
पर्यावरण क्या है: जीवन का मूल आधार
ब्रह्मांड के अनंत रहस्यों के बीच हमारी पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जहाँ जीवन मुस्कुराता है। इस पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाने वाली और उसे निरंतर पालने-पोसने वाली अदृश्य और दृश्य शक्ति का नाम ही ‘पर्यावरण’ है। सुबह उठकर जो ताजी हवा हम सांस के रूप में लेते हैं, जो पानी हम पीते हैं, जो भोजन हमें खेतों से मिलता है और जो जलवायु हमारे शरीर को संतुलित रखती है—यह सब पर्यावरण की ही देन है।
सरल शब्दों में, पर्यावरण वह प्राकृतिक रंगमंच है जिस पर मानव सहित पृथ्वी के सभी जीव-जंतु अपने जीवन का नाटक खेलते हैं। आज के समय में जब प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जैसी समस्याएं मानवता के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी हैं, तब पर्यावरण का अध्ययन करना केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि एक वैश्विक आवश्यकता बन गया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य सिविल सेवा (PSC) की परीक्षाओं में पर्यावरण सबसे स्कोरिंग और महत्वपूर्ण विषय है। आइए, इसके हर एक पहलू को गहराई से समझते हैं।
पर्यावरण का अर्थ और व्युत्पत्ति (Meaning of Environment)
पर्यावरण के वास्तविक अर्थ को समझने के लिए हमें इसके शाब्दिक विन्यास को समझना होगा।
हिंदी भाषा में अर्थ: हिंदी का ‘पर्यावरण’ शब्द दो शब्दों की संधि से बना है:
‘परि’ (Pari): जिसका अर्थ होता है— हमारे ‘चारों ओर’ या आस-पास।
‘आवरण’ (Avaran): जिसका अर्थ होता है— ‘ढका हुआ’ या ‘घेरा हुआ’। अर्थात्, वह सब कुछ जो हमें चारों ओर से ढके हुए या घेरे हुए है और हमारे जीवन को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है, ‘पर्यावरण’ कहलाता है।
अंग्रेजी भाषा में व्युत्पत्ति: पर्यावरण को अंग्रेजी में ‘Environment’ कहा जाता है। इस शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी (French) भाषा के शब्द ‘Environner’ (एनवायरोनर) से हुई है, जिसका स्पष्ट अर्थ होता है— ‘पड़ोस’ (Neighbourhood) या ‘घेरना’। इसका मतलब है कि हमारे आस-पड़ोस की सभी प्राकृतिक और भौतिक परिस्थितियां ही हमारा पर्यावरण हैं।
पर्यावरण की वैज्ञानिक और कानूनी परिभाषाएँ
मुख्य परीक्षा (Mains) में सटीक परिभाषाएं लिखने से उत्तर का वजन बहुत बढ़ जाता है:
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अनुसार: “पर्यावरण के अंतर्गत जल, वायु और भूमि आते हैं; तथा वे अंतर्संबंध आते हैं जो जल, वायु, भूमि और मानवों, अन्य जीवित प्राणियों, पौधों, सूक्ष्म जीवों और संपत्ति के बीच मौजूद हैं।” (यह भारत सरकार की सबसे प्रामाणिक कानूनी परिभाषा है)।
भौगोलिक परिभाषा: “पर्यावरण उन सभी भौतिक, रासायनिक और जैविक कारकों का कुल योग है जो किसी जीवधारी (Organism) के जीवन, उसके विकास, उसकी शारीरिक बनावट और उसके व्यवहार को प्रभावित करते हैं।”
पर्यावरण के प्रमुख घटक (Components of Environment)
पर्यावरण कोई एक अकेली वस्तु नहीं है, बल्कि यह सजीवों और निर्जीवों का एक विशाल समूह है। इसे मुख्य रूप से दो बड़े घटकों में बांटा जाता है:
1. अजैविक या भौतिक घटक (Abiotic / Physical Components)
ये पर्यावरण के वे सभी निर्जीव तत्व हैं जो सजीवों को जीवित रहने के लिए आधार प्रदान करते हैं। इसे आगे तीन उप-मंडलों में बांटा जाता है:
स्थलमंडल (Lithosphere): इसमें पृथ्वी की ठोस ऊपरी सतह, पहाड़, पठार, मैदान, मिट्टी और खनिज शामिल हैं। यह हमें रहने के लिए घर और खेती के लिए जमीन देता है।
