
जीव जगत (The Living World)
1. जीव जगत (The Living World) क्या है?
हमारा ग्रह पृथ्वी अनगिनत प्रकार के जीवों से भरा हुआ है—सूक्ष्म जीवाणुओं (Bacteria) से लेकर विशालकाय ब्लू व्हेल और बरगद के पेड़ों तक। जीव विज्ञान (Biology) वह विज्ञान है जो जीवन के स्वरूपों और जीवन की प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है।
वर्तमान में वैज्ञानिकों द्वारा पहचानी गई और वर्णित की गई प्रजातियों (Species) की संख्या लगभग 1.7 मिलियन से 1.8 मिलियन (17 से 18 लाख) के बीच है। पृथ्वी पर जीवों की इस विशाल विविधता और संख्या को ही ‘जैव विविधता’ (Biodiversity) कहा जाता है। इतने सारे जीवों का अलग-अलग अध्ययन करना मानव के लिए असंभव है, इसलिए इन्हें उनकी समानताओं और असमानताओं के आधार पर विभिन्न समूहों (Groups) में बाँटना आवश्यक हो गया। इसी आवश्यकता ने ‘वर्गीकरण विज्ञान’ (Taxonomy) को जन्म दिया।
2. सजीव (Living) क्या है? सजीवों के प्रमुख लक्षण
जीव विज्ञान में सबसे पहला प्रश्न यही उठता है कि ‘जीवित’ होने का अर्थ क्या है? एक निर्जीव पत्थर और एक जीवित पौधे में क्या अंतर है? विज्ञान ने सजीवों के कुछ विशिष्ट लक्षण (Characteristics) निर्धारित किए हैं, जिन्हें दो श्रेणियों में बांटा जाता है:
A. सजीवों के सामान्य लक्षण (General Characters – जिनमें अपवाद हैं)
वृद्धि (Growth): जीवों के भार और संख्या में वृद्धि होना।
अपवाद: निर्जीव वस्तुएं (जैसे बर्फ के पहाड़ या रेत के टीले) भी बाहर से कणों के जमा होने से आकार में बढ़ते हैं। इसलिए, वृद्धि सजीवों का ‘विशिष्ट/निश्चित गुण’ (Defining feature) नहीं है।
प्रजनन (Reproduction): अपने समान नई संतति (Offspring) उत्पन्न करना।
अपवाद: खच्चर (Mule), कामगार मधुमक्खी (Worker bee) और कुछ बाँझ मानव (Infertile human couples) जीवित तो हैं, लेकिन प्रजनन नहीं कर सकते। इसलिए प्रजनन भी ‘विशिष्ट गुण’ नहीं है।
B. सजीवों के विशिष्ट/निश्चित लक्षण (Defining Features – जिनमें कोई अपवाद नहीं है)
उपापचय (Metabolism): शरीर के अंदर चलने वाली सभी रासायनिक प्रतिक्रियाओं का कुल योग। कोई भी निर्जीव वस्तु उपापचय प्रदर्शित नहीं करती है। यह सजीवों का एक निश्चित गुण है।
कोशिकीय संगठन (Cellular Organization): सभी जीव एक या एक से अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं। बिना कोशिका के जीवन का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है।
चेतना (Consciousness / संवेदनशीलता): अपने आसपास के पर्यावरण (ताप, प्रकाश, पानी, रसायन) को महसूस करना और उसके प्रति प्रतिक्रिया देना। यह सजीवों का सबसे स्पष्ट और तकनीकी रूप से जटिल गुण है।
3. नामकरण और वर्गीकरण विज्ञान (Taxonomy and Nomenclature)
जब जीव एक ही होता है, लेकिन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में उसे अलग-अलग स्थानीय नामों (Local names) से बुलाया जाता है (जैसे प्याज को कहीं कांदा तो कहीं अनियन), तो इससे भारी भ्रम पैदा होता है। इसे सुलझाने के लिए एक मानकीकृत नामकरण प्रणाली की आवश्यकता पड़ी।
द्विनाम पद्धति (Binomial Nomenclature)
