कालीबंगा का इतिहास (History of Kalibangan): जुते हुए खेत, अग्नि वेदिकाएं और प्राचीन भारतीय विज्ञान का विस्तृत अध्ययन

कालीबंगा

1. विस्तृत प्रस्तावना: कालीबंगा का इतिहास और इसका शाब्दिक अर्थ

सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) के अध्ययन में गुजरात और सिंध के बाद राजस्थान का भी बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। राजस्थान की तपती रेत के नीचे दबी एक ऐसी संस्कृति मिली है जिसने इतिहासकारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि प्राचीन भारतीय विज्ञान कितना उन्नत था। इस स्थल का नाम है—कालीबंगा (Kalibangan)

सिंधी और राजस्थानी भाषा में ‘बंगा’ का अर्थ होता है ‘चूड़ियां’। यहाँ खुदाई के दौरान मिट्टी और कांच की भारी मात्रा में काले रंग की चूड़ियां प्राप्त हुई थीं, जिसके कारण इस स्थान का नाम ‘काले रंग की चूड़ियां’ (Black Bangles) या कालीबंगा पड़ गया। कालीबंगा का इतिहास इसलिए भी अत्यंत विशिष्ट है क्योंकि यहाँ केवल हड़प्पा काल (Harappan) ही नहीं, बल्कि प्राक-हड़प्पा काल (Pre-Harappan – हड़प्पा से भी पुरानी संस्कृति) के स्पष्ट अवशेष मिले हैं। यह नगर इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि कैसे एक ग्रामीण संस्कृति धीरे-धीरे एक महान नगरीय सभ्यता में तब्दील हुई।

2. भौगोलिक स्थिति और खोज का सफर (Location and Discovery)

कालीबंगा का इतिहास समझने के लिए इसकी भौगोलिक स्थिति और सरस्वती नदी के प्राचीन मार्ग को समझना आवश्यक है।

A. भौगोलिक स्थिति (Geographical Location)

  • स्थान: यह ऐतिहासिक स्थल वर्तमान में राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ जिले (पहले यह श्रीगंगानगर जिले का हिस्सा था) में स्थित है।

  • नदी: कालीबंगा प्राचीन और पवित्र ‘सरस्वती नदी’ (जिसे वर्तमान में घग्गर या हकरा नदी कहा जाता है) के बाएँ तट पर बसा हुआ था। यह नदी अब पूरी तरह सूख चुकी है।

B. खोज और उत्खनन (Discovery & Excavation)

  • इस स्थल की पहचान और खोज सबसे पहले स्वतंत्रता के तुरंत बाद, वर्ष 1951 में अमलानंद घोष (A. Ghosh) द्वारा की गई थी।

  • बाद में, 1961 से 1969 के बीच बी.बी. लाल (Braj Basi Lal) और बी.के. थापर (Balkrishna Thapar) के संयुक्त नेतृत्व में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा यहाँ व्यापक उत्खनन कार्य किया गया।

3. कालीबंगा का अनोखा नगर नियोजन (Unique Town Planning)

यद्यपि कालीबंगा हड़प्पा सभ्यता का ही एक हिस्सा था, लेकिन जब हम कालीबंगा का इतिहास और उसका नगर नियोजन गहराई से देखते हैं, तो इसमें कई अनोखे अपवाद (Exceptions) दिखाई देते हैं जो इसे मोहनजोदड़ो या हड़प्पा से अलग करते हैं।

A. दोनों टीलों की अलग-अलग किलेबंदी (Separate Fortifications)

  • हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में केवल पश्चिमी टीले (दुर्ग) की किलेबंदी की जाती थी।

  • लेकिन कालीबंगा में पश्चिमी टीला (दुर्ग) और पूर्वी टीला (निचला नगर) दोनों को अलग-अलग रक्षा प्राचीरों (Separate Fortification walls) से घेरा गया था। यह इसकी सबसे विशिष्ट स्थापत्य विशेषता है, जो बताती है कि यहाँ आम जनता की सुरक्षा को भी उतना ही महत्व दिया गया था।

