भारत के राष्ट्रपति: चुनाव, महाभियोग और 1 जादुई Trick

भारत के राष्ट्रपति

भारत के राष्ट्रपति (President of India): भाग-5, अनुच्छेद 52-61 और विस्तृत विश्लेषण

भारत में राष्ट्रपति को “राष्ट्र का प्रमुख” (Head of the State) और “प्रथम नागरिक” (First Citizen) कहा जाता है। संविधान में अनुच्छेद 52 से 151 तक संघ (Union) के बारे में बताया गया है, लेकिन राष्ट्रपति की चर्चा मुख्य रूप से अनुच्छेद 52 से 62 के बीच है।

अक्सर स्टूडेंट्स के मन में सवाल होते हैं:

  • “क्या राष्ट्रपति सिर्फ एक रबर स्टाम्प हैं?”

  • “उनके चुनाव में हम वोट क्यों नहीं देते?”

  • “यह ‘एकल संक्रमणीय मत’ (Single Transferable Vote) बला क्या है?”

1. राष्ट्रपति: एक परिचय और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में ‘संसदीय शासन व्यवस्था’ (Parliamentary System) है जो हमने ब्रिटेन से ली है। इस व्यवस्था में दो तरह के प्रमुख होते हैं:

  1. वास्तविक प्रमुख (Real Head): प्रधानमंत्री (PM) – जिनके पास सारी पावर होती है।

  2. नाममात्र का प्रमुख (Nominal Head): राष्ट्रपति – जो देश की एकता का प्रतीक हैं।

लेकिन ध्यान दें! भारत का राष्ट्रपति ब्रिटेन की महारानी/राजा की तरह वंशानुगत (Hereditary) नहीं होता। भारत एक गणतंत्र (Republic) है, जिसका मतलब है कि हमारे राष्ट्र प्रमुख का चुनाव होता है, चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष।

महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य (Fact Sheet)

  • भाग: 5 (Part V)

  • वेतन: ₹5 लाख प्रति माह (पूरी तरह टैक्स-फ्री)।

  • सरकारी आवास: राष्ट्रपति भवन (रायसीना हिल्स, दिल्ली)।

  • पेंशन: कार्यकाल खत्म होने के बाद वेतन का 50% + सुविधाएं।

  •  

  • 2. Master Trick: अनुच्छेद 52-61 याद करने का मंत्र

अगर आप अनुच्छेदों के नंबर भूल जाते हैं, तो बस इस एक देसी लाइन को याद कर लें:

 “पकानी कोका दुयो दशम”

आइए इस मंत्र का ‘पोस्टमार्टम’ करते हैं:

शब्द (Trick)अनुच्छेदअर्थ (Keyword)विवरण (Description)
(Pa)Art 52द (Post)भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
का (Ka)Art 53कार्यपालिका (Executive)वह संघ की कार्यपालिका का प्रधान होगा।
नी (Ni)Art 54निर्वाचन (Election)चुनाव कौन करेगा? (निर्वाचक मंडल)।
को (Ko)Art 55कोटा/तरीका (Manner)चुनाव की प्रक्रिया (एकल संक्रमणीय)।
का (Ka)Art 56कार्यकाल (Tenure)5 साल का कार्यकाल।
दु (Du)Art 57दोबारा (Re-election)पुनर्निर्वाचन की पात्रता।
यो (Yo)Art 58योग्यता (Qualification)35 वर्ष, भारत का नागरिक आदि।
(Da)Art 59शाएं (Conditions)पद की शर्तें (पागल/दिवालिया न हो)।
(Sha)Art 60पथ (Oath)CJI शपथ दिलाएंगे।
(Ma)Art 61हाभियोग (Impeachment)हटाने की प्रक्रिया।

3. राष्ट्रपति का निर्वाचन (Election Process – Art 54 & 55)

यह संविधान का सबसे जटिल हिस्सा है, जिसे हम आसान भाषा में समझेंगे।

(A) कौन वोट देता है? (Electoral College – Art 54)

राष्ट्रपति का चुनाव जनता सीधे नहीं करती (Direct Election नहीं होता)। हम सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) को चुनते हैं, और वे राष्ट्रपति को चुनते हैं।

वोट देने वाले लोग:

  1. लोकसभा और राज्यसभा के केवल निर्वाचित (Elected) सदस्य। (मनोनीत/Nominated सदस्य वोट नहीं देते)।

  2. सभी राज्यों की विधानसभाओं के केवल निर्वाचित सदस्य (MLAs)।

  3. दिल्ली और पुडुचेरी (और अब जम्मू-कश्मीर) विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।

ध्यान दें: विधान परिषद (MLC) के सदस्य और संसद के मनोनीत सदस्य (जैसे सचिन तेंदुलकर जब सांसद थे) राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं देते।

(B) चुनाव का तरीका (Manner of Election – Art 55)

इस पद्धति का नाम है: “आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत पद्धति” (Proportional Representation by means of Single Transferable Vote)

यह कैसे काम करता है?