प्रसिद्ध स्वीडिश वैज्ञानिक कैरोलस लीनियस (Carolus Linnaeus) ने जीवों के वैज्ञानिक नामकरण की ‘द्विनाम पद्धति’ विकसित की। इस पद्धति के अनुसार, प्रत्येक जीव के वैज्ञानिक नाम के दो पद (Words) होते हैं:
पहला पद: वंश का नाम (Generic Name) – इसका पहला अक्षर हमेशा अंग्रेजी के बड़े अक्षर (Capital letter) से शुरू होता है।
दूसरा पद: जाति का नाम (Specific Epithet) – यह हमेशा छोटे अक्षर (Small letter) से शुरू होता है।
उदाहरण: मानव का वैज्ञानिक नाम Homo sapiens है। आम का नाम Mangifera indica है।
नियम: वैज्ञानिक नाम हमेशा ‘लैटिन’ (Latin) भाषा में होते हैं और टाइप करते समय तिरछे (Italics) लिखे जाते हैं। हाथ से लिखने पर दोनों शब्दों को अलग-अलग रेखांकित (Underline) किया जाता है।
पौधों के नामकरण के नियम ICBN (International Code of Botanical Nomenclature) और जंतुओं के लिए ICZN (International Code of Zoological Nomenclature) द्वारा तय किए जाते हैं।
4. वर्गिकी संवर्ग (Taxonomic Categories/Hierarchy)
वर्गीकरण कोई एक कदम की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक पदानुक्रम (Hierarchy) है, जिसमें जीवों को बढ़ते या घटते क्रम में रखा जाता है। इस क्रम में 7 प्रमुख संवर्ग (Categories) होते हैं:
जगत (Kingdom): यह सबसे बड़ा संवर्ग है (जैसे – Animalia / जंतु जगत)।
संघ (Phylum): (पौधों के लिए ‘प्रभाग/Division’ शब्द का उपयोग होता है)।
वर्ग (Class): समान गुणों वाले गणों का समूह (जैसे – Mammalia / स्तनधारी)।
गण (Order): समान कुलों का समूह (जैसे – Carnivora / मांसाहारी)।
कुल (Family): समान वंशों का समूह (जैसे – Felidae / बिल्ली का कुल)।
वंश (Genus): संबंधित जातियों का समूह।
जाति (Species): वर्गीकरण की सबसे छोटी और मूलभूत इकाई (Basic unit of classification)। एक ही जाति के जीव आपस में प्रजनन करके उपजाऊ संतान पैदा कर सकते हैं।

मानव हृदय को मुख्य रूप से चार कक्षों (Chambers) में विभाजित किया गया है, जो रक्त को शरीर के विभिन्न हिस्सों में पंप करने के लिए समन्वय में काम करते हैं।
5. आर.एच. व्हिटेकर की ‘पाँच जगत वर्गीकरण’ प्रणाली (Five Kingdom Classification)
प्रारंभ में कैरोलस लीनियस ने केवल दो जगत (Plantae और Animalia) बनाए थे। लेकिन जैसे-जैसे विज्ञान का विकास हुआ, यह प्रणाली अपर्याप्त साबित हुई। वर्ष 1969 में अमेरिकी इकोलॉजिस्ट आर.एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker) ने ‘पाँच जगत वर्गीकरण’ का प्रस्ताव रखा, जो आज भी पूरी दुनिया में मान्य है।
व्हिटेकर ने कोशिकाओं की संरचना (Prokaryotic/Eukaryotic), शारीरिक संगठन (Unicellular/Multicellular) और पोषण के तरीके (Autotrophic/Heterotrophic) के आधार पर जीवों को 5 जगतों में बाँटा:
A. मोनेरा जगत (Kingdom Monera)
विशेषता: इसमें सभी प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic – जिनमें विकसित केंद्रक/Nucleus नहीं होता) और एककोशिकीय जीवों को रखा गया है।