जलमंडल (Hydrosphere): इसमें महासागर, समुद्र, नदियां, झीलें, ग्लेशियर और भूमिगत जल शामिल हैं। पृथ्वी का लगभग 71% हिस्सा जलमंडल है, जो जीवन के लिए सबसे आवश्यक है।
वायुमंडल (Atmosphere): पृथ्वी के चारों ओर गैसों (ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड) का आवरण। यह हमें सांस लेने के लिए हवा देता है और सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से हमारी रक्षा करता है।
2. जैविक घटक (Biotic Components)
ये पर्यावरण के वे सभी जीवित तत्व हैं जिनमें जीवन पाया जाता है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित शामिल हैं:
वनस्पतियां (Flora): सूक्ष्म शैवाल (Algae) से लेकर विशाल बरगद के पेड़ तक। ये अपना भोजन खुद बनाते हैं (उत्पादक) और पूरे पर्यावरण को ऑक्सीजन देते हैं।
जीव-जंतु (Fauna): एककोशिकीय अमीबा से लेकर विशालकाय ब्लू व्हेल और मानव तक सभी जंतु जो भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर हैं (उपभोक्ता)।
सूक्ष्म जीव (Micro-organisms): बैक्टीरिया और कवक जैसे अपघटक (Decomposers), जो मरे हुए जीवों को सड़ाकर उन्हें वापस मिट्टी में मिला देते हैं और प्रकृति की सफाई करते हैं।

पर्यावरण के प्रकार (Types of Environment)
हमारी पृथ्वी पर पर्यावरण हमेशा एक जैसा नहीं होता। मानव के हस्तक्षेप के आधार पर इसे दो मुख्य भागों में वर्गीकृत किया जाता है:
1. प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment): यह वह पर्यावरण है जो प्रकृति द्वारा स्वयं बनाया गया है और इसमें मानव का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता। इसमें सभी प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली चीजें शामिल हैं, जैसे— घने जंगल, प्राकृतिक झीलें, महासागर, रेगिस्तान और ऊंचे पहाड़। प्राकृतिक पर्यावरण पूरी तरह से स्व-संतुलित (Self-balanced) होता है।
2. मानव-निर्मित या कृत्रिम पर्यावरण (Human-made / Artificial Environment): जब मनुष्य अपनी बुद्धि, तकनीक और जरूरतों को पूरा करने के लिए प्राकृतिक पर्यावरण में बदलाव करता है, तो उसे मानव-निर्मित पर्यावरण कहते हैं।
उदाहरण: खेत, शहर, सड़कें, कारखाने, बांध (Dams), एक्वेरियम (Aquarium) और चिड़ियाघर। यह पर्यावरण स्व-संतुलित नहीं होता; इसे बनाए रखने के लिए मनुष्य को लगातार ऊर्जा और संसाधनों की आवश्यकता होती है।
पर्यावरण का महत्व (Importance of Environment)
मानव जीवन पर्यावरण के बिना शून्य है। इसका महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
जीवन रक्षक प्रणाली (Life Support System): यह हमें सांस लेने के लिए शुद्ध वायु (ऑक्सीजन), पीने के लिए साफ पानी और रहने के लिए उपजाऊ मिट्टी प्रदान करता है।
आर्थिक विकास का आधार: आज दुनिया भर में जो भी उद्योग चल रहे हैं (चाहे वह कपड़ा उद्योग हो या ऑटोमोबाइल), उन सभी के लिए कच्चा माल (Raw Material) जैसे— कपास, लोहा, कोयला और पेट्रोलियम, पर्यावरण से ही मिलता है।
प्राकृतिक आपदाओं से बचाव: घने जंगल और मैंग्रोव वन बाढ़ और सुनामी के प्रभाव को कम करते हैं, जबकि ओजोन परत हमें सूर्य के खतरनाक रेडिएशन से बचाती है।
सांस्कृतिक और सौंदर्यपरक महत्व: नदियां, पर्वत और वन हमारी प्राचीन संस्कृतियों का हिस्सा रहे हैं। पर्यटन (Tourism) का पूरा ढांचा पर्यावरण की सुंदरता पर ही टिका है।
पर्यावरण अवनयन (Environmental Degradation) और उसके कारण
आज मानव के लालच के कारण पर्यावरण तेजी से नष्ट हो रहा है, जिसे ‘पर्यावरण अवनयन’ कहा जाता है। इसके मुख्य कारण हैं:
प्रदूषण (Pollution): उद्योगों से निकलने वाला जहरीला धुआं (वायु प्रदूषण), नदियों में डाला जाने वाला रासायनिक कचरा (जल प्रदूषण), और प्लास्टिक कचरा (मृदा प्रदूषण) पर्यावरण को जहर बना रहे हैं।
