

  • हैलोजन के साथ क्रिया: ये हैलोजन (X) के साथ उच्च तापमान पर जुड़कर हेलाइड ($MX_2$) बनाते हैं। $BeCl_2$ सहसंयोजक होता है, जबकि अन्य सभी हेलाइड आयनिक होते हैं।

  • सल्फेट और कार्बोनेट: वर्ग 2 के सल्फेटों ($MSO_4$) और कार्बोनेटों ($MCO_3$) की जल में विलेयता (Solubility) वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है (यानी $BeSO_4$ पानी में घुलनशील है, जबकि $BaSO_4$ अघुलनशील है)। इसका कारण ऊपर से नीचे जाने पर जलयोजन ऊर्जा (Hydration energy) का जालक ऊर्जा (Lattice energy) से कम हो जाना है।

5. विकर्ण संबंध (Diagonal Relationship)

s ब्लॉक के तत्व की एक बहुत ही रहस्यमयी और महत्वपूर्ण विशेषता ‘विकर्ण संबंध’ है। आवर्त सारणी के दूसरे आवर्त के कुछ तत्व, तीसरे आवर्त के उन तत्वों के साथ गुणों में भारी समानता दिखाते हैं जो उनसे विकर्ण (Diagonally / तिरछे) स्थित होते हैं।

  • लिथियम (Li) का मैग्नीशियम (Mg) के साथ संबंध: लिथियम वर्ग 1 का है और मैग्नीशियम वर्ग 2 का, फिर भी दोनों काफी कठोर हैं, दोनों के क्लोराइड पानी को सोखने वाले (Deliquescent) होते हैं, और दोनों ही सीधे नाइट्रोजन से संयोग करके नाइट्राइड बनाते हैं।

  • बेरीलियम (Be) का एल्युमीनियम (Al) के साथ संबंध: दोनों अम्लों और क्षारों के साथ क्रिया करते हैं (उभयधर्मी प्रकृति), और दोनों ही नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$) के प्रति अक्रिय (Passive) हो जाते हैं।

  • कारण: ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विकर्ण पर स्थित इन तत्वों की ‘आयनिक त्रिज्या’ (Ionic size) और ‘ध्रुवण क्षमता’ (Polarizing power / Charge-to-size ratio) लगभग समान हो जाती है।

6. क्षार धातुएं बनाम क्षारीय मृदा धातुएं (Comparison Table)

गुणधर्म (Properties)वर्ग 1 (क्षार धातुएं)वर्ग 2 (क्षारीय मृदा धातुएं)
बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास$ns^1$$ns^2$
ऑक्सीकरण अवस्थाहमेशा +1हमेशा +2
कठोरताबहुत मुलायम (चाकू से कटने योग्य)वर्ग 1 की तुलना में अधिक कठोर
क्रियाशीलता (Reactivity)अत्यधिक क्रियाशीलवर्ग 1 की तुलना में कम क्रियाशील
जल के साथ क्रियाठंडे पानी के साथ विस्फोटक क्रियाठंडे पानी के साथ धीमी क्रिया (Be, Mg अपवाद)
प्रकृति (Nature)प्रबल क्षारीय (Strongly Basic)क्षारीय (Basic)

7. s ब्लॉक तत्वों का जैविक और औद्योगिक महत्व (Biological & Industrial Importance)

s ब्लॉक के तत्व केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं हैं; ये हमारे शरीर और उद्योगों की रीढ़ हैं।

A. जैविक महत्व (Biological Role)

  • सोडियम-पोटैशियम पंप (Na-K Pump): हमारे शरीर के हर न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) और मांसपेशियों के काम करने के लिए सोडियम ($Na^+$) और पोटैशियम ($K^+$) आयनों का संतुलन अनिवार्य है। यह पंप तंत्रिका संकेतों (Nerve impulses) को दिमाग तक पहुँचाने का कार्य करता है।

  • कैल्शियम (Ca): हमारे शरीर का 99% कैल्शियम हड्डियों और दांतों में होता है। इसके अलावा, खून का थक्का जमने (Blood clotting) और मांसपेशियों के संकुचन के लिए कैल्शियम आयन अनिवार्य हैं।

  • मैग्नीशियम (Mg): यह पौधों के हरे रंग यानी क्लोरोफिल (Chlorophyll) का मुख्य केंद्रीय तत्व है, जिसके बिना प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) असंभव है। शरीर में एटीपी (ATP) से जुड़ी सभी एंजाइम प्रतिक्रियाओं में मैग्नीशियम की आवश्यकता होती है।

