d और f ब्लॉक के तत्व

1. विस्तृत प्रस्तावना: d और f ब्लॉक के तत्व क्या हैं?

आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table) को इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) के आधार पर चार मुख्य ब्लॉकों में बांटा गया है: s, p, d और f ब्लॉक। आवर्त सारणी के एकदम बायीं ओर s-ब्लॉक (क्षारीय धातुएं) है और दायीं ओर p-ब्लॉक (अधातुएं और उपधातुएं) है। इन दोनों के ठीक बीच में जो विशाल पुल या ब्रिज (Bridge) स्थित है, उसे d-ब्लॉक कहा जाता है। और आवर्त सारणी के मुख्य ढांचे से नीचे, दो अलग-अलग पंक्तियों (Rows) में जिन तत्वों को रखा गया है, वे f-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।

d और f ब्लॉक के तत्व रसायन विज्ञान की दुनिया के ‘मल्टी-टैलेंटेड’ (Multi-talented) सुपरस्टार हैं। सोने-चांदी (Gold, Silver) जैसी बहुमूल्य धातुओं से लेकर, खून में पाए जाने वाले आयरन (Iron) और परमाणु बम में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम (Uranium) तक, ये सभी तत्व इसी श्रेणी में आते हैं। आइए, इन दोनों ब्लॉकों का अलग-अलग और अत्यंत गहराई से विश्लेषण करें।

2. d-ब्लॉक के तत्व (संक्रमण तत्व / Transition Elements)

d-ब्लॉक के तत्व वे हैं जिनके परमाणुओं में अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश से ठीक पहले वाले कोश यानी (n-1)d उपकोश (Subshell) में प्रवेश करता है। ये आवर्त सारणी के वर्ग 3 से लेकर वर्ग 12 तक फैले हुए हैं।

A. संक्रमण तत्व (Transition Elements) क्यों कहलाते हैं?

इन तत्वों को ‘संक्रमण तत्व’ कहा जाता है क्योंकि ये s-ब्लॉक (अत्यधिक विद्युतधनी) और p-ब्लॉक (अत्यधिक विद्युतऋणी) तत्वों के बीच गुणों में एक ‘संक्रमण’ (Transition / बदलाव) प्रदर्शित करते हैं।

  • IUPAC की सख्त परिभाषा: केवल वे तत्व संक्रमण तत्व कहलाते हैं, जिनके परमाणु अवस्था या किसी भी सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था (Oxidation state) में d-उपकोश आंशिक रूप से भरा हो (Partially filled d-orbital, $d^{1}$ से $d^{9}$)

  • अपवाद (Exceptions – UPSC/NEET का पसंदीदा प्रश्न): वर्ग 12 के तत्व—जिंक (Zn), कैडमियम (Cd) और मरकरी (Hg)—d-ब्लॉक के तत्व तो हैं, लेकिन इन्हें ‘संक्रमण तत्व’ नहीं माना जाता। क्यों? क्योंकि इनकी मूल अवस्था और आयनिक अवस्था दोनों में d-उपकोश पूरी तरह से भरा होता है ($d^{10}$ विन्यास)। इन्हें ‘छद्म संक्रमण तत्व’ (Pseudo-transition elements) कहा जाता है।

B. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और d-ब्लॉक की श्रेणियां (Series)

d-ब्लॉक का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $(n-1)d^{1-10} ns^{1-2}$ होता है (जहाँ n = 4 से 7)। d-ब्लॉक को मुख्य रूप से 4 श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. 3d श्रेणी (प्रथम संक्रमण श्रेणी): स्कैंडियम ($Sc_{21}$) से जिंक ($Zn_{30}$) तक। (आवर्त 4)

  2. 4d श्रेणी (द्वितीय संक्रमण श्रेणी): इट्रियम ($Y_{39}$) से कैडमियम ($Cd_{48}$) तक। (आवर्त 5)

  3. 5d श्रेणी (तृतीय संक्रमण श्रेणी): लैंथेनम ($La_{57}$) और हेफनियम ($Hf_{72}$) से मरकरी ($Hg_{80}$) तक। (आवर्त 6)