सदस्य: सभी जीवाणु (Bacteria), साइनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल) और माइकोप्लाज्मा। ये पृथ्वी पर सबसे प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव हैं।
B. प्रोटिस्टा जगत (Kingdom Protista)
विशेषता: इसमें सभी एककोशिकीय (Unicellular) लेकिन यूकैरियोटिक (Eukaryotic – विकसित केंद्रक वाले) जीवों को रखा गया है।
सदस्य: अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना, डायटम और प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)। यह जगत पौधों, जानवरों और कवक के बीच एक ‘कड़ी’ (Link) का काम करता है।
C. कवक जगत (Kingdom Fungi)
विशेषता: ये बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक और विषमपोषी (Heterotrophic) जीव हैं। ये अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते क्योंकि इनमें क्लोरोफिल नहीं होता। ये सड़े-गले पदार्थों (मृतोपजीवी) से पोषण प्राप्त करते हैं।
कोशिका भित्ति: इनकी कोशिका भित्ति ‘काइटिन’ (Chitin) नामक कठोर शर्करा से बनी होती है।
सदस्य: मशरूम (Mushroom), यीस्ट (Yeast – एककोशिकीय अपवाद), और पेनिसिलियम (Penicillium)।
D. पादप जगत (Kingdom Plantae)
विशेषता: सभी बहुकोशिकीय, प्रकाश-संश्लेषी (Photosynthetic) और स्वपोषी (Autotrophic) पौधों को इसमें रखा गया है।
कोशिका भित्ति: इनकी कोशिका भित्ति ‘सेल्युलोज’ (Cellulose) की बनी होती है।
सदस्य: शैवाल (Algae), ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स, जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी) और एंजियोस्पर्म (आवृतबीजी/फूल वाले पौधे)।
E. जंतु जगत (Kingdom Animalia)
विशेषता: ये बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक और विषमपोषी (Heterotrophic) जीव हैं।
कोशिका भित्ति: जंतुओं की कोशिकाओं में कोशिका भित्ति (Cell wall) बिल्कुल नहीं पाई जाती है।
सदस्य: स्पंज, कीड़े-मकोड़े, मछलियाँ, पक्षी, सरीसृप, और मानव सहित सभी स्तनधारी।
6. वर्गिकी सहायता साधन (Taxonomic Aids)
जीवों की पहचान और उनके वर्गीकरण के अध्ययन के लिए जीव वैज्ञानिकों ने कुछ विशेष तकनीकें और प्रक्रियाएं विकसित की हैं:
हर्बेरियम (Herbarium): यह कागज़ की शीटों का एक संग्रह है जिस पर पौधों के नमूनों को सुखाकर, दबाकर और परिरक्षित (Preserved) करके रखा जाता है।
वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens): यहाँ जीवित पौधों को संदर्भ (Reference) के लिए उगाया जाता है। (उदाहरण: भारत का सबसे प्रसिद्ध ‘इंडियन बोटैनिकल गार्डन’ हावड़ा, पश्चिम बंगाल में है)।
संग्रहालय (Museum): यहाँ अध्ययन के लिए परिरक्षित पौधों और मृत जानवरों के कंकालों या नमूनों को रसायनों (Formalin) में डालकर रखा जाता है।
कुंजी (Key): यह पौधों और जंतुओं की पहचान के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक विश्लेषणात्मक ‘पुस्तिका’ है जो समानताओं और असमानताओं पर आधारित होती है।
7. निष्कर्ष (Conclusion)
