ऊतक (Tissue)

1.विस्तृत प्रस्तावना: ऊतक (Tissue) क्या है?

पृथ्वी पर जीवन का आरंभ एक एकल कोशिका (Single Cell) से हुआ था। अमीबा और पैरामीशियम जैसे एककोशिकीय जीव अपने सभी जैविक कार्य (श्वसन, पाचन, उत्सर्जन) उसी एक कोशिका के माध्यम से करते हैं। लेकिन, जब बहुकोशिकीय जीवों (Multicellular Organisms – जैसे मनुष्य, पेड़-पौधे) का विकास हुआ, तो कार्यों के विभाजन (Division of Labour) की आवश्यकता पड़ी।

इसी आवश्यकता ने ‘ऊतक’ (Tissue) को जन्म दिया। जीव विज्ञान की भाषा में:

कोशिकाओं का वह समूह, जिसकी उत्पत्ति (Origin), संरचना (Structure) और कार्य (Function) समान होते हैं, ऊतक (Tissue) कहलाता है।”

ऊतकों के अध्ययन को जीव विज्ञान की एक विशेष शाखा में किया जाता है जिसे ‘औतिकी’ (Histology) कहा जाता है। ‘हिस्टोलॉजी’ शब्द का सबसे पहले प्रयोग मेयर (Mayer) ने किया था, जबकि ‘टिशू’ (Tissue) शब्द सबसे पहले फ्रांसीसी वैज्ञानिक ‘बिशैट’ (Bichat) द्वारा दिया गया था।

2. पादप ऊतक (Plant Tissues)

पौधे स्थिर (Stationary) होते हैं, उन्हें गति नहीं करनी होती है। इसलिए उनके अधिकांश ऊतक उन्हें संरचनात्मक मजबूती (Mechanical support) प्रदान करने वाले होते हैं। पौधों के कई ऊतक मृत (Dead) होते हैं, क्योंकि मृत ऊतक जीवित ऊतकों की तरह ही मजबूती देते हैं और उन्हें कम रख-रखाव की आवश्यकता होती है।

पादप ऊतकों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:

A. विभज्योतक (Meristematic Tissue)

पौधों में वृद्धि केवल कुछ निश्चित क्षेत्रों में ही होती है। ऐसा उन विशेष ऊतकों के कारण होता है जिनमें जीवन भर कोशिका विभाजन (Cell Division) की क्षमता होती है। इन्हें विभज्योतक कहा जाता है।

स्थिति के आधार पर ये तीन प्रकार के होते हैं:

  1. शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): यह जड़ों और तनों के बिल्कुल शीर्ष (Tips) पर पाया जाता है। यह पौधे की ‘लंबाई’ (Primary growth) बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।

  2. पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem): यह तने या जड़ की परिधि (Girth/मोटाई) बढ़ाने का कार्य करता है। इसे ‘कैम्बियम’ (Cambium) भी कहते हैं। पेड़ों में छाल के नीचे जो वृद्धि होती है, वह इसी के कारण होती है।

  3. अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem): यह पत्तियों के आधार या टहनियों के पर्व (Nodes) के दोनों ओर मौजूद होता है। जब घास को शाकाहारी जानवर खा जाते हैं, तो घास इसी ऊतक के कारण वापस उग आती है।

B. स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)

जब विभज्योतक कोशिकाएं विभाजित होने की क्षमता खो देती हैं और एक विशिष्ट कार्य करने लगती हैं, तो वे ‘स्थायी ऊतक’ बन जाती हैं। कोशिकाओं के प्रकार के आधार पर ये दो प्रकार के होते हैं:

1. सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue): (ये एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं)

  • पैरेंकाइमा (Parenchyma): यह भोजन का भंडारण (Storage) करता है। जब इनमें क्लोरोफिल पाया जाता है, तो इन्हें ‘क्लोरेन्काइमा’ (Chlorenchyma – प्रकाश संश्लेषण के लिए) कहते हैं। जलीय पौधों में ये हवा की गुहाएं बनाते हैं (Aerenchyma), जिससे पौधे पानी पर तैर पाते हैं।