  4. 6d श्रेणी (चतुर्थ संक्रमण श्रेणी): एक्टीनियम ($Ac_{89}$) और रदरफोर्डियम ($Rf_{104}$) से कॉपरनिसियम ($Cn_{112}$) तक। (आवर्त 7 – यह श्रेणी अपूर्ण और मानव-निर्मित है)।

d और f ब्लॉक के तत्व
d और f ब्लॉक के तत्व

3. d-ब्लॉक के तत्वों के भौतिक गुण (Physical Properties)

d और f ब्लॉक के तत्व उत्कृष्ट धात्विक गुणों का प्रदर्शन करते हैं। d-ब्लॉक के तत्वों की भौतिक विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

I. धात्विक प्रकृति (Metallic Nature)

Zn, Cd और Hg को छोड़कर शेष सभी संक्रमण तत्व अत्यंत कठोर धातुएं हैं। ये विद्युत और ऊष्मा के सुचालक (Good conductors) होते हैं और इनमें धात्विक चमक, तन्यता (Ductility) और आघातवर्धनीयता (Malleability) पाई जाती है। इनकी कठोरता का मुख्य कारण इनके पास मौजूद अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉन (Unpaired d-electrons) हैं, जो मजबूत धात्विक बंध (Metallic bonds) बनाते हैं।

II. गलनांक और क्वथनांक (Melting and Boiling Points)

  • इन धातुओं के गलनांक (Melting Point) बहुत उच्च होते हैं।

  • कारण: (n-1)d उपकोश के अयुग्मित इलेक्ट्रॉन धात्विक जालक (Metallic lattice) में प्रबल सहसंयोजक बंध बनाते हैं। जितने अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होंगे, गलनांक उतना ही उच्च होगा।

  • अपवाद: 3d, 4d और 5d श्रेणियों में मध्य तक गलनांक बढ़ता है (Cr, Mo, W पर अधिकतम होता है, क्योंकि यहाँ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन अधिकतम 6 होते हैं), और फिर घटने लगता है। टंगस्टन (W – Tungsten) का गलनांक d-ब्लॉक में सबसे अधिक (लगभग $3422^{\circ}C$) होता है, इसीलिए इसका उपयोग बल्ब के फिलामेंट में होता है। पारा (Hg) कमरे के तापमान पर द्रव (Liquid) है क्योंकि इसमें धात्विक बंध बहुत कमजोर होते हैं ($d^{10}$ विन्यास)।

III. परमाण्वीय और आयनिक त्रिज्या (Atomic and Ionic Radii)

  • किसी भी संक्रमण श्रेणी में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या पहले धीरे-धीरे घटती है (क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश / Effective Nuclear Charge बढ़ता है)।

  • श्रेणी के मध्य (जैसे Fe, Co, Ni) में त्रिज्या लगभग समान (Constant) हो जाती है, क्योंकि आने वाले नए इलेक्ट्रॉन d-उपकोश में जाते हैं, जो बाहरी s-इलेक्ट्रॉनों को प्रतिकर्षित (Shielding effect) करते हैं।

  • श्रेणी के अंत (Cu, Zn) में त्रिज्या थोड़ी सी बढ़ जाती है, क्योंकि d-उपकोश पूरा भर जाने के कारण इलेक्ट्रॉनों के बीच आपसी प्रतिकर्षण (Electron-electron repulsion) हावी हो जाता है।

4. d-ब्लॉक के तत्वों के अद्भुत रासायनिक गुण (Chemical Properties)

जब हम d और f ब्लॉक के तत्व का रासायनिक दृष्टिकोण से अध्ययन करते हैं, तो d-ब्लॉक के तत्व अपनी विविधता से हमें चौंका देते हैं। इनके प्रमुख रासायनिक गुण इस प्रकार हैं:

A. परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था (Variable Oxidation States)

  • s और p ब्लॉक के विपरीत, d-ब्लॉक के तत्व एक से अधिक ऑक्सीकरण अवस्थाएं (जैसे Fe +2 और +3, Cu +1 और +2) प्रदर्शित करते हैं।

  • कारण: इनके (n-1)d और ns उपकोशों की ऊर्जा में बहुत कम अंतर (Small energy difference) होता है। इसलिए रासायनिक बंध बनाने में ns इलेक्ट्रॉनों के साथ-साथ d-इलेक्ट्रॉन भी भाग ले सकते हैं।

