
गमन और संचलन
1. विस्तृत प्रस्तावना: संचलन (Movement) और गमन (Locomotion) में क्या अंतर है?
जीव विज्ञान में ‘संचलन’ और ‘गमन’ दोनों का उपयोग अक्सर एक ही अर्थ में कर लिया जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से दोनों में एक बहुत बड़ा अंतर है।
संचलन (Movement): शरीर के किसी अंग का हिलना-डुलना संचलन कहलाता है। जैसे—बात करते समय जबड़े का हिलना, पलकों का झपकना, या आहारनाल में भोजन का खिसकना। इसमें जीव का ‘स्थान’ नहीं बदलता।
गमन (Locomotion): यह वह ऐच्छिक (Voluntary) संचलन है जिसके परिणामस्वरूप जीव का ‘स्थान’ (Location) या ‘जगह’ बदल जाती है। जैसे—चलना, दौड़ना, तैरना या उड़ना।
UPSC का गोल्डन रूल: “सभी गमन संचलन होते हैं, लेकिन सभी संचलन गमन नहीं होते।” (All locomotions are movements but all movements are not locomotions).
2. मानव शरीर में संचलन के प्रकार (Types of Movement)
मानव शरीर की कोशिकाएं मुख्य रूप से तीन प्रकार के संचलन प्रदर्शित करती हैं:
अमीबीय संचलन (Amoeboid Movement): यह संचलन शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं, जैसे ‘मैक्रोफेज’ (Macrophage) और श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBCs – Leucocytes) द्वारा किया जाता है। ये कोशिकाएं रक्त नलिकाओं से बाहर निकलकर अमीबा की तरह कूटपाद (Pseudopodia) बनाकर शरीर में प्रवेश करने वाले जीवाणुओं को खा जाती हैं।
पक्ष्माभी संचलन (Ciliary Movement): यह संचलन शरीर की उन खोखली नलिकाओं में होता है जो ‘पक्ष्माभ उपकला’ (Ciliated epithelium) से ढकी होती हैं। उदाहरण: श्वासनली (Trachea) में धूल के कणों को बाहर धकेलना, और मादाओं की ‘फैलोपियन ट्यूब’ (Fallopian tube) में अंडाणु (Ovum) का गर्भाशय की ओर खिसकना।
पेशीय संचलन (Muscular Movement): हमारे हाथ-पैर, जबड़े और जीभ का हिलना पेशीय संचलन है। यह कंकाल, पेशी और तंत्रिका तंत्र (Nervous system) के आपसी समन्वय से ही संभव हो पाता है।
3. पेशी तंत्र (Muscular System) और उसके प्रकार
एक वयस्क मनुष्य के शरीर के कुल भार का लगभग 40% से 50% हिस्सा मांसपेशियों (Muscles) का होता है। पेशी एक विशेष ऊतक है जिसकी उत्पत्ति ‘मीसोडर्म’ (Mesoderm) भ्रूणीय परत से होती है।
पेशियों के चार विशेष गुण होते हैं: उत्तेजनशीलता (Excitability), संकुचनशीलता (Contractility), प्रसार्य (Extensibility) और प्रत्यास्थता (Elasticity)।
शरीर में स्थिति के आधार पर पेशियां तीन प्रकार की होती हैं:
A. कंकाल पेशियां (Skeletal Muscles)
ये पेशियां सीधे हमारी हड्डियों (कंकाल) से जुड़ी होती हैं।
माइक्रोस्कोप से देखने पर इन पर धारियां (Striations) दिखाई देती हैं, इसलिए इन्हें ‘रेखित पेशियां’ (Striated muscles) भी कहते हैं।
ये हमारी इच्छा के अनुसार काम करती हैं, इसलिए ये ‘ऐच्छिक पेशियां’ (Voluntary muscles) हैं (जैसे बाइसेप्स, पैरों की पेशियां)।
B. अंतरंग / चिकनी पेशियां (Visceral / Smooth Muscles)
ये शरीर के खोखले अंगों (जैसे आहारनाल, जनन मार्ग, रक्त नलिकाओं) की भीतरी दीवार में पाई जाती हैं।
इन पर कोई धारियां नहीं होतीं, इसलिए इन्हें ‘अरेखित या चिकनी पेशियां’ कहते हैं।