मान लीजिए 4 उम्मीदवार हैं: A, B, C, D।

आपको किसी एक को वोट नहीं देना है, बल्कि प्राथमिकता (Preference) देनी है।

  • मेरी पहली पसंद: C

  • दूसरी पसंद: A

  • तीसरी पसंद: B

जीतने के लिए उम्मीदवार को एक निश्चित कोटा (Quota) हासिल करना होता है:

$$\text{Total Votes} / 2 + 1$$

यानी 50% से एक ज्यादा वोट।

अगर पहली गिनती में किसी को 50% नहीं मिलता, तो सबसे कम वोट पाने वाले को बाहर कर दिया जाता है और उसके वोट दूसरों को (उनकी दूसरी पसंद के आधार पर) ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इसलिए इसे “संक्रमणीय” (Transferable) कहते हैं।

4. योग्यता और शर्तें (Eligibility – Art 58 & 59)

कोई भी व्यक्ति जो राष्ट्रपति बनना चाहता है, उसमें ये गुण होने चाहिए:

  1. वह भारत का नागरिक हो (जन्म से होना जरूरी नहीं, बस नागरिक हो)।

  2. उसने 35 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो।

  3. वह लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।

  4. वह किसी लाभ के पद (Office of Profit) पर न हो। (सरकारी नौकरी में न हो। लेकिन मंत्री, राज्यपाल, उपराष्ट्रपति का पद ‘लाभ का पद’ नहीं माना जाता)।

जमानत राशि (Security Deposit):

उम्मीदवार को ₹15,000 जमा करने होते हैं। अगर उसे कुल वोटों का 1/6 हिस्सा भी नहीं मिलता, तो “जमानत जब्त” हो जाती है।

5. शपथ और महाभियोग (Oath & Impeachment)

शपथ (Article 60)

राष्ट्रपति को शपथ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) दिलाते हैं।

शपथ के शब्द बहुत खास हैं:

“मैं श्रद्धापूर्वक राष्ट्रपति पद का कार्यपालन करूँगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण (Preserve), संरक्षण (Protect) और प्रतिरक्षण (Defend) करूँगा।”

महाभियोग (Impeachment – Article 61)

राष्ट्रपति को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया को महाभियोग कहते हैं। यह अमेरिका (USA) के संविधान से लिया गया है।

कब लगता है?

केवल एक आधार पर: “संविधान का अतिक्रमण” (Violation of Constitution)

प्रक्रिया (Step-by-Step):

  1. शुरुआत: संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में प्रस्ताव लाया जा सकता है।

  2. नोटिस: प्रस्ताव लाने से 14 दिन पहले राष्ट्रपति को लिखित नोटिस देना होता है। इस नोटिस पर उस सदन के 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।

  3. वोटिंग (पहला सदन): अगर वह सदन 2/3 बहुमत (विशेष बहुमत) से प्रस्ताव पास कर दे, तो मामला दूसरे सदन में जाता है।

  4. जांच (दूसरा सदन): दूसरा सदन आरोपों की जांच करता है। राष्ट्रपति को अपना पक्ष रखने का अधिकार है।

  5. फैसला: अगर दूसरा सदन भी 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पास कर दे, तो उसी दिन से राष्ट्रपति को पद छोड़ना पड़ता है।

(रोचक तथ्य: भारत के इतिहास में आज तक किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं लगा है)

6. राष्ट्रपति की अन्य महत्वपूर्ण शक्तियां

अनुच्छेद 52-61 के अलावा भी राष्ट्रपति के पास बहुत पावर है:

(A) वीटो पावर (Veto Power – Art 111)

जब संसद कोई बिल पास करके राष्ट्रपति के पास भेजती है, तो उनके पास 3 विकल्प होते हैं:

  1. स्वीकृति देना: बिल कानून बन जाता है।

  2. लौटाना: पुनर्विचार के लिए वापस भेजना (लेकिन अगर संसद दोबारा भेज दे, तो साइन करना ही पड़ेगा)।

  3. जेब में रख लेना (Pocket Veto): न हाँ कहना, न ना कहना। बस बिल को अनिश्चित काल के लिए अपनी जेब में रख लेना।

    • उदाहरण: 1986 में राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने ‘भारतीय डाक संशोधन विधेयक’ पर पॉकेट वीटो का इस्तेमाल किया था।

(B) अध्यादेश जारी करना (Ordinance – Art 123)

जब संसद का सत्र नहीं चल रहा हो और देश को किसी कानून की सख्त जरूरत हो, तो राष्ट्रपति ‘अध्यादेश’ जारी कर सकते हैं। इसकी शक्ति संसद के कानून के बराबर होती है।

(C) क्षमादान शक्ति (Pardoning Power – Art 72)

राष्ट्रपति किसी भी अपराधी की सजा को माफ कर सकते हैं, कम कर सकते हैं या बदल सकते हैं। यहाँ तक कि वे फांसी की सजा (Death Penalty) और कोर्ट मार्शल की सजा को भी माफ कर सकते हैं।

7. भारत के राष्ट्रपतियों की सूची (कुछ प्रमुख नाम)

क्रमनामविशेषता
1.डॉ. राजेन्द्र प्रसादपहले राष्ट्रपति, सबसे लंबा कार्यकाल (2 बार चुने गए)।
2.डॉ. जाकिर हुसैनपहले मुस्लिम राष्ट्रपति, पद पर रहते हुए मृत्यु।
3.वी.वी. गिरिदूसरे चक्र की मतगणना से जीतने वाले एकमात्र राष्ट्रपति।
4.नीलम संजीव रेड्डीनिर्विरोध (Unopposed) चुने गए।
5.ज्ञानी जैल सिंहसबसे पहले पॉकेट वीटो का प्रयोग किया।
6.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम‘मिसाइल मैन’, पहले वैज्ञानिक राष्ट्रपति।
7.प्रतिभा पाटिलपहली महिला राष्ट्रपति।
8.द्रौपदी मुर्मूपहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति (वर्तमान)।

निष्कर्ष (Conclusion)

डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने कहा था:

“हमारे राष्ट्रपति के पास वही स्थिति है जो ब्रिटेन के संविधान में राजा की है। वह राष्ट्र का प्रधान है, कार्यपालिका का नहीं।”

भले ही राष्ट्रपति को संवैधानिक रूप से ‘नाममात्र’ का प्रमुख कहा जाता है, लेकिन वे भारतीय लोकतंत्र की गरिमा (Dignity) हैं। जब देश में कोई राजनीतिक संकट आता है, तो राष्ट्रपति का विवेक ही देश को राह दिखाता है।

अनुच्छेद 52 से 61 (पकानी कोका दुयो दशम) हमें बताते हैं कि यह पद कितना व्यवस्थित और शक्तिशाली है।

FAQ: President of India

Q1. क्या राष्ट्रपति पद के लिए जन्म से भारतीय होना जरूरी है? नहीं। अमेरिका में जन्म से नागरिक होना जरूरी है, लेकिन भारत में केवल ‘नागरिक’ होना काफी है (चाहे जन्म से हो या बाद में नागरिकता ली हो)।

Q2. राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र (Resignation) किसे देते हैं? उप-राष्ट्रपति (Vice President) को।

Q3. अगर राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति दोनों का पद खाली हो, तो राष्ट्रपति कौन बनेगा? भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI)। (एम. हिदायतुल्लाह ऐसे एकमात्र CJI थे जो कार्यवाहक राष्ट्रपति बने)।

Q4. राष्ट्रपति के चुनाव के विवाद का फैसला कौन करता है? केवल और केवल सुप्रीम कोर्ट (Article 71)।

Q5. महाभियोग (Impeachment) में कौन भाग लेता है जो चुनाव में नहीं लेता? संसद के मनोनीत सदस्य (Nominated MPs) महाभियोग में वोट करते हैं, जबकि वे चुनाव में वोट नहीं देते। वहीं, राज्यों के विधायक (MLAs) चुनाव में वोट देते हैं, लेकिन महाभियोग में भाग नहीं लेते।

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