  • सर्वाधिक ऑक्सीकरण अवस्था: 3d श्रेणी में मैंगनीज (Mn) सबसे अधिक (+7) अवस्था प्रदर्शित करता है। पूरी आवर्त सारणी में ऑस्मियम (Os) और रूथेनियम (Ru) अधिकतम +8 ऑक्सीकरण अवस्था दिखाते हैं।

B. रंगीन आयनों का निर्माण (Formation of Colored Ions)

यह d-ब्लॉक तत्वों का सबसे खूबसूरत गुण है। इनके अधिकांश यौगिक ठोस या विलयन (Solution) अवस्था में रंगीन होते हैं (जैसे कॉपर सल्फेट नीला होता है)।

  • कारण: रंग का मुख्य कारण d-d संक्रमण (d-d Transition) है। जब किसी संक्रमण धातु के पास ‘अयुग्मित इलेक्ट्रॉन’ (Unpaired electrons) होते हैं, तो वे दृश्य प्रकाश (Visible light) से ऊर्जा सोखकर निम्न ऊर्जा वाले d-ऑर्बिटल से उच्च ऊर्जा वाले d-ऑर्बिटल में छलांग लगाते हैं। जो रंग वे सोखते हैं, उसका पूरक रंग (Complementary color) हमें दिखाई देता है।

  • नोट: जिनके पास अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते (जैसे $Zn^{+2}$, $Sc^{+3}$, $Cu^{+1}$, $Ti^{+4}$), उनके यौगिक रंगहीन (Colorless) और सफेद होते हैं।

C. चुंबकीय गुण (Magnetic Properties)

चुंबकत्व के आधार पर ये पदार्थ दो प्रकार के होते हैं:

  1. अनुचुंबकीय (Paramagnetic): जिन आयनों या परमाणुओं में एक या अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, वे चुंबकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या जितनी अधिक होगी, अनुचुंबकत्व उतना ही अधिक होगा।

  2. प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic): जिनमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित (Paired) होते हैं, वे चुंबकीय क्षेत्र से प्रतिकर्षित (Repel) होते हैं (जैसे $Zn^{+2}$)।

  • चुंबकीय आघूर्ण निकालने का सूत्र है: $\mu = \sqrt{n(n+2)}$ बोहर मैग्नेटॉन (BM), जहाँ n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या।

D. उत्प्रेरकीय गुण (Catalytic Properties)

उद्योगों में d-ब्लॉक धातुओं का भारी मात्रा में ‘उत्प्रेरक’ (Catalyst) के रूप में उपयोग होता है।

  • कारण: ये परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएं दिखा सकते हैं, जिससे ये अभिकारकों (Reactants) के साथ आसानी से मध्यवर्ती (Intermediate) यौगिक बना लेते हैं। साथ ही, इनका पृष्ठ क्षेत्रफल (Surface area) बड़ा होता है जो अभिकारकों को चिपकने की जगह देता है।

  • उदाहरण:

    • हैबर विधि (अमोनिया निर्माण) में लोहा (Fe) चूर्ण।

    • संपर्क विधि (सल्फ्यूरिक अम्ल निर्माण) में वैनेडियम पेंटाऑक्साइड ($V_2O_5$)

    • वनस्पति तेल से वनस्पति घी (हाइड्रोजनीकरण) बनाने में निकल (Ni)

E. संकुल यौगिकों का निर्माण (Complex Formation)

d-ब्लॉक के तत्व लिगेंड्स (Ligands – जैसे $NH_3$, $H_2O$, $CN^-$) के साथ मिलकर जटिल संकुल यौगिक (Complex compounds) बनाते हैं।

  • कारण: इनके धातु आयनों का आकार छोटा होता है, नाभिकीय आवेश उच्च होता है, और सबसे महत्वपूर्ण, इनके पास लिगेंड्स से लोन-पेयर (Lone pair) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने के लिए खाली d-ऑर्बिटल (Vacant d-orbitals) उपलब्ध होते हैं।