इन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता (जैसे पेट में भोजन का पचना), इसलिए ये ‘अनैच्छिक पेशियां’ (Involuntary muscles) हैं।
C. हृदय पेशियां (Cardiac Muscles)
ये केवल हमारे हृदय (Heart) में पाई जाती हैं।
संरचना में ये कंकाल पेशियों की तरह ‘रेखित’ (Striated) होती हैं, लेकिन कार्यप्रणाली में ये चिकनी पेशियों की तरह ‘अनैच्छिक’ (Involuntary) होती हैं।
ये जीवन भर बिना थके लयबद्ध तरीके से सिकुड़ती और फैलती रहती हैं।
4. कंकाल पेशी का संकुचन: ‘सर्पी तंतु सिद्धांत’ (Sliding Filament Theory)
मांसपेशियां सिकुड़ती कैसे हैं? इसे समझाने के लिए 1954 में हक्सले और हैनसन (Huxley and Hanson) ने ‘सर्पी तंतु सिद्धांत’ (Sliding Filament Theory) दिया था, जो आज तक सर्वमान्य है।
पेशी की सूक्ष्म संरचना:
एक कंकाल पेशी के अंदर कई पेशी रेशे (Muscle fibres) होते हैं। इन रेशों के अंदर दो प्रकार के बहुत बारीक प्रोटीन तंतु (Myofilaments) पाए जाते हैं:
एक्टिन (Actin): यह पतला (Thin) तंतु है।
मायोसिन (Myosin): यह मोटा (Thick) तंतु है।
दो Z-रेखाओं (Z-lines) के बीच के हिस्से को ‘सार्कोमियर’ (Sarcomere) कहा जाता है, जो पेशी संकुचन की सबसे छोटी ‘कार्यात्मक इकाई’ (Functional unit) है।
सिद्धांत कैसे काम करता है?
इस सिद्धांत के अनुसार, पेशी सिकुड़ते समय तंतुओं (Actin और Myosin) की लंबाई कम नहीं होती। बल्कि, पतले एक्टिन तंतु मोटे मायोसिन तंतुओं के ऊपर खिसक (Slide) जाते हैं, जिससे सार्कोमियर छोटा हो जाता है और पेशी सिकुड़ जाती है।
दिमाग (Motor neuron) से सिग्नल मिलने पर सार्कोप्लाज्मिक रेटिकुलम से कैल्शियम आयन निकलते हैं।
यह कैल्शियम एक्टिन पर मौजूद ‘ट्रोपोनिन’ (Troponin) से जुड़ता है, जिससे मायोसिन को जुड़ने की जगह मिल जाती है।
मायोसिन का सिर ATP (ऊर्जा) का उपयोग करके एक्टिन को खींचता है, जिससे पेशी सिकुड़ जाती है।

मानव हृदय को मुख्य रूप से चार कक्षों (Chambers) में विभाजित किया गया है, जो रक्त को शरीर के विभिन्न हिस्सों में पंप करने के लिए समन्वय में काम करते हैं।
5. मानव कंकाल तंत्र (Human Skeletal System)
कंकाल तंत्र हड्डियों (Bones) और उपास्थियों (Cartilages) का एक ढांचा है। एक नवजात शिशु में लगभग 300 हड्डियां होती हैं, लेकिन वयस्क होते-होते कई हड्डियां आपस में जुड़ जाती हैं और कुल 206 हड्डियां रह जाती हैं।
अध्ययन की सुविधा के लिए मानव कंकाल को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
A. अक्षीय कंकाल (Axial Skeleton) – 80 हड्डियां
यह शरीर के मुख्य अक्ष (सीधी रेखा) पर मौजूद हड्डियों का समूह है। इसमें 4 भाग आते हैं:
करोटी / खोपड़ी (Skull): इसमें कुल 29 हड्डियां होती हैं। (कपाल/Cranium में 8, चेहरे/Facial में 14, दोनों कानों में 3+3=6, और गले के पास एक U-आकार की हाइओइड/Hyoid बोन = 1)।
कशेरुक दंड / रीढ़ की हड्डी (Vertebral Column): इसमें 26 हड्डियां (कशेरुकाएं/Vertebrae) होती हैं। (बच्चों में 33 होती हैं)। यह हमारी स्पाइनल कॉर्ड की रक्षा करती है।
उरोस्थि (Sternum): यह छाती के बिल्कुल बीच में स्थित 1 चपटी हड्डी (Breast bone) है।
पसलियां (Ribs): मानव में पसलियों के 12 जोड़े (कुल 24) होते हैं।
सत्य पसलियां (True Ribs – 1 से 7वां जोड़ा): ये पीछे रीढ़ की हड्डी और आगे सीधे स्टर्नम से जुड़ी होती हैं।