B. औद्योगिक महत्व (Industrial Uses)

  • लिथियम (Li): आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत—मोबाइल और ईवी (EV) की ‘लिथियम-आयन बैटरी’ बनाने में इसका सबसे ज्यादा उपयोग होता है।

  • सोडियम (Na): तरल सोडियम का उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों (Nuclear reactors) में शीतलक (Coolant) के रूप में किया जाता है। इसके यौगिक—NaCl (नमक), $Na_2CO_3$ (धोने का सोडा) और $NaHCO_3$ (बेकिंग सोडा) उद्योगों की जान हैं।

  • कैल्शियम यौगिक: चूना पत्थर ($CaCO_3$), बुझा हुआ चूना ($Ca(OH)_2$) और प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का उपयोग सीमेंट उद्योग, भवन निर्माण और चिकित्सा (हड्डियां जोड़ने) में भारी मात्रा में होता है।

  • बेरियम (Ba): एक्स-रे (X-ray) लेने से पहले पेट के मरीजों को ‘बेरियम मील’ (Barium meal) पिलाया जाता है ताकि पेट की स्पष्ट तस्वीर मिल सके।

8. निष्कर्ष (Conclusion)

विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण के उपरांत यह स्पष्ट हो जाता है कि s ब्लॉक के तत्व प्रकृति और मानव जीवन दोनों के लिए अपरिहार्य हैं। अपनी उच्च क्रियाशीलता के कारण भले ही ये मुक्त अवस्था में न मिलते हों, लेकिन यौगिकों के रूप में इन्होंने पूरी पृथ्वी को समृद्ध किया है। वर्ग 1 की धातुओं की कोमलता और उनके जलीय विलयनों की प्रबल क्षारीयता, तथा वर्ग 2 की धातुओं की संरचनात्मक उपयोगिता (जैसे हड्डियों में कैल्शियम, पौधों में मैग्नीशियम) रसायन विज्ञान के अद्भुत सामंजस्य को दर्शाती है। विकर्ण संबंध (Diagonal relationship) हमें यह सिखाता है कि आवर्त सारणी केवल वर्गों और आवर्तों का ढांचा नहीं है, बल्कि यह तत्वों के बीच एक गहरा और गणितीय संबंध है। आधुनिक तकनीक, विशेषकर बैटरी ऊर्जा (Lithium) और निर्माण क्षेत्र (Calcium compounds) पूरी तरह से इन्हीं s-ब्लॉक के तत्वों पर निर्भर हैं।

9. अभ्यास प्रश्न (PYQ Type Practice Questions for Mains)

प्रश्न 1: s ब्लॉक के तत्व किसे कहते हैं? आवर्त सारणी में इन्हें कितने वर्गों में बांटा गया है? क्षार धातुओं के प्रमुख भौतिक गुणों (जैसे परमाणु त्रिज्या, आयनन ऊर्जा) का वर्णन करें। (250 शब्द)

प्रश्न 2: क्षार धातुओं (Alkali Metals) और क्षारीय मृदा धातुओं (Alkaline Earth Metals) के रासायनिक गुणों की तुलना कीजिए। बेरीलियम (Be) और मैग्नीशियम (Mg) ज्वाला परीक्षण में रंग क्यों नहीं देते? (200 शब्द)

प्रश्न 3: आवर्त सारणी में ‘विकर्ण संबंध’ (Diagonal Relationship) से आप क्या समझते हैं? लिथियम (Li) और मैग्नीशियम (Mg) के मध्य पाए जाने वाले विकर्ण संबंध के कारणों और समानताओं की विस्तृत विवेचना करें। (250 शब्द)

प्रश्न 4: मानव शरीर और वनस्पति विज्ञान में सोडियम (Na), पोटैशियम (K), कैल्शियम (Ca) और मैग्नीशियम (Mg) आयनों के ‘जैविक महत्व’ (Biological Importance) का मूल्यांकन कीजिए। (200 शब्द)

प्रश्न 5: “क्षार धातुएं द्रव अमोनिया में घुलकर गहरे नीले रंग का विलयन बनाती हैं।” इस परिघटना के पीछे का रासायनिक कारण स्पष्ट करें और इस विलयन के चुंबकीय तथा विद्युतीय गुणों पर प्रकाश डालें। (150 शब्द)