B. कच्ची ईंटों का शहर (City of Mud Bricks)

  • अन्य बड़े हड़प्पाई नगरों में पकी ईंटों (Baked bricks) का वर्चस्व था, लेकिन कालीबंगा को ‘दीन-हीन बस्ती’ (Poor settlement) भी कहा गया है क्योंकि यहाँ के घरों और दीवारों के निर्माण में मुख्य रूप से धूप में सुखाई गई कच्ची ईंटों (Mud Bricks) का प्रयोग किया गया था।

  • पकी ईंटों का प्रयोग यहाँ केवल कुओं (Wells), नालियों (Drains) और स्नानागार (Bathrooms) के निर्माण तक ही सीमित था।

C. जल निकासी प्रणाली का अभाव (Lack of Drainage System)

  • जहाँ मोहनजोदड़ो अपनी ढकी हुई नालियों के लिए जाना जाता है, वहीं कालीबंगा में सुव्यवस्थित जल निकासी प्रणाली (Drainage system) का स्पष्ट अभाव देखने को मिलता है। यहाँ पकी ईंटों की नालियां बहुत कम मिली हैं।

  • लकड़ी की नाली (Wooden Drain): इसके विकल्प के रूप में, कालीबंगा से पेड़ के तने को खोखला करके बनाई गई ‘लकड़ी की नाली’ का एकमात्र और अनूठा साक्ष्य मिला है।

4. कालीबंगा की प्रमुख और विश्व-प्रसिद्ध पुरातात्विक खोजें (Major Archaeological Discoveries)

कालीबंगा का इतिहास कुछ ऐसी पुरातात्विक खोजों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है जो मानव इतिहास में पहली बार यहीं पाई गई थीं:

I. दुनिया का सबसे प्राचीन ‘जुता हुआ खेत’ (The Ploughed Field)

  • कालीबंगा के दुर्ग की रक्षा प्राचीर के बाहर, दक्षिण-पूर्व दिशा में एक ‘जुते हुए खेत’ (Ploughed Field) के साक्ष्य मिले हैं। यह साक्ष्य प्राक-हड़प्पा (Pre-Harappan) काल का है।

  • यह पूरी दुनिया में कृषि के लिए जुते हुए खेत का सबसे प्राचीन (Earliest) प्रमाण है

  • खेत में हल की धारियां (Furrow marks) एक-दूसरे को समकोण पर काटती हैं, जो ‘मिश्रित खेती’ (Mixed Cropping) को दर्शाता है। इतिहासकार मानते हैं कि यहाँ एक ही खेत में एक साथ दो फसलें (जैसे सरसों और चना) उगाई जाती थीं।

II. विश्व का प्राचीनतम भूकंप का साक्ष्य (Earliest Evidence of Earthquake)

  • कालीबंगा की खुदाई के दौरान घरों की दीवारों और फर्शों में गहरी दरारें (Cracks) पाई गईं।

  • भूवैज्ञानिकों के अध्ययन से यह प्रमाणित हुआ कि ये दरारें प्राक-हड़प्पा काल (लगभग 2700 ईसा पूर्व) में आए एक भयंकर भूकंप (Earthquake) के कारण आई थीं। यह मानव इतिहास में रिकॉर्ड किया गया भूकंप का सबसे प्राचीन पुरातात्विक प्रमाण है।

III. शल्य चिकित्सा या ब्रेन सर्जरी का प्रमाण (Evidence of Trepanation / Surgery)

  • कालीबंगा के कब्रिस्तान से एक बच्चे की खोपड़ी (Skull) प्राप्त हुई है जिसमें 6 छोटे-छोटे छेद (Holes) किए गए थे।

  • यह खोपड़ी ‘हाइड्रोसिफेलस’ (Hydrocephalus – मस्तिष्क में पानी भर जाना) नामक बीमारी का शिकार थी। इन छेदों को देखकर विज्ञान जगत हैरान रह गया, क्योंकि यह प्राचीन भारत में शल्य चिकित्सा (Trepanation / Brain Surgery) का सबसे प्राचीन प्रमाण है।

IV. अलंकृत ईंटें (Decorated Bricks)

  • पूरे हड़प्पा साम्राज्य में घरों के फर्श कच्ची मिट्टी के होते थे। लेकिन कालीबंगा एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ एक घर के फर्श को बनाने में ज्यामितीय डिजाइनों से सजी हुई ‘अलंकृत ईंटों’ (Decorated Bricks) का प्रयोग किया गया है।