वनों की कटाई (Deforestation): कृषि और शहरीकरण के लिए अंधाधुंध पेड़ काटे जा रहे हैं, जिससे जानवरों के आवास छिन गए हैं और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा है।
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन: ग्रीनहाउस गैसों (जैसे CO2, मीथेन) के अत्यधिक उत्सर्जन से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं और मौसम का चक्र बिगड़ रहा है।
अति-दोहन (Over-exploitation): भूजल (Groundwater) का अत्यधिक दोहन और खनिजों का अनियंत्रित खनन।
पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक प्रयास (Global Initiatives)
पर्यावरण को बचाने के लिए दुनिया भर में कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं, जो परीक्षाओं के लिए अति महत्वपूर्ण हैं:
स्टॉकहोम सम्मेलन (1972): यह पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र का पहला सबसे बड़ा सम्मेलन था। इसी सम्मेलन में ‘UNEP’ (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) की स्थापना हुई थी।
पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit – 1992): यह ब्राजील के रियो-डी-जेनेरियो में हुआ था। यहीं पर ‘एजेंडा 21’ (Agenda 21) अपनाया गया और जलवायु परिवर्तन (UNFCCC) व जैव विविधता (CBD) पर ऐतिहासिक समझौते हुए।
क्योटो प्रोटोकॉल (1997): यह ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए लाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि थी।
पेरिस समझौता (2015): इसमें दुनिया के सभी देशों ने पृथ्वी के तापमान वृद्धि को 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा।
परीक्षा के लिए 40+ अति महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Notes)
‘Environment’ शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच भाषा के शब्द ‘Environner’ से हुई है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA) भारत में 1986 में पारित किया गया था।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम को भारत में ‘छाता विधान’ (Umbrella Legislation) के नाम से भी जाना जाता है।
विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है।
5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने का निर्णय 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन में लिया गया था।
भारत में पर्यावरण विभाग की स्थापना 1980 में की गई थी, जिसे 1985 में ‘पर्यावरण एवं वन मंत्रालय’ बना दिया गया।
‘राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान’ (NEERI) नागपुर (महाराष्ट्र) में स्थित है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का मुख्यालय नैरोबी (केन्या) में है।
पृथ्वी का लगभग 71% हिस्सा जलमंडल और 29% हिस्सा स्थलमंडल है।
वायुमंडल में सबसे अधिक पाई जाने वाली गैस नाइट्रोजन (78%) है।
वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा लगभग 21% है।
वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की मात्रा 0.03% है (जो अब बढ़कर 0.04% के करीब पहुंच रही है)।
प्रकृति के सफाईकर्मी (Scavengers) के रूप में कवक और जीवाणु को जाना जाता है।
भारत का सबसे पहला राष्ट्रीय उद्यान (National Park) जिम कॉर्बेट (उत्तराखंड) है, जिसे 1936 में स्थापित किया गया था।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम भारत में 1972 में लागू हुआ था।
प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) की शुरुआत भारत में 1973 में की गई थी।