F. अंतराकाशी यौगिक (Interstitial Compounds)

जब संक्रमण धातुओं के क्रिस्टल जालक (Crystal lattice) के बीच के खाली स्थानों (Voids/Interstices) में छोटे आकार के परमाणु (जैसे H, C, N, B) फंस जाते हैं, तो अंतराकाशी यौगिक बनते हैं (जैसे स्टील, कास्ट आयरन)। ये यौगिक बहुत कठोर होते हैं और इनकी चालकता (Conductivity) बनी रहती है।

G. मिश्रधातुओं का निर्माण (Alloy Formation)

d-ब्लॉक की धातुएं आपस में मिलकर आसानी से मिश्रधातु (Alloys – जैसे पीतल, कांसा, स्टेनलेस स्टील) बना लेती हैं।

  • कारण: इन धातुओं के परमाणुओं के आकार में बहुत कम अंतर (15% से कम) होता है, जिससे एक धातु का परमाणु दूसरी धातु के क्रिस्टल जालक में आसानी से फिट हो जाता है (ह्यूम-रोथरी नियम)।

5. f-ब्लॉक के तत्व (अंतः संक्रमण तत्व / Inner Transition Elements)

अब हम d और f ब्लॉक के तत्व के उस हिस्से में चलते हैं जिसे आवर्त सारणी के मुख्य घर से बाहर नीचे की ओर रखा गया है। f-ब्लॉक के तत्वों में आने वाला अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश से दो कोश भीतर यानी (n-2)f उपकोश (Anti-penultimate shell) में प्रवेश करता है।

इन्हें ‘अंतः संक्रमण तत्व’ (Inner Transition Elements) कहा जाता है क्योंकि इनका f-उपकोश, d-ब्लॉक (संक्रमण तत्वों) के भी अंदर स्थित होता है। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $(n-2)f^{1-14} (n-1)d^{0-1} ns^2$ होता है।

f-ब्लॉक को दो श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. लैंथेनाइड्स (4f श्रेणी)

  2. एक्टिनाइड्स (5f श्रेणी)

आइए इनका विस्तृत अध्ययन करें।

6. लैंथेनाइड्स (Lanthanides – 4f Series)

ये आवर्त 6 के तत्व हैं। चूंकि ये तत्व लैंथेनम ($La_{57}$) के बाद आते हैं और इनके गुण लैंथेनम से बहुत मिलते-जुलते हैं, इसलिए इन्हें लैंथेनाइड्स या ‘लैंथेनॉन’ कहा जाता है।

  • विस्तार: सीरियम ($Ce_{58}$) से लेकर ल्यूटेटियम ($Lu_{71}$) तक कुल 14 तत्व।

  • इन्हें प्राचीन काल में ‘दुर्लभ मृदा तत्व’ (Rare Earth Elements) भी कहा जाता था, यद्यपि अब ये दुर्लभ नहीं हैं।

  • ऑक्सीकरण अवस्था: इनकी सबसे सामान्य और स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था +3 है। हालांकि, कुछ तत्व +2 (जैसे यूरोपियम $Eu^{+2}$) और +4 (जैसे सीरियम $Ce^{+4}$) भी प्रदर्शित करते हैं, जो f-उपकोश के खाली ($f^0$), आधे भरे ($f^7$) या पूरे भरे ($f^{14}$) होने के स्थायित्व (Stability) के कारण होता है।

🔥 लैंथेनाइड आकुंचन / संकुचन (Lanthanide Contraction – UPSC का महा-फैक्ट)

f-ब्लॉक में यह सबसे महत्वपूर्ण परिघटना है। लैंथेनाइड श्रेणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर (Ce से Lu तक), परमाणु और आयनिक त्रिज्या (Atomic and Ionic Radii) में लगातार और बहुत ही धीमी गति से कमी (सिकुड़न) आती है। इसे लैंथेनाइड आकुंचन कहते हैं।

  • कारण: जैसे-जैसे परमाणु क्रमांक बढ़ता है, नया इलेक्ट्रॉन 4f-उपकोश में जाता है। 4f-इलेक्ट्रॉनों का ‘परिरक्षण प्रभाव’ (Shielding Effect) बहुत ही दुर्बल (Poor) होता है। इसलिए, बढ़ता हुआ नाभिकीय आवेश (Nuclear charge) बाहरी इलेक्ट्रॉनों को अधिक मजबूती से अपनी ओर खींचता है, जिससे परमाणु का आकार सिकुड़ जाता है।