जीव जगत का यह वर्गीकरण केवल नामों की एक सूची नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी पर जीवन के क्रमिक विकास (Evolution) का एक विस्तृत मानचित्र है। मोनेरा के एक साधारण जीवाणु से लेकर पादप और जंतु जगत की विशाल जटिलताओं तक का सफर हमें यह समझाता है कि पृथ्वी पर जीवन कितना विविधतापूर्ण और आपस में गहराई से जुड़ा हुआ है। आर.एच. व्हिटेकर की ‘पाँच जगत प्रणाली’ ने इस जटिलता को सरल बनाया, जिससे आज चिकित्सा, कृषि और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में जीवों की पहचान और उनके उपयोग का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
8. अभ्यास प्रश्न (PYQ Type Practice Questions for Mains)
प्रश्न 1: सजीव (Living) और निर्जीव (Non-living) के बीच अंतर स्पष्ट करने वाले ‘विशिष्ट लक्षणों’ (Defining features) की विस्तृत विवेचना करें। वृद्धि और प्रजनन को सजीवों का विशिष्ट लक्षण क्यों नहीं माना जा सकता? (250 शब्द)
प्रश्न 2: आर.एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker) की ‘पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली’ (Five Kingdom Classification) के मुख्य आधार (Criteria) क्या हैं? प्रत्येक जगत की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें। (250 शब्द)
प्रश्न 3: मोनेरा (Monera) और प्रोटिस्टा (Protista) जगत के बीच मूलभूत अंतर क्या हैं? उदाहरणों सहित स्पष्ट करें। (150 शब्द)
प्रश्न 4: कैरोलस लीनियस द्वारा प्रतिपादित ‘द्विनाम पद्धति’ (Binomial Nomenclature) क्या है? वैज्ञानिक नामकरण के प्रमुख नियमों का उल्लेख करें। (150 शब्द)
प्रश्न 5: वर्गीकरण पदानुक्रम (Taxonomic Hierarchy) से आप क्या समझते हैं? ‘जाति’ (Species) को वर्गीकरण की सबसे छोटी और मूलभूत इकाई क्यों माना जाता है? (200 शब्द)
9. परीक्षा के लिए 50 अति महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (Mega Quick Revision Notes)
जीव विज्ञान (Biology) शब्द का प्रयोग सबसे पहले लैमार्क (Lamarck) और ट्रेविरेनस (Treviranus) ने वर्ष 1802 में किया था।
अरस्तु (Aristotle) को जीव विज्ञान का जनक (Father of Biology) तथा जंतु विज्ञान का जनक (Father of Zoology) माना जाता है।
थियोफ्रेस्टस (Theophrastus) को वनस्पति विज्ञान का जनक (Father of Botany) कहा जाता है।
वर्तमान में पृथ्वी पर ज्ञात और वर्णित जीवों की प्रजातियों की कुल संख्या लगभग 1.7 से 1.8 मिलियन है।
‘उपापचय’ (Metabolism) और ‘चेतना’ (Consciousness) सजीवों के ऐसे लक्षण हैं जिनमें कोई अपवाद नहीं है (Defining features)।
वृद्धि (Growth) और प्रजनन (Reproduction) सजीवों के निश्चित लक्षण नहीं हैं क्योंकि निर्जीव भी आकार में बढ़ते हैं और कुछ जीव (जैसे खच्चर) प्रजनन नहीं कर सकते।
‘वर्गीकरण विज्ञान’ (Taxonomy) शब्द का पहली बार प्रयोग एपीडी कैंडोल (A.P. de Candolle) ने किया था।
कैरोलस लीनियस (Carolus Linnaeus) को ‘आधुनिक वर्गीकरण विज्ञान का जनक’ (Father of Modern Taxonomy) कहा जाता है।
लीनियस ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘सिस्टेमा नेचुरी’ (Systema Naturae) में जंतुओं के वर्गीकरण और ‘स्पीशीज प्लांटारम’ में पौधों के वर्गीकरण का वर्णन किया था।