  • कॉलेन्काइमा (Collenchyma): यह पौधों में ‘लचीलापन’ (Flexibility) प्रदान करता है। यह पत्तियों और तनों को बिना टूटे मुड़ने में मदद करता है।

  • स्क्लेरेन्काइमा (Sclerenchyma): यह पौधे को अत्यधिक कठोर और मजबूत बनाता है। इसकी कोशिकाएं मृत होती हैं। नारियल का छिलका (Husk of a coconut) स्क्लेरेन्काइमा ऊतक का ही बना होता है।

2. जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue): (ये एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं और मिलकर एक इकाई की तरह काम करते हैं)

  • जाइलम (Xylem): इसे जल-संवहनी ऊतक भी कहते हैं। यह जड़ों से पानी और खनिजों (Water & Minerals) को गुरुत्वाकर्षण के विपरीत पत्तियों तक पहुँचाता है। जाइलम में मुख्य रूप से मृत कोशिकाएं होती हैं।

  • फ्लोएम (Phloem): पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा बने भोजन (Food/Sucrose) को पौधे के विभिन्न भागों (ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में) तक पहुँचाने का कार्य फ्लोएम करता है। फ्लोएम की अधिकांश कोशिकाएं जीवित होती हैं।

3. जंतु ऊतक (Animal Tissues)

जंतुओं को भोजन, साथी और आश्रय की तलाश में चारों ओर घूमना पड़ता है। इसलिए जंतु ऊतक पौधों की तुलना में अधिक ऊर्जा की खपत करते हैं और इनके अधिकांश ऊतक जीवित (Living) होते हैं।

जंतु ऊतकों को मुख्य रूप से चार प्रकारों में बांटा गया है:

A. उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)

यह ऊतक शरीर के बाहरी आवरण (Skin) और शरीर के अंदर के अंगों की बाहरी/भीतरी सतह को ढंकने का काम करता है। यह शरीर को रक्षा प्रदान करता है।

  • कार्य: त्वचा (Skin), मुंह का अस्तर, रक्त वाहिकाओं की परत, और फेफड़ों की एल्वियोली इसी ऊतक से बनी होती हैं। यह अंगों को एक-दूसरे से अलग रखने के लिए एक ‘बैरियर’ का काम करता है।

B. संयोजी ऊतक (Connective Tissue)

जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह ऊतक शरीर के विभिन्न अंगों को जोड़ने, सहारा देने और बांधने (Binding and supporting) का कार्य करता है। इसकी कोशिकाएं आपस में कम जुड़ी होती हैं और एक ‘मैट्रिक्स’ (Matrix) में धंसी होती हैं।

  • रक्त (Blood): यह एक तरल संयोजी ऊतक है। इसका मैट्रिक्स प्लाज्मा (Plasma) कहलाता है, जिसमें RBC, WBC और प्लेटलेट्स तैरते हैं। यह गैसों, पचे हुए भोजन और हार्मोन का परिवहन करता है।

  • अस्थि (Bone): यह एक बहुत मजबूत और कठोर संयोजी ऊतक है जो कंकाल का निर्माण करता है। इसका मैट्रिक्स कैल्शियम (Calcium) और फास्फोरस (Phosphorus) से बना होता है।

  • उपस्थि (Cartilage): यह हड्डियों के जोड़ों को चिकना बनाता है। यह नाक, कान, श्वासनली (Trachea) और कंठ में पाया जाता है। हम अपने कान को मोड़ सकते हैं क्योंकि वहां कार्टिलेज होता है, हड्डी नहीं।

  • लिगामेंट (Ligament): यह ऊतक एक हड्डी को दूसरी हड्डी (Bone to Bone) से जोड़ता है। यह बहुत लचीला होता है।

  • कंडरा / टेंडन (Tendon): यह ऊतक मांसपेशियों को हड्डियों (Muscle to Bone) से जोड़ता है। यह मजबूत होता है लेकिन कम लचीला होता है।