  • परिणाम (Consequences):

    1. आकार में समानता: लैंथेनाइड आकुंचन के कारण ही 4d और 5d संक्रमण श्रेणियों के तत्वों का आकार लगभग बराबर हो जाता है (जैसे Zr और Hf का आकार लगभग समान होता है, जिससे इन्हें अलग करना बहुत मुश्किल हो जाता है)। इन्हें ‘जुड़वां तत्व’ (Chemical twins) कहा जाता है।

    2. क्षारीय प्रकृति में कमी: Ce से Lu तक जाने पर $Ln^{+3}$ आयन का आकार छोटा होता जाता है, जिससे सहसंयोजक गुण (Fajan’s Rule) बढ़ता है। परिणामस्वरूप, इनके हाइड्रॉक्साइडों की क्षारीय प्रकृति (Basicity of Hydroxides) लगातार घटती जाती है। (यानी $Ce(OH)_3$ सबसे अधिक क्षारीय और $Lu(OH)_3$ सबसे कम क्षारीय होता है)।

7. एक्टिनाइड्स (Actinides – 5f Series)

ये आवर्त 7 के तत्व हैं। चूंकि ये एक्टीनियम ($Ac_{89}$) के बाद आते हैं, इसलिए इन्हें एक्टिनाइड्स कहा जाता है।

  • विस्तार: थोरियम ($Th_{90}$) से लेकर लॉरेंशियम ($Lr_{103}$) तक कुल 14 तत्व।

  • रेडियोएक्टिव प्रकृति: लैंथेनाइड्स के विपरीत, सभी एक्टिनाइड्स रेडियोधर्मी (Radioactive) होते हैं। इनकी अर्ध-आयु (Half-life) बहुत कम होती है, जिससे इनका अध्ययन बहुत कठिन होता है।

  • पराधूरेनिक तत्व (Transuranic Elements): यूरेनियम ($U_{92}$) के बाद आने वाले सभी एक्टिनाइड तत्व प्रकृति में नहीं पाए जाते, बल्कि उन्हें कृत्रिम रूप से प्रयोगशालाओं (नाभिकीय रिएक्टरों) में बनाया गया है। यूरेनियम के बाद के सभी तत्वों को ‘पराधूरेनिक’ या ‘परायुरेनियम तत्व’ (Transuranic elements) कहा जाता है।

एक्टिनाइड आकुंचन (Actinide Contraction)

लैंथेनाइड्स की तरह, एक्टिनाइड्स में भी बायीं से दायीं ओर जाने पर आकार में कमी आती है।

  • महत्वपूर्ण तथ्य: एक्टिनाइड आकुंचन, लैंथेनाइड आकुंचन की तुलना में अधिक (Greater) होता है। इसका कारण यह है कि 5f-इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect), 4f-इलेक्ट्रॉनों की तुलना में और भी अधिक दुर्बल होता है, जिससे नाभिक बाहरी इलेक्ट्रॉनों को और ज्यादा जोर से अंदर खींच लेता है।

8. लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स के बीच प्रमुख अंतर (Comparison)

  1. ऑक्सीकरण अवस्था: लैंथेनाइड्स मुख्य रूप से +3, और कभी-कभी +2, +4 दिखाते हैं। जबकि एक्टिनाइड्स उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएं (+3, +4, +5, +6, +7 तक) प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि 5f, 6d और 7s ऊर्जा स्तरों के बीच अंतर बहुत कम होता है।

  2. रेडियोएक्टिविटी: लैंथेनाइड्स में केवल प्रोमेथियम (Pm) रेडियोधर्मी है, जबकि सभी एक्टिनाइड्स रेडियोधर्मी हैं।

  3. संकुल निर्माण (Complex Formation): लैंथेनाइड्स में संकुल (Complex) बनाने की प्रवृत्ति बहुत कम होती है, जबकि एक्टिनाइड्स बहुत आसानी से संकुल बनाते हैं।