कूट या असत्य पसलियां (False Ribs – 8, 9, 10वां जोड़ा): ये सीधे स्टर्नम से न जुड़कर 7वीं पसली से जुड़ती हैं।
प्लवी या तैरती पसलियां (Floating Ribs – 11वां और 12वां जोड़ा): ये आगे किसी भी हड्डी से नहीं जुड़तीं, बस हवा में तैरती रहती हैं। (ये किडनी की रक्षा करती हैं)।
B. उपांगीय कंकाल (Appendicular Skeleton) – 126 हड्डियां
इसमें हमारे हाथ-पैर और उन्हें अक्षीय कंकाल से जोड़ने वाली मेखलाएं (Girdles) आती हैं।
अग्रपाद / हाथ की हड्डियां (Forelimbs – 30 x 2 = 60 हड्डियां):
ह्यूमरस (ऊपरी बांह – 1), रेडियस और अल्ना (निचली बांह – 2), कार्पल्स (कलाई – 8), मेटाकार्पल्स (हथेली – 5), और फैलेंजेस (उंगलियां – 14)।
पश्चपाद / पैर की हड्डियां (Hindlimbs – 30 x 2 = 60 हड्डियां):
फीमर (Femur – जांघ): यह मानव शरीर की सबसे लंबी और सबसे भारी हड्डी है।
पटेला (घुटने की टोपी – 1), टिबिया और फिबुला (निचला पैर – 2), टार्सल्स (टखना/Ankle – 7), मेटाटार्सल्स (तलवा – 5), और फैलेंजेस (उंगलियां – 14)।
अंस मेखला (Pectoral Girdle – 4 हड्डियां): यह हमारे हाथों को रीढ़ से जोड़ती है। इसमें दो कॉलर बोन (Clavicle) और दो कंधे की हड्डियां (Scapula) होती हैं।
श्रोणि मेखला (Pelvic Girdle – 2 हड्डियां): यह हमारे पैरों को रीढ़ से जोड़ती है और कूल्हे (Hip) का निर्माण करती है।
6. संधियां (Joints / जोड़)
हड्डियों के बीच या हड्डी और उपास्थि (Cartilage) के बीच के जुड़ाव को संधि (Joint) कहते हैं। गति (Movement) की क्षमता के आधार पर ये 3 प्रकार की होती हैं:
रेशेदार या अचल संधियां (Fibrous Joints / Immovable): इन जोड़ों में बिल्कुल भी गति (Movement) नहीं होती।
उदाहरण: हमारी खोपड़ी (कपाल/Cranium) की हड्डियों के बीच के जोड़।
उपास्थियुक्त या आंशिक चल संधियां (Cartilaginous Joints / Slightly Movable): इनमें बहुत थोड़ी सी गति संभव होती है।
उदाहरण: रीढ़ की हड्डी (Vertebral column) की दो कशेरुकाओं के बीच का जोड़।
साइनोवियल या पूर्ण चल संधियां (Synovial Joints / Freely Movable): इन जोड़ों में बहुत आसानी से गति होती है। हड्डियों के बीच ‘साइनोवियल द्रव’ भरा होता है जो घर्षण (Friction) कम करता है।
कंदुक खल्लिका संधि (Ball and Socket joint): यह सभी दिशाओं में घूम सकता है। (उदा: कंधे और कूल्हे का जोड़)।
कब्जा संधि (Hinge joint): यह केवल एक ही दिशा में (दरवाजे के कब्ज़े की तरह) खुलता है। (उदा: घुटने और कोहनी का जोड़)।
धुराग्र संधि (Pivot joint): यह दाएं-बाएं मुड़ने में मदद करता है। (उदा: एटलस और एक्सिस – खोपड़ी और रीढ़ का पहला जोड़)।
विसर्पी संधि (Gliding joint): (उदा: कलाई के कार्पल्स के बीच)।
सैंडल संधि (Saddle joint): (उदा: अंगूठे के कार्पल और मेटाकार्पल के बीच)।
7. कंकाल और पेशी तंत्र के प्रमुख विकार (Disorders)
गठिया (Arthritis): यह जोड़ों (Joints) की सूजन (Inflammation) है, जिससे बहुत दर्द होता है।
गाउट (Gout): जब जोड़ों में ‘यूरिक अम्ल’ (Uric acid) के क्रिस्टल जमा हो जाते हैं, तो जोड़ों में भयंकर सूजन आ जाती है, इसे गाउट कहते हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis): यह उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी है जिसमें हड्डियों का द्रव्यमान (Bone mass) कम हो जाता है और उनके टूटने (Fracture) का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं में ‘एस्ट्रोजन’ हार्मोन की कमी इसका एक बड़ा कारण है।