C. पेशीय ऊतक (Muscular Tissue)

यह ऊतक लंबी कोशिकाओं से बना होता है जिन्हें ‘पेशी रेशे’ (Muscle fibers) कहते हैं। यह हमारे शरीर में गति (Movement) के लिए जिम्मेदार है। इनमें एक विशेष प्रोटीन होता है जिसे ‘सिकुड़ने वाला प्रोटीन’ (Contractile protein) कहते हैं।

  1. रेखित या ऐच्छिक पेशियां (Striated / Voluntary Muscles): ये वे पेशियां हैं जो हमारी इच्छा के अनुसार काम करती हैं (जैसे हाथ और पैर की पेशियां)। ये मुख्य रूप से हड्डियों से जुड़ी होती हैं।

  2. अरेखित या अनैच्छिक पेशियां (Unstriated / Involuntary Muscles): इन पर हमारा नियंत्रण नहीं होता। आहार नली (Alimentary canal) में भोजन का खिसकना या रक्त नलिकाओं का सिकुड़ना इन्हीं पेशियों के कारण होता है।

  3. हृदय पेशियां (Cardiac Muscles): ये पेशियां केवल हृदय (Heart) में पाई जाती हैं। ये जीवन भर बिना थके लयबद्ध रूप से सिकुड़ती और फैलती रहती हैं।

D. तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)

यह ऊतक शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक संदेशों (संवेदनाओं) को बहुत तेज़ी से पहुँचाने के लिए विशेष रूप से विकसित हुआ है।

  • मस्तिष्क (Brain), रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) और तंत्रिकाएं (Nerves) सभी तंत्रिका ऊतक से बनी होती हैं।

  • इस ऊतक की इकाई को न्यूरॉन (Neuron) कहा जाता है। एक न्यूरॉन में सेल बॉडी (Cyton), डेंड्राइट (Dendrites) और एक लंबा एक्सॉन (Axon) होता है। मानव शरीर में न्यूरॉन सबसे लंबी कोशिका (Longest cell) होती है।

4. पादप ऊतक और जंतु ऊतक में प्रमुख अंतर

आधारपादप ऊतक (Plant Tissues)जंतु ऊतक (Animal Tissues)
ऊर्जा की आवश्यकताकम होती है क्योंकि पौधे गति नहीं करते।अधिक होती है क्योंकि जंतु गति करते हैं।
जीवित/मृतपौधों को सहारा देने वाले अधिकांश ऊतक मृत (Dead) होते हैं।जंतुओं के अधिकांश ऊतक जीवित (Living) होते हैं।
वृद्धि (Growth)पौधों में वृद्धि जीवन भर कुछ विशिष्ट क्षेत्रों (Meristem) तक सीमित रहती है।जंतुओं में वृद्धि एक निश्चित आयु तक होती है और यह पूरे शरीर में एकसमान होती है।
विभाजन क्षमताइन्हें विभाजित होने वाले और न होने वाले ऊतकों में बांटा जा सकता है।जंतु ऊतकों में ऐसा कोई स्पष्ट विभाजन नहीं होता।

5. निष्कर्ष (Conclusion)

सृष्टि के विकास क्रम में कोशिकाओं का ‘ऊतकों’ में संगठित होना जीवन के जटिल होने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था। जहाँ पादप ऊतक प्रकृति के कठोर थपेड़ों (तूफान, वर्षा, धूप) को सहने के लिए यांत्रिक मजबूती और कठोरता प्रदान करते हैं, वहीं जंतु ऊतक शरीर को अत्यधिक चपलता, संवेदनशीलता और गतिशीलता प्रदान करते हैं। तंत्रिका ऊतकों (Nervous tissues) के विकास ने ही मानव को सोचने-समझने और संपूर्ण प्रकृति पर राज करने की क्षमता प्रदान की है।

6. अभ्यास प्रश्न (PYQ Type Practice Questions for Mains)

प्रश्न 1: पादप ऊतकों में ‘विभज्योतक’ (Meristematic tissue) और ‘स्थायी ऊतक’ (Permanent tissue) के बीच मूलभूत अंतर स्पष्ट कीजिए। (150 शब्द)