  4. ऑक्सो-आयन (Oxo-ions): लैंथेनाइड्स ऑक्सो-आयन नहीं बनाते, जबकि एक्टिनाइड्स आसानी से ऑक्सो-आयन (जैसे $UO_2^{+2}$, $PuO_2^{+2}$) बनाते हैं।

9. निष्कर्ष (Conclusion)

विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण के उपरांत यह सिद्ध होता है कि d और f ब्लॉक के तत्व हमारी आधुनिक सभ्यता और औद्योगिक विकास की रीढ़ हैं। d-ब्लॉक की धातुएं (जैसे आयरन, कॉपर, जिंक, टाइटेनियम) न केवल हमारे पुलों, गगनचुंबी इमारतों और मशीनों का निर्माण करती हैं, बल्कि रक्त में हीमोग्लोबिन (आयरन) और विटामिन B12 (कोबाल्ट) के रूप में हमारे शरीर को जीवित भी रखती हैं। उत्प्रेरकों के बिना रासायनिक उद्योग पंगु हो जाएगा। दूसरी ओर, f-ब्लॉक के लैंथेनाइड्स आज हमारे कलर टीवी, लेजर (Laser), और आधुनिक सुपर-मैग्नेट्स (Neodymium magnets) को शक्ति दे रहे हैं, जबकि एक्टिनाइड्स (यूरेनियम और प्लूटोनियम) दुनिया की परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) और सुरक्षा का मुख्य स्रोत हैं। अतः इन तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और रासायनिक व्यवहार को समझना आधुनिक विज्ञान की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

10. अभ्यास प्रश्न (PYQ Type Practice Questions for Mains)

प्रश्न 1: d और f ब्लॉक के तत्व क्या हैं? ‘संक्रमण तत्वों’ की परिभाषा दीजिए तथा स्पष्ट करें कि जिंक (Zn), कैडमियम (Cd) और मरकरी (Hg) को संक्रमण तत्व क्यों नहीं माना जाता है? (250 शब्द)

प्रश्न 2: d-ब्लॉक के तत्व रंगीन आयनों (Colored ions) का निर्माण क्यों करते हैं? d-d संक्रमण के सिद्धांत की विस्तृत व्याख्या करते हुए स्पष्ट करें कि $Zn^{+2}$ और $Sc^{+3}$ रंगहीन क्यों होते हैं। (200 शब्द)

प्रश्न 3: ‘लैंथेनाइड आकुंचन’ (Lanthanide Contraction) से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख कारणों (Shielding effect) और रासायनिक परिणामों (जैसे Zr और Hf के आकार में समानता) का विस्तृत मूल्यांकन करें। (250 शब्द)

प्रश्न 4: d-ब्लॉक के तत्वों के ‘उत्प्रेरकीय गुणों’ (Catalytic Properties) और ‘परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाओं’ (Variable Oxidation States) के कारणों को स्पष्ट कीजिए। उपयुक्त उदाहरण भी दें। (200 शब्द)

प्रश्न 5: f-ब्लॉक के तत्वों (अंतः संक्रमण तत्वों) के अंतर्गत लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स के बीच प्रमुख रासायनिक और भौतिक अंतरों की तुलना कीजिए। ‘पराधूरेनिक तत्वों’ (Transuranic elements) से क्या आशय है? (150 शब्द)

11. परीक्षा के लिए 50 अति महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (Mega Quick Revision Notes)

  1. आवर्त सारणी में s-ब्लॉक और p-ब्लॉक के मध्य स्थित तत्वों को ‘d-ब्लॉक के तत्व’ कहा जाता है।

  2. d-ब्लॉक के तत्वों को ‘संक्रमण तत्व’ (Transition Elements) भी कहा जाता है।

  3. d-ब्लॉक के तत्व आवर्त सारणी के वर्ग 3 से लेकर वर्ग 12 तक स्थित हैं।

  4. संक्रमण तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $(n-1)d^{1-10} ns^{1-2}$ होता है।

  5. d और f ब्लॉक के तत्व में, d-ब्लॉक तत्वों के परमाणु या आयनिक अवस्था में d-उपकोश आंशिक रूप से ($d^{1}$ से $d^{9}$) भरा होता है।