10. परीक्षा के लिए 50 अति महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (Mega Quick Revision Notes)

  1. आवर्त सारणी के वर्ग 1 और वर्ग 2 के तत्वों को सम्मिलित रूप से s ब्लॉक के तत्व कहा जाता है।

  2. इन तत्वों का अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश के s-उपकोश (s-orbital) में प्रवेश करता है।

  3. वर्ग 1 के तत्वों (Li, Na, K, Rb, Cs, Fr) को ‘क्षार धातुएं’ (Alkali Metals) कहा जाता है।

  4. वर्ग 2 के तत्वों (Be, Mg, Ca, Sr, Ba, Ra) को ‘क्षारीय मृदा धातुएं’ (Alkaline Earth Metals) कहा जाता है।

  5. क्षार धातुओं का बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $ns^1$ होता है, जबकि क्षारीय मृदा धातुओं का $ns^2$ होता है।

  6. फ्रांशियम (Fr) और रेडियम (Ra) दोनों ही प्रकृति में रेडियोधर्मी (Radioactive) तत्व हैं।

  7. क्षार धातुएं अत्यंत मुलायम होती हैं; विशेषकर सोडियम (Na) को चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।

  8. लिथियम (Li) सभी ज्ञात ठोस तत्वों में सबसे हल्का तत्व है।

  9. हवा और नमी के प्रति अत्यंत क्रियाशील होने के कारण सोडियम और पोटैशियम को ‘केरोसिन’ (मिट्टी के तेल) में डुबोकर रखा जाता है।

  10. क्षार धातुएं जल के साथ अत्यंत उग्र अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस ($H_2$) और क्षारीय विलयन बनाती हैं।

  11. पूरे आवर्त सारणी में क्षार धातुओं की ‘आयनन एन्थैल्पी’ (Ionization Enthalpy) सबसे कम होती है।

  12. वर्ग 1 में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु और आयनिक त्रिज्या लगातार बढ़ती है।

  13. क्षार धातुएं बुन्सेन ज्वाला (Flame) को विशिष्ट रंग प्रदान करती हैं, जो इलेक्ट्रॉनों के उत्तेजन के कारण होता है।

  14. ज्वाला परीक्षण में लिथियम ‘किरमिजी लाल’ (Crimson Red) और सोडियम ‘सुनहरा पीला’ (Golden Yellow) रंग देता है।

  15. पोटैशियम (K) ज्वाला को ‘हल्का बैंगनी’ (Lilac) और सीजियम (Cs) ‘नीला’ रंग प्रदान करता है।

  16. क्षार धातुएं ‘द्रव अमोनिया’ में घुलकर गहरे नीले रंग का विलयन बनाती हैं।

  17. अमोनिया में विलयन का नीला रंग ‘अमोनियाकृत इलेक्ट्रॉनों’ (Ammoniated electrons) के कारण होता है, जो इसे सुचालक बनाता है।

  18. सभी s ब्लॉक के तत्व प्रबल अपचायक (Strong Reducing Agents) होते हैं।

  19. लिथियम (Li) का आकार बहुत छोटा होने के कारण यह आवर्त सारणी का सबसे प्रबल अपचायक है।

  20. क्षारीय मृदा धातुएं (वर्ग 2) क्षार धातुओं (वर्ग 1) की तुलना में अधिक कठोर और सघन (Dense) होती हैं।

  21. वर्ग 2 के तत्वों की प्रथम आयनन ऊर्जा वर्ग 1 के तत्वों से अधिक होती है, क्योंकि इनका आकार छोटा होता है।

  22. बेरीलियम (Be) और मैग्नीशियम (Mg) ज्वाला परीक्षण में कोई रंग प्रदान नहीं करते हैं।

  23. Be और Mg के आयनन विभव इतने उच्च होते हैं कि ज्वाला की ऊष्मा उनके इलेक्ट्रॉनों को उत्तेजित नहीं कर पाती।

  24. ज्वाला परीक्षण में कैल्शियम ‘ईंट जैसा लाल’ (Brick Red) और बेरियम ‘सेब जैसा हरा’ (Apple Green) रंग देता है।

  25. बेरीलियम (Be) पानी या भाप के साथ बिल्कुल भी अभिक्रिया नहीं करता है।

  26. वर्ग 2 के सल्फेटों (जैसे $BaSO_4$) की जल में विलेयता वर्ग में नीचे जाने पर घटती है।