प्रश्न 2: जटिल स्थायी ऊतकों—जाइलम (Xylem) और फ्लोएम (Phloem) की संरचना और उनके द्वारा पौधों में किए जाने वाले संवहन कार्यों (Transportation) की विस्तृत विवेचना करें। (200 शब्द)

प्रश्न 3: जंतुओं के संयोजी ऊतकों (Connective Tissues) के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करते हुए रक्त (Blood) को एक तरल संयोजी ऊतक क्यों माना जाता है, कारण सहित स्पष्ट करें। (250 शब्द)

प्रश्न 4: मानव शरीर में पाई जाने वाली ऐच्छिक (Voluntary), अनैच्छिक (Involuntary) और हृदय (Cardiac) पेशियों के बीच संरचनात्मक और कार्यात्मक अंतरों का विश्लेषण कीजिए। (200 शब्द)

प्रश्न 5: तंत्रिका ऊतक (Nervous tissue) की मूल इकाई ‘न्यूरॉन’ की संरचना का वर्णन करें और शरीर में उद्दीपनों (Stimulus) के संचरण में इसकी भूमिका स्पष्ट करें। (150 शब्द)

7. परीक्षा के लिए 50 अति महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (Mega Quick Revision Notes)

  1. कोशिकाओं का वह समूह जो संरचना, उद्भव और कार्य में समान होता है, ‘ऊतक’ (Tissue) कहलाता है।

  2. ऊतकों के वैज्ञानिक अध्ययन को ‘हिस्टोलॉजी’ (Histology / औतिकी) कहा जाता है।

  3. ‘हिस्टोलॉजी’ शब्द का सबसे पहले प्रयोग जर्मन वैज्ञानिक कार्ल मेयर (Karl Mayer) ने किया था।

  4. जीव विज्ञान में ‘टिशू’ (Tissue) शब्द सबसे पहले फ्रांसीसी शारीर-विज्ञानी ‘जेवियर बिशैट’ (Marie François Xavier Bichat) ने गढ़ा था, जिन्हें हिस्टोलॉजी का जनक भी माना जाता है।

  5. पौधों की लंबाई बढ़ाने (Primary growth) के लिए ‘शीर्षस्थ विभज्योतक’ (Apical Meristem) ऊतक जिम्मेदार होता है।

  6. पेड़ों के तने की मोटाई (Girth) या परिधि ‘पार्श्व विभज्योतक’ (Lateral Meristem) या कैम्बियम के कारण बढ़ती है।

  7. शाकाहारी जानवरों द्वारा खाए जाने के बाद घास का दोबारा उगना ‘अंतर्वेशी विभज्योतक’ (Intercalary Meristem) के कारण संभव होता है।

  8. जब विभज्योतक कोशिकाएं विभाजन की क्षमता खोकर एक विशिष्ट आकार और कार्य ग्रहण कर लेती हैं, तो वे ‘स्थायी ऊतक’ (Permanent Tissue) बन जाती हैं।

  9. पौधों में भोजन का भंडारण (Storage of food) मुख्य रूप से ‘पैरेंकाइमा’ (Parenchyma) ऊतक द्वारा किया जाता है।

  10. कमल जैसे जलीय पौधों (Aquatic plants) को पानी पर तैरने के लिए उत्प्लावकता (Buoyancy) ‘एरेनकाइमा’ (Aerenchyma) ऊतक प्रदान करता है।

  11. पौधों के तनों और पत्तियों में लचीलापन (Flexibility) ‘कॉलेन्काइमा’ (Collenchyma) ऊतक के कारण होता है, जो तेज हवाओं में उन्हें टूटने से बचाता है।

  12. ‘स्क्लेरेन्काइमा’ (Sclerenchyma) ऊतक पौधों को कठोरता (Stiffness) और यांत्रिक मजबूती प्रदान करता है; इसकी कोशिकाएं मृत होती हैं।