5. कालीबंगा का धार्मिक जीवन: अग्नि पूजा और पशु बलि (Religion & Fire Altars)

कालीबंगा का इतिहास धार्मिक दृष्टि से मोहनजोदड़ो से काफी भिन्न प्रतीत होता है। यहाँ देवी पूजा के बजाय ‘अग्नि पूजा’ का विशेष महत्व था।

A. अग्नि वेदिकाएं (Seven Fire Altars)

  • कालीबंगा के पश्चिमी टीले (दुर्ग) पर मिट्टी की ईंटों से बने चबूतरों पर एक कतार में 7 आयताकार ‘अग्नि वेदिकाएं’ (Fire Altars / हवन कुंड) प्राप्त हुई हैं।

  • इन अग्नि वेदिकाओं के अंदर राख (Ash), कोयला और एक बेलनाकार स्तंभ मिला है। इसके ठीक पास एक कुआं और स्नान के लिए जगह बनी है, जो यह प्रमाणित करता है कि यहाँ स्नान के बाद पवित्र अग्नि अनुष्ठान (Yajna) किए जाते थे।

B. पशु बलि और मातृदेवी का अभाव (Animal Sacrifice & No Mother Goddess)

  • कुछ वेदिकाओं के पास से जानवरों (हिरण, बकरे) की जली हुई हड्डियां प्राप्त हुई हैं, जो ‘पशु बलि’ (Animal Sacrifice) प्रथा की ओर इशारा करती हैं।

  • सबसे महत्वपूर्ण अपवाद: जहाँ हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में मातृदेवी की अनगिनत मूर्तियां मिली हैं, वहीं कालीबंगा से मातृदेवी (Mother Goddess) की एक भी मिट्टी की मूर्ति नहीं मिली है।

6. शवाधान की पद्धतियां (Burial Practices)

कालीबंगा के निवासियों का पारलौकिक जीवन में गहरा विश्वास था। यहाँ से अंत्येष्टि संस्कार (Burials) की तीन मुख्य पद्धतियां (पूर्ण शवाधान, आंशिक और दाह संस्कार) प्राप्त हुई हैं।

  • यहाँ के कब्रिस्तान से कुल 37 कब्रें मिली हैं।

  • गोलाकार कब्रें (Circular Graves): कालीबंगा से कुछ विशेष गोलाकार कब्रें मिली हैं, जिनमें शव तो नहीं है, लेकिन मिट्टी के बर्तन, राख और आभूषण कलश में रखे गए हैं। इसे ‘प्रतीकात्मक शवाधान’ (Symbolic burial) माना जाता है।

  • यहाँ से भी लोथल की तरह ‘युग्म शवाधान’ (Joint Burial – एक ही कब्र में दो शव) का एक साक्ष्य मिला है।

7. अर्थव्यवस्था और मेसोपोटामिया से संबंध (Economy and Mesopotamian Link)

  • कृषि और पशुपालन: कृषि यहाँ की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार थी। जुते हुए खेत और ऊंट की हड्डियों (Camel bones) का मिलना यह सिद्ध करता है कि वे रेगिस्तानी परिवहन से परिचित थे।

  • बेलनाकार मुहर (Cylindrical Seal): कालीबंगा से एक अत्यंत महत्वपूर्ण ‘बेलनाकार मुहर’ प्राप्त हुई है। ऐसी बेलनाकार मुहरें मूल रूप से मेसोपोटामिया (इराक) की पहचान हैं। इसका कालीबंगा में मिलना पश्चिम एशिया के साथ उनके मजबूत व्यापारिक संबंधों (Trade relations) को प्रमाणित करता है।

8. निष्कर्ष (Conclusion)