मायस्थेनिया ग्रेविस (Myasthenia Gravis): यह एक ऑटो-इम्यून (Auto-immune) बीमारी है जो तंत्रिका-पेशी जोड़ को प्रभावित करती है, जिससे कंकाल पेशियों में भारी कमजोरी आ जाती है और अंततः लकवा मार जाता है।
पेशीय दुष्पोषण (Muscular Dystrophy): यह एक अनुवांशिक (Genetic) बीमारी है जिसमें कंकाल पेशियां समय के साथ धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं।
टिटैनी (Tetany): शरीर (रक्त) में कैल्शियम ($Ca^{2+}$) की कमी के कारण मांसपेशियों में भयानक ऐंठन (Spasm) आने को टिटैनी कहते हैं।
8. निष्कर्ष (Conclusion)
मानव शरीर का कंकाल और पेशी तंत्र इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है। 206 हड्डियों का यह मजबूत ढांचा न केवल हमारे कोमल अंगों (जैसे हृदय, मस्तिष्क) की रक्षा करता है, बल्कि मांसपेशियों के साथ मिलकर हमें उस ‘गतिशीलता’ (Mobility) का उपहार देता है जिसने इंसान को शिकारी से लेकर अंतरिक्ष यात्री तक का सफर तय करने में सक्षम बनाया। ‘सर्पी तंतु सिद्धांत’ से यह स्पष्ट होता है कि हमारे हाथ उठाने जैसा सामान्य सा कार्य भी आणविक स्तर पर कितनी जटिल रासायनिक प्रक्रियाओं (कैल्शियम और ATP) का परिणाम है। उम्र के साथ इन अंगों की देखभाल (पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन-डी और व्यायाम) स्वस्थ जीवन का सबसे बड़ा मूलमंत्र है।
9. अभ्यास प्रश्न (PYQ Type Practice Questions for Mains)
प्रश्न 1: “सभी गमन (Locomotion) संचलन (Movement) हैं, लेकिन सभी संचलन गमन नहीं हैं।” इस कथन की व्याख्या करते हुए मानव शरीर में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के संचलनों (Amoeboid, Ciliary, Muscular) का उदाहरण सहित वर्णन करें। (250 शब्द)
प्रश्न 2: पेशी संकुचन के ‘सर्पी तंतु सिद्धांत’ (Sliding Filament Theory) का विस्तृत विवरण दें। इस प्रक्रिया में कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) और ATP की क्या भूमिका है? (250 शब्द)
प्रश्न 3: मानव कंकाल तंत्र में ‘अक्षीय कंकाल’ (Axial Skeleton) और ‘उपांगीय कंकाल’ (Appendicular Skeleton) के बीच अंतर स्पष्ट करें तथा दोनों में सम्मिलित प्रमुख हड्डियों का उल्लेख करें। (200 शब्द)
प्रश्न 4: संधियां (Joints) क्या हैं? गतिशीलता के आधार पर संधियों के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करते हुए ‘साइनोवियल संधियों’ (Synovial joints) के महत्व पर प्रकाश डालें। (150 शब्द)
प्रश्न 5: कंकाल तंत्र से संबंधित प्रमुख विकारों—ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) और गाउट (Gout) के कारण और शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। (150 शब्द)
10. परीक्षा के लिए 50 अति महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (Mega Quick Revision Notes)
मानव शरीर में कुल 206 हड्डियां होती हैं, जबकि एक नवजात शिशु में लगभग 300 हड्डियां पाई जाती हैं।
शरीर के कुल वजन का लगभग 40-50% हिस्सा मांसपेशियों (Muscles) का होता है।