  13. नारियल का बाहरी कठोर छिलका (Husk) ‘स्क्लेरेन्काइमा’ ऊतक का ही बना होता है।

  14. जाइलम (Xylem) और फ्लोएम (Phloem) को पौधों के ‘जटिल स्थायी ऊतक’ (Complex Permanent Tissue) या संवहनी ऊतक (Vascular Tissues) कहा जाता है।

  15. जड़ों से पानी और घुले हुए खनिजों को पौधे के ऊपरी भागों (पत्तियों) तक ले जाने का कार्य ‘जाइलम’ (Xylem) ऊतक करता है।

  16. जाइलम में जल का संवहन केवल एक ही दिशा (नीचे से ऊपर की ओर) में होता है।

  17. पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा निर्मित भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाने का कार्य ‘फ्लोएम’ (Phloem) ऊतक करता है।

  18. फ्लोएम में भोजन का परिवहन दोनों दिशाओं (ऊपर और नीचे) में हो सकता है।

  19. जंतुओं के शरीर का बाहरी आवरण और अंदरूनी अंगों की बाहरी परत ‘उपकला ऊतक’ (Epithelial Tissue) से बनी होती है।

  20. मानव त्वचा (Skin) ‘स्तरीकृत शल्की उपकला’ (Stratified Squamous Epithelium) ऊतक का उदाहरण है जो शरीर को कटने-फटने से बचाती है।

  21. ‘रक्त’ (Blood) और ‘लसीका’ (Lymph) जंतुओं में ‘तरल संयोजी ऊतक’ (Fluid Connective Tissue) के उदाहरण हैं।

  22. रक्त का तरल मैट्रिक्स ‘प्लाज्मा’ (Plasma) कहलाता है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं (RBC), श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBC) और प्लेटलेट्स निलंबित रहते हैं।

  23. ‘अस्थि’ (Bone) एक कठोर संयोजी ऊतक है जिसका मैट्रिक्स मुख्य रूप से ‘कैल्शियम और फास्फोरस’ के यौगिकों से बना होता है।

  24. अस्थियों (हड्डियों) को दूसरी अस्थियों से जोड़ने वाले अत्यधिक लचीले संयोजी ऊतक को ‘लिगामेंट’ (Ligament / स्नायु) कहा जाता है।

  25. लिगामेंट के अत्यधिक खिंच जाने या टूटने को ही आम भाषा में ‘मोच’ (Sprain) आना कहा जाता है।

  26. मांसपेशियों (Muscles) को हड्डियों (Bones) से जोड़ने वाले मजबूत रेशेदार संयोजी ऊतक को ‘टेंडन’ (Tendon / कंडरा) कहते हैं।

  27. नाक, कान का बाहरी हिस्सा (Pinna) और श्वासनली (Trachea) में हड्डियों के बजाय ‘उपस्थि’ (Cartilage) पाई जाती है जो लचीली होती है।

  28. ‘एरिओलर ऊतक’ (Areolar Tissue) त्वचा और मांसपेशियों के बीच पाया जाता है जो अंगों के अंदर खाली जगह को भरता है और आंतरिक अंगों को सहारा देता है।

  29. शरीर में वसा (Fat) का संचय करने वाले ऊतक को ‘वसामय ऊतक’ (Adipose Tissue) कहा जाता है।

  30. त्वचा के नीचे पाया जाने वाला ‘वसामय ऊतक’ (Adipose tissue) शरीर के लिए इंसुलेटर (ताप रोधक) का कार्य करता है और ठंड से बचाता है।

  31. ऊंट के कूबड़ (Hump) में पानी नहीं, बल्कि ‘वसामय ऊतक’ (Adipose tissue / Fat) जमा होता है जो ऊर्जा का भंडार है।

  32. पेशीय ऊतकों (Muscular Tissues) में संकुचन और प्रसार के लिए ‘एक्टिन’ और ‘मायोसिन’ नामक विशेष ‘सिकुड़ने वाले प्रोटीन’ (Contractile proteins) पाए जाते हैं।

  33. हाथ, पैर और कंकाल से जुड़ी पेशियों को ‘ऐच्छिक पेशियां’ (Voluntary / Striated muscles) कहा जाता है क्योंकि हम इन्हें अपनी इच्छा से हिला सकते हैं।