विस्तृत विश्लेषण के बाद हम कह सकते हैं कि कालीबंगा का इतिहास प्राचीन भारत की ज्ञान-परंपरा और विज्ञान का एक स्वर्णिम अध्याय है। जब दुनिया के अन्य हिस्से पाषाण युग के अंधेरे में जी रहे थे, तब कालीबंगा के किसान ‘मिश्रित खेती’ कर रहे थे और वहाँ के वैद्य ‘शल्य चिकित्सा’ (Brain Surgery) के प्रयोग कर रहे थे। यद्यपि पकी ईंटों की कमी के कारण इसे ‘दीन-हीन बस्ती’ कहा गया, लेकिन अलंकृत ईंटों का फर्श, सात अग्नि वेदिकाएं और दोनों टीलों की अलग-अलग किलेबंदी इसके अनूठे और समृद्ध नागरिक प्रशासन को दर्शाते हैं। अंततः, सरस्वती (घग्गर) नदी के सूखने और बार-बार आने वाले भूकंपों के कारण इस महान नगर का पतन हो गया, लेकिन इसके अवशेष आज भी हमें भारतीय संस्कृति की निरंतरता (अग्नि पूजा और यज्ञ) की याद दिलाते हैं।

9. अभ्यास प्रश्न (PYQ Type Practice Questions for Mains)

प्रश्न 1: यहाँ का इतिहास और उसकी भौगोलिक स्थिति का संक्षिप्त वर्णन करें। ‘कालीबंगा’ नाम की उत्पत्ति कैसे हुई और इसे किसने खोजा? (150 शब्द)

प्रश्न 2: सिंधु घाटी सभ्यता के अन्य नगरों की तुलना में कालीबंगा के ‘नगर नियोजन’ (Town Planning) में कौन से प्रमुख अपवाद और विशिष्टताएं पाई जाती हैं? दोनों टीलों की किलेबंदी का विश्लेषण करें। (200 शब्द)

प्रश्न 3: यहाँ से प्राप्त ‘जुते हुए खेत’ (Ploughed field) और ‘भूकंप के साक्ष्य’ (Evidence of Earthquake) के पुरातात्विक महत्व का मूल्यांकन कीजिए। (200 शब्द)

प्रश्न 4: “यहाँ का धार्मिक जीवन मोहनजोदड़ो से भिन्न था।” ‘अग्नि वेदिकाओं’ (Fire Altars) और मातृदेवी की मूर्तियों के अभाव के संदर्भ में इस कथन की विस्तृत व्याख्या करें। (250 शब्द)

प्रश्न 5: यहाँ से प्राप्त ‘शल्य चिकित्सा’ (Trepanation) के प्रमाण और ‘अलंकृत ईंटों’ (Decorated Bricks) के साक्ष्य प्राचीन भारत की किस वैज्ञानिक और कलात्मक प्रगति को दर्शाते हैं? (150 शब्द)

10. परीक्षा के लिए 50 अति महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य (Mega Quick Revision Notes)

  1. राजस्थानी और सिंधी भाषा में ‘कालीबंगा’ का शाब्दिक अर्थ ‘काले रंग की चूड़ियां’ (Black Bangles) होता है।

  2. यह प्राचीन ऐतिहासिक स्थल वर्तमान में राजस्थान राज्य के ‘हनुमानगढ़’ जिले में स्थित है (पूर्व में यह श्रीगंगानगर जिले में था)।

  3. यहाँ का इतिहास प्राचीन ‘सरस्वती नदी’ (वर्तमान में घग्गर या हकरा नदी) के बाएँ तट पर फला-फूला।

  4. यहाँ की खोज स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1951 में ‘अमलानंद घोष’ (A. Ghosh) द्वारा की गई थी।

  5. इस स्थल का विस्तृत और व्यापक उत्खनन 1961 से 1969 के बीच ‘बी.बी. लाल’ और ‘बी.के. थापर’ के नेतृत्व में किया गया।

  6. कालीबंगा एक ऐसा स्थल है जहाँ प्राक-हड़प्पा (Pre-Harappan) और विकसित हड़प्पा, दोनों कालों के अवशेष एक साथ मिलते हैं।

  7. हड़प्पा के अन्य नगरों की तरह यहाँ भी दो भागों (पश्चिमी टीला और पूर्वी टीला) में विभाजित था।

  8. यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसके ‘दुर्ग’ और ‘निचले नगर’ दोनों को अलग-अलग रक्षा दीवारों (Separate Fortification) से घेरा गया था।

  9. यहाँ को इतिहासकारों द्वारा ‘दीन-हीन बस्ती’ (Poor Settlement) कहा गया है क्योंकि यहाँ घरों का निर्माण ‘कच्ची ईंटों’ (Mud bricks) से हुआ था।