जीवों के नामकरण की ‘द्विनाम पद्धति’ (Binomial Nomenclature) का विकास कैरोलस लीनियस ने ही किया था।
द्विनाम पद्धति में पहला नाम ‘वंश’ (Genus) का और दूसरा नाम ‘जाति’ (Species) का होता है (जैसे: Homo sapiens)।
पौधों के वैज्ञानिक नामकरण के अंतरराष्ट्रीय नियम ICBN (International Code of Botanical Nomenclature) द्वारा तय किए जाते हैं।
जंतुओं के वैज्ञानिक नामकरण के नियम ICZN (International Code of Zoological Nomenclature) द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
वर्गीकरण की पदानुक्रम व्यवस्था में सबसे बड़ा संवर्ग ‘जगत’ (Kingdom) और सबसे छोटा संवर्ग ‘जाति’ (Species) होता है।
‘जाति’ (Species) वर्गीकरण की मूलभूत इकाई (Basic unit) है; एक जाति के जीव आपस में प्रजनन करने में सक्षम होते हैं।
आर.एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker) ने वर्ष 1969 में ‘पाँच जगत वर्गीकरण’ (Five Kingdom Classification) प्रणाली प्रस्तुत की थी।
व्हिटेकर की प्रणाली के 5 जगत हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक (Fungi), पादप (Plantae) और जंतु (Animalia)।
‘मोनेरा जगत’ (Monera) में सभी प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic) जीवों को रखा गया है, जिनका केंद्रक (Nucleus) विकसित नहीं होता।
सभी प्रकार के जीवाणु (Bacteria), साइनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल) और आर्कीबैक्टीरिया ‘मोनेरा’ जगत के सदस्य हैं।
‘प्रोटिस्टा जगत’ (Protista) में सभी एककोशिकीय लेकिन यूकैरियोटिक (Eukaryotic – विकसित केंद्रक वाले) जीवों को शामिल किया गया है।
अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना, डायटम और स्लाइम मोल्ड्स (Slime moulds) ‘प्रोटिस्टा’ जगत के अंतर्गत आते हैं।
‘यूग्लीना’ (Euglena) को पादप और जंतु के बीच की ‘योजक कड़ी’ (Connecting link) माना जाता है क्योंकि सूर्य के प्रकाश में यह पौधों की तरह भोजन बनाता है और प्रकाश न होने पर जंतुओं की तरह शिकार करता है।
‘कवक जगत’ (Fungi) में उन जीवों को रखा गया है जो विषमपोषी (Heterotrophic) हैं और जिनमें क्लोरोफिल नहीं पाया जाता है।
कवक (Fungi) की कोशिका भित्ति ‘काइटिन’ (Chitin) और पॉलीसैकराइड से बनी होती है।
मशरूम, यीस्ट (Yeast), राइजोपस (Bread mould) और पेनिसिलियम ‘कवक’ जगत के प्रमुख उदाहरण हैं।
यीस्ट (Yeast) एकमात्र ऐसा कवक है जो एककोशिकीय (Unicellular) होता है; इसका उपयोग बेकिंग और शराब (Alcohol) बनाने में होता है।
‘पादप जगत’ (Plantae) के सभी जीव बहुकोशिकीय, यूकैरियोटिक और प्रकाश-संश्लेषण करने वाले स्वपोषी (Autotrophic) होते हैं।
पौधों की कोशिका भित्ति (Cell wall) मुख्य रूप से ‘सेल्युलोज’ (Cellulose) की बनी होती है।
‘जंतु जगत’ (Animalia) के जीव विषमपोषी (Heterotrophic) होते हैं और इनकी कोशिकाओं में ‘कोशिका भित्ति’ (Cell wall) का पूर्णतः अभाव होता है।
जंतु अपना अतिरिक्त भोजन मुख्य रूप से ‘ग्लाइकोजन’ (Glycogen) या वसा (Fat) के रूप में संचित करते हैं।