  6. जिंक (Zn), कैडमियम (Cd) और मरकरी (Hg) को संक्रमण तत्व नहीं माना जाता है।

  7. Zn, Cd और Hg के d-उपकोश मूल और आयनिक दोनों अवस्थाओं में पूर्णतः भरे ($d^{10}$) होते हैं (छद्म संक्रमण तत्व)।

  8. d-ब्लॉक की प्रथम संक्रमण श्रेणी (3d) स्कैंडियम ($Sc_{21}$) से शुरू होकर जिंक ($Zn_{30}$) पर समाप्त होती है।

  9. d-ब्लॉक के तत्वों में प्रबल ‘धात्विक बंध’ (Metallic bonding) पाए जाते हैं, जिसके कारण ये कठोर होते हैं।

  10. धात्विक बंध की प्रबलता d-उपकोश में उपस्थित ‘अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों’ (Unpaired electrons) की संख्या पर निर्भर करती है।

  11. टंगस्टन (W) का गलनांक (Melting Point) d-ब्लॉक के तत्वों में सर्वाधिक (लगभग 3422°C) होता है।

  12. मरकरी (Hg) एकमात्र d-ब्लॉक धातु है जो कमरे के ताप पर द्रव (Liquid) अवस्था में पाई जाती है।

  13. d-ब्लॉक के तत्व एक से अधिक ऑक्सीकरण अवस्था (Variable Oxidation State) प्रदर्शित करते हैं।

  14. 3d श्रेणी में मैंगनीज (Mn) सर्वाधिक ऑक्सीकरण अवस्था (+7) प्रदर्शित करता है।

  15. पूरी आवर्त सारणी में ऑस्मियम (Os) और रूथेनियम (Ru) सर्वाधिक +8 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं।

  16. d-ब्लॉक के तत्वों के अधिकांश यौगिक रंगीन (Colored) होते हैं।

  17. संक्रमण धातुओं के यौगिकों के रंगीन होने का मुख्य कारण ‘d-d संक्रमण’ (d-d Transition) है।

  18. जिन आयनों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते (जैसे $Cu^{+1}$, $Zn^{+2}$, $Sc^{+3}$), वे रंगहीन और सफेद होते हैं।

  19. अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण अधिकांश संक्रमण तत्व ‘अनुचुंबकीय’ (Paramagnetic) होते हैं।

  20. चुंबकीय आघूर्ण (Magnetic moment) निकालने का सूत्र $\mu = \sqrt{n(n+2)}$ BM है, जहाँ n अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।

  21. d-ब्लॉक के तत्व उत्कृष्ट उत्प्रेरक (Catalyst) होते हैं, क्योंकि ये अपनी ऑक्सीकरण अवस्था आसानी से बदल सकते हैं।

  22. अमोनिया बनाने की ‘हैबर विधि’ में लोहे (Fe) के चूर्ण का उत्प्रेरक के रूप में प्रयोग किया जाता है।

  23. सल्फ्यूरिक अम्ल बनाने की ‘संपर्क विधि’ में वैनेडियम पेंटाऑक्साइड ($V_2O_5$) उत्प्रेरक का कार्य करता है।

  24. संक्रमण धातुएं छोटे परमाणुओं (H, C, N) को अपने जालक में फंसाकर ‘अंतराकाशी यौगिक’ (Interstitial compounds) बनाती हैं।

  25. अंतराकाशी यौगिक रासायनिक रूप से अक्रिय (Inert) होते हैं लेकिन इनकी कठोरता शुद्ध धातु से अधिक होती है।

  26. संक्रमण धातुएं बहुत आसानी से मिश्रधातु (Alloys) बनाती हैं, क्योंकि इनके परमाणुओं के आकार में बहुत कम अंतर होता है।

  27. d और f ब्लॉक के तत्व में, f-ब्लॉक तत्वों को ‘अंतः संक्रमण तत्व’ (Inner Transition Elements) कहा जाता है।

  28. f-ब्लॉक के तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $(n-2)f^{1-14} (n-1)d^{0-1} ns^2$ होता है।

  29. f-ब्लॉक तत्वों को दो श्रेणियों में बांटा गया है: लैंथेनाइड्स (4f) और एक्टिनाइड्स (5f)।