  10. यहाँ में पकी ईंटों (Baked bricks) का प्रयोग केवल कुओं, स्नानागारों और नालियों के निर्माण में किया गया है।

  11. मोहनजोदड़ो के विपरीत, कालीबंगा में स्पष्ट और सुव्यवस्थित जल निकासी प्रणाली (Drainage system) का अभाव पाया गया है।

  12. पानी की निकासी के लिए कालीबंगा से पेड़ के तने को खोखला करके बनाई गई ‘लकड़ी की नाली’ (Wooden drain) का एकमात्र साक्ष्य मिला है।

  13. कालीबंगा पूरी दुनिया में कृषि के लिए ‘जुते हुए खेत’ (Ploughed field) के प्राचीनतम साक्ष्य के लिए विख्यात है।

  14. जुते हुए खेत के साक्ष्य कालीबंगा की प्राक-हड़प्पा (Pre-Harappan) बस्ती के दक्षिण-पूर्व में स्थित रक्षा दीवार के बाहर मिले हैं।

  15. खेत में हल की रेखाएं एक-दूसरे को समकोण पर काटती हैं, जो ‘मिश्रित खेती’ (एक साथ दो फसलें उगाने) को प्रमाणित करती हैं।

  16. इतिहासकार मानते हैं कि कालीबंगा के किसान एक ही खेत में ‘सरसों और चना’ (Mustard and Gram) एक साथ उगाते थे।

  17. मानव इतिहास में ‘भूकंप’ (Earthquake) का सबसे प्राचीन पुरातात्विक प्रमाण कालीबंगा की दीवारों की दरारों से मिला है।

  18. हड़प्पा साम्राज्य में केवल कालीबंगा ही वह स्थान है जहाँ मकान के फर्श को ‘अलंकृत ईंटों’ (Decorated Bricks) से सजाया गया था।

  19. अलंकृत ईंटों पर एक-दूसरे को काटते हुए वृत्त (Intersecting circles) के ज्यामितीय चित्र उकेरे गए हैं।

  20. कालीबंगा का इतिहास धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से एक कतार में ‘7 अग्नि वेदिकाएं’ (Seven Fire Altars / हवन कुंड) प्राप्त हुई हैं।

  21. ये अग्नि वेदिकाएं दुर्ग क्षेत्र (पश्चिमी टीले) में मिट्टी की ईंटों से बने एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित थीं।

  22. अग्नि वेदिकाओं के पास जानवरों की जली हुई हड्डियां मिली हैं, जो प्राचीन भारत में ‘पशु बलि’ (Animal sacrifice) की प्रथा को सिद्ध करती हैं।

  23. सबसे बड़ा अपवाद यह है कि कालीबंगा से ‘मातृदेवी’ (Mother Goddess) की एक भी मिट्टी की मूर्ति नहीं मिली है।

  24. कालीबंगा से एक बच्चे की ऐसी खोपड़ी (Skull) मिली है जिसमें 6 छेद (Holes) किए गए थे।

  25. यह खोपड़ी ‘हाइड्रोसिफेलस’ (मस्तिष्क में जल भराव) का शिकार थी और यह भारत में ‘शल्य चिकित्सा’ (Trepanation / Brain Surgery) का प्राचीनतम प्रमाण है।

  26. कालीबंगा से मेसोपोटामिया (इराक) के समान एक ‘बेलनाकार मुहर’ (Cylindrical Seal) प्राप्त हुई है।

  27. बेलनाकार मुहर का मिलना यह प्रमाणित करता है कि कालीबंगा का व्यापार पश्चिम एशिया के देशों के साथ होता था।

  28. कालीबंगा से ‘ऊंट की हड्डियां’ (Camel bones) प्राप्त हुई हैं, जो यह बताता है कि वे मरुस्थलीय परिवहन के लिए ऊंटों का उपयोग करते थे।

  29. यहाँ से प्राप्त मिट्टी की मुहरों पर ‘हाथी’ (Elephant) और ‘बाघ’ (Tiger) के चित्र अंकित हैं।