  27. क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेटों ($MCO_3$) को गर्म करने पर वे ऑक्साइड (MO) और कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) में टूट जाते हैं।

  28. ‘विकर्ण संबंध’ (Diagonal Relationship) के कारण दूसरे आवर्त के कुछ तत्व तीसरे आवर्त के विकर्ण तत्वों के समान गुण दिखाते हैं।

  29. लिथियम (Li) आवर्त सारणी में मैग्नीशियम (Mg) के साथ विकर्ण संबंध प्रदर्शित करता है।

  30. बेरीलियम (Be) आवर्त सारणी में एल्युमीनियम (Al) के साथ विकर्ण संबंध प्रदर्शित करता है।

  31. विकर्ण संबंध का मुख्य कारण तत्वों की ‘आयनिक त्रिज्या’ और ‘ध्रुवण क्षमता’ का लगभग समान होना है।

  32. लिथियम और मैग्नीशियम दोनों ही सीधे नाइट्रोजन गैस के साथ अभिक्रिया करके नाइट्राइड ($Li_3N$, $Mg_3N_2$) बनाते हैं।

  33. सोडियम क्लोराइड (NaCl) को साधारण नमक (Table Salt) कहा जाता है।

  34. सोडियम कार्बोनेट ($Na_2CO_3 \cdot 10H_2O$) को ‘धोने का सोडा’ (Washing Soda) कहा जाता है, जो कठोर जल को मृदु करने के काम आता है।

  35. सोडियम बाइकार्बोनेट ($NaHCO_3$) को ‘बेकिंग सोडा’ (Baking Soda) कहा जाता है।

  36. बेकिंग सोडा का उपयोग रसोई में, एंटासिड (Antacid) के रूप में और अग्निशामक यंत्रों (Fire extinguishers) में होता है।

  37. कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) प्रकृति में चूना पत्थर (Limestone), संगमरमर (Marble) और खड़िया (Chalk) के रूप में पाया जाता है।

  38. ‘बिना बुझा चूना’ (Quick Lime) का रासायनिक सूत्र $CaO$ (कैल्शियम ऑक्साइड) है।

  39. ‘बुझे हुए चूने’ (Slaked Lime) का रासायनिक सूत्र $Ca(OH)_2$ (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) है।

  40. कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट ($CaSO_4 \cdot \frac{1}{2}H_2O$) को ‘प्लास्टर ऑफ पेरिस’ (POP) कहा जाता है, जो हड्डियां जोड़ने के काम आता है।

  41. जिप्सम (Gypsum) का रासायनिक सूत्र $CaSO_4 \cdot 2H_2O$ है, जिसे 393 K पर गर्म करने से POP बनता है।

  42. सीमेंट का मुख्य घटक ‘चूना’ (CaO) होता है, जो लगभग 50-60% मात्रा में पाया जाता है।

  43. मानव शरीर में ‘सोडियम-पोटैशियम पंप’ कोशिकाओं के बीच तंत्रिका संकेतों के संचरण के लिए जिम्मेदार है।

  44. रक्त का थक्का (Blood Clotting) जमने की प्रक्रिया में कैल्शियम आयन ($Ca^{2+}$) अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  45. मानव शरीर का 99% कैल्शियम हड्डियों और दांतों में ‘फ्लोरोएपेटाइट’ खनिजों के रूप में जमा होता है।

  46. पौधों के हरे वर्णक ‘क्लोरोफिल’ (Chlorophyll) का मुख्य केंद्रीय धातु तत्व मैग्नीशियम (Mg) है।

  47. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया मैग्नीशियम आयनों के बिना संभव नहीं है।

  48. तरल सोडियम (Liquid Sodium) का उपयोग ‘नाभिकीय रिएक्टरों’ (Fast breeder reactors) में शीतलक के रूप में किया जाता है।

  49. सीजियम (Cs) और पोटैशियम (K) का उपयोग ‘प्रकाश विद्युत सेलों’ (Photoelectric cells) में किया जाता है क्योंकि इनकी आयनन ऊर्जा बहुत कम होती है।

  50. s ब्लॉक के तत्व प्रकृति में इतने क्रियाशील होते हैं कि उनके अयस्कों से शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए ‘विद्युत अपघटन’ (Electrolysis) विधि का ही प्रयोग किया जाता है।

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