  30. लैंथेनाइड श्रेणी सीरियम ($Ce_{58}$) से शुरू होकर ल्यूटेटियम ($Lu_{71}$) तक 14 तत्वों से मिलकर बनी है।

  31. लैंथेनाइड्स को पुराने समय में ‘दुर्लभ मृदा तत्व’ (Rare Earth Elements) कहा जाता था।

  32. लैंथेनाइड श्रेणी के तत्वों की सबसे सामान्य और स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था +3 है।

  33. सीरियम (Ce) +3 के अलावा +4 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करता है, जो विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान में बहुत उपयोगी है।

  34. लैंथेनाइड श्रेणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणु त्रिज्या का निरंतर सिकुड़ना ‘लैंथेनाइड आकुंचन’ (Lanthanide Contraction) कहलाता है।

  35. लैंथेनाइड आकुंचन का मुख्य कारण 4f-इलेक्ट्रॉनों का ‘दुर्बल परिरक्षण प्रभाव’ (Poor Shielding Effect) है।

  36. लैंथेनाइड आकुंचन के कारण ही जिरकोनियम (Zr – 4d) और हेफनियम (Hf – 5d) का आकार लगभग समान हो जाता है।

  37. Zr और Hf को आकार समान होने के कारण इन्हें अलग करना बहुत मुश्किल होता है (इन्हें रासायनिक जुड़वा / Chemical twins कहा जाता है)।

  38. लैंथेनाइड आकुंचन के कारण ही Ce से Lu तक जाने पर हाइड्रॉक्साइडों की क्षारीय प्रकृति (Basicity) लगातार घटती जाती है।

  39. एक्टिनाइड श्रेणी थोरियम ($Th_{90}$) से शुरू होकर लॉरेंशियम ($Lr_{103}$) तक कुल 14 तत्वों की बनी है।

  40. लैंथेनाइड्स के विपरीत, एक्टिनाइड श्रेणी के सभी तत्व रेडियोधर्मी (Radioactive) होते हैं।

  41. यूरेनियम ($U_{92}$) के बाद आने वाले सभी एक्टिनाइड तत्वों को ‘पराधूरेनिक’ (Transuranic) या मानव-निर्मित तत्व कहा जाता है।

  42. लैंथेनाइड्स में केवल ‘प्रोमेथियम’ (Pm) एकमात्र ऐसा तत्व है जो रेडियोधर्मी (Radioactive) है।

  43. एक्टिनाइड्स लैंथेनाइड्स की तुलना में उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएं (+3 से +7 तक) प्रदर्शित करते हैं।

  44. एक्टिनाइड आकुंचन, लैंथेनाइड आकुंचन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि 5f-इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण 4f से भी दुर्बल होता है।

  45. लैंथेनाइड्स संकुल यौगिक (Complexes) कम बनाते हैं, जबकि एक्टिनाइड्स उच्च आवेश के कारण आसानी से संकुल बनाते हैं।

  46. पोटैशियम परमैंगनेट ($KMnO_4$) और पोटैशियम डाइक्रोमेट ($K_2Cr_2O_7$) d-ब्लॉक (Mn और Cr) के अत्यंत महत्वपूर्ण ऑक्सीकारक यौगिक हैं।

  47. $KMnO_4$ (गहरे बैंगनी रंग का) में Mn की ऑक्सीकरण अवस्था +7 होती है।

  48. d-ब्लॉक की प्रथम श्रेणी (3d) में कॉपर (Cu) एकमात्र ऐसा तत्व है जिसका मानक अपचयन विभव (Standard reduction potential – $E^0$) धनात्मक होता है।

  49. मिश्र धातु ‘मिश धातु’ (Mischmetal) लैंथेनाइड धातुओं (मुख्य रूप से Ce, La) और आयरन से मिलकर बनती है, जिसका उपयोग बुलेट और लाइटर के चकमक पत्थर में होता है।

  50. d और f ब्लॉक के तत्व आधुनिक युग में उत्प्रेरकों, परमाणु ऊर्जा, चुंबकों और कैंसर की दवाओं (जैसे सिस-प्लैटिन / Cis-platin) के निर्माण का मुख्य आधार हैं।

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