  30. एक मुहर पर आधे मानव और आधे बाघ (Tiger-human composite) की आकृति बनी है, जो उनके जादुई या मिथकीय विश्वासों को दर्शाती है।

  31. कालीबंगा के कब्रिस्तान से ‘युग्म शवाधान’ (Joint Burial – पुरुष और स्त्री एक साथ) का एक साक्ष्य मिला है।

  32. अंत्येष्टि संस्कार के रूप में यहाँ से गोल और आयताकार ‘प्रतीकात्मक कब्रें’ (Symbolic Graves) मिली हैं, जिनमें राख और आभूषण हैं लेकिन कंकाल नहीं हैं।

  33. पूर्ण शवाधान में शव को हमेशा ‘उत्तर-दक्षिण’ दिशा में (सिर उत्तर, पैर दक्षिण) रखकर दफनाया गया था।

  34. एक कब्र में शव को ‘ईंटों की बनी हुई परत’ (Brick-lined grave) में दफनाया गया है, जो मृतक के उच्च सामाजिक स्तर को दर्शाता है।

  35. कालीबंगा से हाथीदांत की बनी हुई ‘कंघियां’ (Ivory combs) और तांबे के बने हुए दर्पण (Copper Mirrors) प्राप्त हुए हैं।

  36. यहाँ से कांसे (Bronze) से बनी हुई सुइयां (Needles) मिली हैं, जो कपड़ों की सिलाई के ज्ञान को दर्शाती हैं।

  37. मिट्टी के बर्तनों (Pottery) पर कालीबंगा में लाल रंग के ऊपर काले रंग से चित्रकारी की जाती थी।

  38. कालीबंगा का इतिहास बताता है कि यहाँ से प्राप्त बर्तनों को इतिहासकारों ने 6 अलग-अलग श्रेणियों (Fabric A to F) में बांटा है।

  39. कालीबंगा के प्राक-हड़प्पा काल को ‘सोथी संस्कृति’ (Sothi Culture) के समकालीन माना जाता है (जिसे अमलानंद घोष ने सोथी-कालीबंगा कॉम्प्लेक्स कहा था)।

  40. यहाँ से तांबे का बना हुआ ‘वृषभ’ (Copper Bull / सांड) प्राप्त हुआ है जो उनकी धातु-कर्म कला का उत्कृष्ट नमूना है।

  41. कालीबंगा में मकान बनाने के लिए कच्ची ईंटों का आकार भी वही था जो हड़प्पा का मानक आकार 4:2:1 था।

  42. घरों में खाना पकाने के लिए जमीन के अंदर मिट्टी के ‘तंदूर’ (Tandoor-like ovens) बनाए जाते थे, जो आज भी राजस्थान में प्रचलित हैं।

  43. एक मुहर पर एक ‘शृंगी देवता’ (Horned Deity) को बलि के लिए लाए गए एक पशु के साथ दिखाया गया है।

  44. कालीबंगा की रक्षा प्राचीर (Fortification Wall) के अंदर प्रवेश करने के लिए सीढ़ियों (Staircases) वाले भव्य द्वार बनाए गए थे।

  45. यहाँ के निवासियों को ‘लोहे’ (Iron) का कोई ज्ञान नहीं था; उनके हथियार केवल तांबे और कांसे के बने होते थे।

  46. कालीबंगा के बर्तनों पर ‘हड़प्पा लिपि’ (Harappan Script) खुदी हुई मिली है, जिसे दाईं से बाईं ओर (Right to left) लिखा जाता था।

  47. एक ही खेत में दो फसलें उगाने की जो तकनीक कालीबंगा में 4500 साल पहले थी, वह राजस्थान में आज भी उसी रूप में अपनाई जाती है।

  48. कालीबंगा से ‘स्वास्तिक’ (Swastika) के चिन्ह वाले बर्तन भी प्राप्त हुए हैं।

  49. सरस्वती (घग्गर) नदी के सूखने और बार-बार आने वाले भूकंपों के कारण इस महान नगर का पतन लगभग 2000 ईसा पूर्व में हो गया।

  50. कालीबंगा से प्राप्त पुरातात्विक खजाने को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान सरकार ने वहाँ एक ‘कालीबंगा पुरातत्व संग्रहालय’ (Kalibangan Archaeological Museum) की स्थापना की है।

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