  34. आहार नाल में भोजन का खिसकना और पलकों का झपकना ‘अनैच्छिक पेशियों’ (Involuntary / Smooth muscles) के कारण होता है जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं होता।

  35. हृदय की दीवारें विशेष ‘हृदय पेशियों’ (Cardiac Muscles) से बनी होती हैं, जो जीवन भर बिना थके लयबद्ध रूप से धड़कती रहती हैं।

  36. हृदय पेशियां संरचना में रेखित (Striated) होती हैं लेकिन कार्यप्रणाली में अनैच्छिक (Involuntary) होती हैं।

  37. ‘तंत्रिका ऊतक’ (Nervous Tissue) शरीर में सूचनाओं और संवेदनाओं (Sensations) को एक स्थान से दूसरे स्थान तक तेजी से ले जाने का कार्य करते हैं।

  38. मस्तिष्क (Brain), मेरुरज्जु (Spinal cord) और शरीर का संपूर्ण तंत्रिका तंत्र (Nervous system) इसी तंत्रिका ऊतक से बना है।

  39. तंत्रिका ऊतक की सबसे छोटी कार्यात्मक और संरचनात्मक इकाई को ‘न्यूरॉन’ (Neuron) या तंत्रिका कोशिका कहा जाता है।

  40. मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका (Longest cell) ‘न्यूरॉन’ ही होती है, जो 1 मीटर तक लंबी हो सकती है।

  41. एक न्यूरॉन के तीन मुख्य भाग होते हैं: सेल बॉडी (Cyton), डेंड्राइट (Dendrite) और एक्सॉन (Axon)।

  42. दो न्यूरॉन्स के बीच के अत्यंत सूक्ष्म खाली स्थान (Gap) को ‘सिनैप्स’ (Synapse) कहा जाता है जहाँ से रासायनिक संकेत गुजरते हैं।

  43. पौधों में गैसों का आदान-प्रदान (Exchange of gases) और वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) पत्तियों की सतह पर मौजूद छोटे छिद्रों द्वारा होता है, जिन्हें ‘स्टोमेटा’ (Stomata / रंध्र) कहते हैं।

  44. स्टोमेटा (रंध्र) को खोलने और बंद करने का नियंत्रण उपकला ऊतक की विशेष ‘गार्ड कोशिकाओं’ (Guard Cells) द्वारा किया जाता है।

  45. मरुस्थलीय पौधों (Desert plants) की बाहरी त्वचा (Epidermis) पर जल हानि को रोकने के लिए ‘क्यूटिन’ (Cutin) नामक मोम जैसे पदार्थ की परत पाई जाती है।

  46. पुराने पेड़ों की छाल (Bark) मृत कोशिकाओं से बनी होती है और इसमें ‘सुबेरिन’ (Suberin) नामक रसायन होता है जो छाल को पानी और गैसों के प्रति अभेद्य (Impervious) बनाता है।

  47. पेड़ों की आयु (Age of trees) उनके तने में मौजूद जाइलम ऊतक द्वारा बनाए गए ‘वार्षिक वलयों’ (Annual Rings) को गिनकर की जाती है; इस विज्ञान को ‘डेंड्रोक्रोनोलॉजी’ (Dendrochronology) कहते हैं।

  48. जंतुओं की आंतों (Intestine) के भीतरी स्तर पर ‘स्तंभाकार उपकला’ (Columnar Epithelium) ऊतक पाया जाता है जो पचे हुए भोजन को अवशोषित करने में मदद करता है।

  49. हिस्टोलॉजी (Histology) के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के कारण ‘मार्सेलो माल्पीघी’ (Marcello Malpighi) को सूक्ष्म जीव विज्ञान का संस्थापक माना जाता है।

  50. तंत्रिका कोशिकाओं (Neurons) में जन्म के बाद कोशिका विभाजन (Cell division) नहीं होता, इसीलिए मस्तिष्क की चोट आसानी से ठीक नहीं होती।

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