पेशियों की उत्पत्ति भ्रूण के ‘मीसोडर्म’ (Mesoderm) स्तर से होती है।
मानव शरीर में कुल मांसपेशियों की संख्या लगभग 639 मानी जाती है।
शरीर के खोखले अंगों (जैसे आहारनाल, रक्त नलिकाएं) में ‘अरेखित या चिकनी पेशियां’ (Smooth muscles) पाई जाती हैं जो अनैच्छिक होती हैं।
कंकाल पेशियों (Skeletal muscles) को ‘रेखित पेशियां’ (Striated) भी कहा जाता है क्योंकि माइक्रोस्कोप में इन पर धारियां दिखती हैं।
कंकाल पेशियों के संकुचन (Contraction) की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई को ‘सार्कोमियर’ (Sarcomere) कहा जाता है।
पेशी रेशे के अंदर दो मुख्य संकुचनशील प्रोटीन पाए जाते हैं: ‘एक्टिन’ (Actin – पतला तंतु) और ‘मायोसिन’ (Myosin – मोटा तंतु)।
पेशी संकुचन का ‘सर्पी तंतु सिद्धांत’ (Sliding Filament Theory) 1954 में हक्सले और हैनसन द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
सर्पी तंतु सिद्धांत के अनुसार, पेशी सिकुड़ते समय एक्टिन (पतले) तंतु मायोसिन (मोटे) तंतुओं के ऊपर खिसक (Slide) जाते हैं।
मांसपेशियों के संकुचन की शुरुआत के लिए तंत्रिका से संकेत मिलने पर सार्कोप्लाज्मिक रेटिकुलम से भारी मात्रा में कैल्शियम आयन ($Ca^{2+}$) निकलते हैं।
मांसपेशियों के काम करने के लिए ऊर्जा ATP (एडिनोसिन ट्राईफॉस्फेट) के रूप में प्राप्त होती है।
लगातार भारी काम या व्यायाम करने पर पेशियों में ऑक्सीजन की कमी से ‘लैक्टिक अम्ल’ (Lactic Acid) जमा हो जाता है, जिससे हमें थकान (Fatigue) महसूस होती है।
मांसपेशियों में ऑक्सीजन स्टोर करने वाले लाल रंग के वर्णक को ‘मायोग्लोबिन’ (Myoglobin) कहा जाता है।
अक्षीय कंकाल (Axial Skeleton) में कुल 80 हड्डियां होती हैं (खोपड़ी, पसलियां, उरोस्थि और रीढ़ की हड्डी)।
उपांगीय कंकाल (Appendicular Skeleton) में कुल 126 हड्डियां होती हैं (हाथ-पैर और मेखलाएं)।
मानव की खोपड़ी (Skull) में कुल 29 हड्डियां होती हैं, जिनमें से 8 कपाल (Cranium) में और 14 चेहरे (Facial bones) में होती हैं।
गले के पास एक U-आकार की स्वतंत्र हड्डी पाई जाती है, जिसे ‘हाइओइड बोन’ (Hyoid bone) कहते हैं।
मानव के एक कान में 3 छोटी हड्डियां होती हैं: मैलियस (Malleus), इनकस (Incus) और स्टेपीज (Stapes)।
कान की ‘स्टेपीज’ (Stapes) हड्डी मानव शरीर की सबसे छोटी हड्डी है।
वयस्क मानव की रीढ़ की हड्डी (Vertebral Column) में कुल 26 कशेरुकाएं (Vertebrae) होती हैं।
रीढ़ की हड्डी की पहली कशेरुका को ‘एटलस’ (Atlas) कहा जाता है, जो खोपड़ी को साधे रखती है।
छाती के बिल्कुल बीच में स्थित चपटी हड्डी (Breast bone) को ‘स्टर्नम’ (Sternum / उरोस्थि) कहा जाता है।
मानव शरीर में पसलियों (Ribs) के कुल 12 जोड़े (यानी 24 पसलियां) पाए जाते हैं।
1 से 7वें जोड़े तक की पसलियों को ‘सत्य पसलियां’ (True Ribs) कहते हैं क्योंकि ये पीछे रीढ़ और आगे स्टर्नम से जुड़ी होती हैं।
8वें, 9वें और 10वें जोड़े की पसलियां स्टर्नम से न जुड़कर 7वीं पसली से जुड़ती हैं, इसलिए इन्हें ‘असत्य पसलियां’ (False Ribs) कहते हैं।
11वें और 12वें जोड़े की पसलियां आगे की ओर हवा में स्वतंत्र रहती हैं, इसलिए इन्हें ‘तैरती पसलियां’ (Floating Ribs) कहते हैं।
मानव के एक हाथ (Forelimb) में कुल 30 हड्डियां होती हैं (दोनों हाथों में 60)।