वन संरक्षण अधिनियम 1980 में पास हुआ था।
प्रोजेक्ट एलीफेंट (हाथी परियोजना) भारत में 1992 में शुरू की गई थी।
ओजोन परत वायुमंडल के समताप मंडल (Stratosphere) में पाई जाती है।
ओजोन परत की मोटाई मापने की इकाई डॉबसन (Dobson Unit) है।
विश्व ओजोन दिवस 16 सितंबर को मनाया जाता है।
ओजोन परत के संरक्षण से संबंधित अंतरराष्ट्रीय समझौता ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ (1987) है।
सबसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) है।
जुगाली करने वाले पशुओं और धान के खेतों से मुख्य रूप से मीथेन (CH4) गैस निकलती है।
भोपाल गैस त्रासदी (1984) में मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था।
जल प्रदूषण को मापने के लिए BOD (Biochemical Oxygen Demand) का परीक्षण किया जाता है।
ग्रीन मफलर (Green Muffler) का संबंध ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) को कम करने से है।
फ्लाई ऐश (Fly Ash) प्रदूषण मुख्य रूप से थर्मल पावर प्लांट्स (कोयला आधारित बिजली घरों) से होता है।
इटाई-इटाई रोग जल में कैडमियम (Cadmium) के प्रदूषण के कारण होता है।
मिनीमाता रोग जल में पारा (Mercury) के प्रदूषण के कारण होता है।
ब्लू बेबी सिंड्रोम पीने के पानी में नाइट्रेट की अधिकता के कारण होता है।
विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल को मनाया जाता है।
विश्व जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है।
भारत का सबसे बड़ा बॉटनिकल गार्डन (वनस्पतिक उद्यान) कोलकाता (आचार्य जगदीश चंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान) में है।
‘चिपको आंदोलन’ की शुरुआत 1973 में सुंदरलाल बहुगुणा ने उत्तराखंड से की थी।
‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ का नेतृत्व मुख्य रूप से मेधा पाटकर ने किया है।
भारत में ‘पारिस्थितिकी के जनक’ (Father of Indian Ecology) प्रोफेसर रामदेव मिश्रा को कहा जाता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना भारत में 2010 में की गई थी।
NGT का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा करना है।
निष्कर्ष
पर्यावरण का अध्ययन हमें यह सिखाता है कि मनुष्य प्रकृति का स्वामी नहीं है, बल्कि वह इस विशाल पारिस्थितिक परिवार का एक छोटा सा हिस्सा है। विकास के नाम पर हमने जिस तरह से पहाड़ों को काटा है, नदियों को प्रदूषित किया है और हवा में जहर घोला है, उसका परिणाम आज हम भयानक आपदाओं के रूप में भुगत रहे हैं। महात्मा गांधी ने बिल्कुल सही कहा था— “प्रकृति के पास हर इंसान की आवश्यकता (Need) को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन किसी के लालच (Greed) को पूरा करने के लिए नहीं।” इसलिए, सतत विकास (Sustainable Development) का मार्ग अपनाना आज समय की सबसे बड़ी मांग है।
अभ्यास प्रश्न (UPSC & State PSC Prelims Level)
प्रश्न 1: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA) भारत में किस वर्ष अधिनियमित किया गया था, जिसे ‘छाता विधान’ भी कहा जाता है? (A) 1972 (B) 1980 (C) 1986 (D) 2002
उत्तर: (C) 1986
प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन सी एक गैस वायुमंडल में ‘ग्रीनहाउस गैस’ के रूप में कार्य नहीं करती है? (A) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) (B) मीथेन (CH4) (C) क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) (D) नाइट्रोजन (N2)
उत्तर: (D) नाइट्रोजन (यह वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में है, लेकिन ग्रीनहाउस गैस नहीं है)