विषाणु (Viruses), वायरोइड (Viroids), और प्रियन (Prions) को व्हिटेकर की 5-जगत प्रणाली में कोई स्थान नहीं दिया गया है क्योंकि वे अकोशिकीय (Acellular) जीव हैं।
वायरस (विषाणु) सजीव और निर्जीव के बीच की ‘कड़ी’ माने जाते हैं क्योंकि वे शरीर के बाहर निर्जीव कणों (Crystals) के रूप में रहते हैं लेकिन किसी जीवित कोशिका में प्रवेश करते ही सजीव हो जाते हैं।
लाइकेन (Lichen) कवक (Fungi) और शैवाल (Algae) के बीच का एक ‘सहजीवी संबंध’ (Symbiotic relationship) है।
लाइकेन वायु प्रदूषण (विशेषकर सल्फर डाइऑक्साइड – SO2) के बहुत अच्छे प्राकृतिक संकेतक (Indicators) होते हैं; प्रदूषित क्षेत्रों में लाइकेन नहीं उगते।
कार्ल वूज़ (Carl Woese) ने 1990 में ‘थ्री डोमेन सिस्टम’ (Three Domain System) का प्रस्ताव रखा, जिसमें मोनेरा को दो भागों (आर्कीबैक्टीरिया और यूबैक्टीरिया) में बाँटकर छह जगत प्रणाली बनाई गई।
आर्कीबैक्टीरिया (Archaebacteria) सबसे प्राचीन जीवाणु हैं जो अत्यधिक कठोर आवासों (जैसे खारे पानी, गर्म झरनों और दलदली क्षेत्रों) में जीवित रह सकते हैं।
मीथेन गैस उत्पन्न करने वाले जीवाणु (Methanogens) गाय और भैंस जैसे जुगाली करने वाले जानवरों के आमाशय (Rumen) में पाए जाते हैं।
माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma) अब तक ज्ञात सबसे छोटी जीवित कोशिकाएं हैं, और वे ऑक्सीजन के बिना भी जीवित रह सकती हैं।
पौधों के संरक्षण के लिए उपयोग किए जाने वाले सूखे नमूनों की फाइलों को ‘हर्बेरियम’ (Herbarium) कहा जाता है।
इंग्लैंड का ‘रॉयल बोटैनिकल गार्डन, क्यू (Kew)’ विश्व का सबसे प्रसिद्ध और बड़ा वनस्पति उद्यान है।
भारत का सबसे बड़ा ‘इंडियन बोटैनिकल गार्डन’ शिवपुर (हावड़ा), पश्चिम बंगाल में स्थित है।
‘कुंजी’ (Key) एक प्रकार का वर्गीकरण साधन है जिसका उपयोग जीवों की पहचान के लिए उनके समान और असमान लक्षणों के आधार पर किया जाता है।
फ्लोरा (Flora) किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले ‘पौधों’ की जानकारी देता है, जबकि फौना (Fauna) उस क्षेत्र के ‘जंतुओं’ की जानकारी देता है।
‘मोनोग्राफ’ (Monograph) एक ऐसी पुस्तक या साधन है जिसमें किसी एक विशिष्ट टैक्सा (Taxon – जैसे एक कुल या एक वंश) की पूरी जानकारी होती है।
मनुष्य (Human) का वर्गीकरण पदानुक्रम इस प्रकार है: जगत- Animalia, संघ- Chordata, वर्ग- Mammalia, गण- Primata, कुल- Hominidae, वंश- Homo, जाति- sapiens.
आलू, टमाटर और बैंगन दिखने में अलग हैं, लेकिन ये सभी एक ही वंश (Genus) ‘सोलैनम’ (Solanum) के अंतर्गत आते हैं।
शेर (Panthera leo), बाघ (Panthera tigris) और तेंदुआ (Panthera pardus) तीनों एक ही वंश ‘पैंथेरा’ (Panthera) के सदस्य हैं।
बिल्ली (Felis) और शेर (Panthera) दोनों अलग-अलग वंश के हैं, लेकिन ये दोनों एक ही कुल (Family) ‘फेलिडी’ (Felidae) में आते हैं।
कुत्ते (Dog) को कुलों के वर्गीकरण में ‘कैनिडी’ (Canidae) कुल के अंतर्गत रखा गया है।
पृथ्वी पर जैविक संगठन (Biological organization) परमाणुओं और अणुओं (Molecules) के सूक्ष्म स्तर से शुरू होकर जीवमंडल (Biosphere) के विशाल स्तर तक जाता है।