मानव की जांघ (Thigh) में स्थित ‘फीमर’ (Femur) मानव शरीर की सबसे लंबी और सबसे भारी हड्डी है।
घुटने की टोपी (Knee cap) बनाने वाली हड्डी को ‘पटेला’ (Patella) कहा जाता है।
कंधे (Shoulder) की संरचना बनाने वाली मेखला को ‘अंस मेखला’ (Pectoral Girdle) कहते हैं, जिसमें 4 हड्डियां होती हैं।
कॉलर बोन (Collar bone) या ब्यूटी बोन का वैज्ञानिक नाम ‘क्लाविकल’ (Clavicle) है।
कूल्हे (Hip) का निर्माण करने वाली संरचना को ‘श्रोणि मेखला’ (Pelvic Girdle) कहा जाता है, जिसमें 2 बड़ी कोक्सल हड्डियां होती हैं।
कंधे और कूल्हे के जोड़ को ‘कंदुक खल्लिका संधि’ (Ball and Socket Joint) कहा जाता है, जो सभी दिशाओं में घूम सकता है।
कोहनी (Elbow) और घुटने (Knee) के जोड़ को ‘कब्जा संधि’ (Hinge Joint) कहते हैं, जो केवल एक ही दिशा में मुड़ता है।
मानव की खोपड़ी (Cranium) की हड्डियों के बीच ‘रेशेदार संधि’ (Fibrous joints) पाई जाती है, जिसमें कोई गति (Movement) नहीं होती, इसे ‘सूचर’ (Suture) भी कहते हैं।
रीढ़ की हड्डी की दो कशेरुकाओं के बीच ‘उपास्थियुक्त संधि’ (Cartilaginous joint) होती है, जो सीमित गति प्रदान करती है।
साइनोवियल जोड़ों (Synovial joints) में हड्डियों के बीच घर्षण को कम करने के लिए ‘साइनोवियल द्रव’ (Synovial fluid) भरा होता है।
रक्त (Blood) में ‘यूरिक अम्ल’ (Uric Acid) के क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो जाने से जोड़ों में भयंकर सूजन आ जाती है, इस बीमारी को ‘गाउट’ (Gout) कहते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में ‘एस्ट्रोजन’ (Estrogen) हार्मोन की कमी के कारण हड्डियों के कमजोर और भुरभुरे होने की बीमारी को ‘ऑस्टियोपोरोसिस’ (Osteoporosis) कहते हैं।
‘मायस्थेनिया ग्रेविस’ (Myasthenia Gravis) एक ऑटो-इम्यून बीमारी है, जिससे कंकाल पेशियां कमजोर होकर अंततः लकवाग्रस्त (Paralyze) हो जाती हैं।
रक्त में कैल्शियम ($Ca^{2+}$) आयनों की भारी कमी के कारण मांसपेशियों में भयानक ऐंठन (Spasm) आने को ‘टिटैनी’ (Tetany) कहा जाता है।
पेशीय दुष्पोषण (Muscular Dystrophy) एक अनुवांशिक (Genetic) बीमारी है, जिसमें कंकाल पेशियां धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं।
जबड़े (Jaw) की हड्डी को ‘मैंडिबल’ (Mandible) कहते हैं, जो खोपड़ी की एकमात्र ऐसी हड्डी है जो हिल-डुल (Movable) सकती है।
टेंडन (Tendon / कंडरा) वह संयोजी ऊतक है जो ‘पेशी को हड्डी’ (Muscle to Bone) से जोड़ता है।
लिगामेंट (Ligament / स्नायु) वह अत्यंत लचीला ऊतक है जो ‘एक हड्डी को दूसरी हड्डी’ (Bone to Bone) से जोड़ता है।
लिगामेंट के अत्यधिक खिंचाव या टूट जाने को आम भाषा में ‘मोच’ (Sprain) आना कहते हैं।
श्वासनली (Trachea) और फैलोपियन ट्यूब में संचलन ‘पक्ष्माभों’ (Cilia) द्वारा होता है, जिसे पक्ष्माभी संचलन (Ciliary movement) कहते हैं।
श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBCs) और मैक्रोफेज (Macrophage) रक्त नलिकाओं में ‘अमीबीय संचलन’ (Amoeboid movement) प्रदर्शित करते हैं।
पक्षियों में उड़ने के लिए जो मांसपेशियां (Flight muscles) पाई जाती हैं, वे शरीर की कंकाल पेशियों का ही एक रूपांतरित और शक्तिशाली रूप हैं।