पारिस्थितिकी क्या है? (Ecology): अर्थ, शाखाएं, संगठन स्तर और 40+ अचूक नोट्स | UPSC, PSC

पारिस्थितिकी

पारिस्थितिकी क्या है: प्रकृति के अंतर्संबंधों का विज्ञान

जब हम किसी घने जंगल को देखते हैं, तो हमें वहां पेड़, हिरण, शेर, नदियां और मिट्टी दिखाई देते हैं। एक आम इंसान के लिए यह केवल एक दृश्य हो सकता है, लेकिन एक वैज्ञानिक के नजरिए से यह एक अत्यंत जटिल और गुंथा हुआ जाल है। शेर हिरण को खाता है, हिरण घास खाता है, घास मिट्टी से पोषण लेती है, और मरने के बाद शेर भी उसी मिट्टी में मिल जाता है। जीवन और मृत्यु का यह जो आपसी संबंध है, इसी को समझने के विज्ञान का नाम ‘पारिस्थितिकी’ (Ecology) है।

अगर ‘पर्यावरण‘ वह घर है जिसमें जीव रहते हैं, तो ‘पारिस्थितिकी’ इस बात का अध्ययन है कि वे जीव उस घर में एक-दूसरे के साथ और उस घर के निर्जीव तत्वों (हवा, पानी, धूप) के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (PSC) की परीक्षाओं में पारिस्थितिकी सबसे तकनीकी और विश्लेषणात्मक विषय है, जहाँ से हर साल प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में घुमावदार प्रश्न पूछे जाते हैं।

पारिस्थितिकी का अर्थ और व्युत्पत्ति (Etymology of Ecology)

‘Ecology’ (पारिस्थितिकी) जीव विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान की एक शाखा है।

शब्द की उत्पत्ति: पारिस्थितिकी (Ecology) शब्द की उत्पत्ति ग्रीक (यूनानी) भाषा के दो मूल शब्दों से मिलकर हुई है:

  • ‘Oikos’ (ओइकोस): जिसका अर्थ होता है— ‘घर’ (House), निवास स्थान या रहने की जगह।

  • ‘Logos’ (लोगोस): जिसका अर्थ होता है— ‘अध्ययन करना’ या विज्ञान (Study of)।

अर्थात्, शाब्दिक अर्थों में “प्रकृति के घर का अध्ययन करना ही पारिस्थितिकी है।”

वैज्ञानिक परिभाषा: “पारिस्थितिकी विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत हम जीवधारियों (पौधों और जंतुओं) के आपस में होने वाले संबंधों और उनके भौतिक पर्यावरण (जलवायु, मिट्टी, जल) के साथ होने वाली अंतर्क्रियाओं (Interactions) का वैज्ञानिक अध्ययन करते हैं।”

जनक (Father of Ecology):

  • सर्वप्रथम 1869 में प्रसिद्ध जर्मन जीवविज्ञानी अर्न्स्ट हेकेल (Ernst Haeckel) ने ‘Oekologie’ शब्द का प्रयोग किया था और इसकी विस्तृत व्याख्या की थी। इसीलिए उन्हें पारिस्थितिकी का जनक कहा जाता है।

  • भारत के संदर्भ में, प्रोफेसर रामदेव मिश्रा को ‘भारतीय पारिस्थितिकी का जनक’ (Father of Indian Ecology) माना जाता है।

पारिस्थितिकी की मुख्य शाखाएँ (Branches of Ecology)

अध्ययन की सुविधा के लिए और जीवों के समूह के आधार पर पारिस्थितिकी को मुख्य रूप से दो प्रमुख शाखाओं में विभाजित किया जाता है:

1. स्वपारिस्थितिकी (Autecology): जब हम किसी एक ही प्रजाति (Single Species) के किसी जीव का उसके पर्यावरण के साथ संबंध का अध्ययन करते हैं, तो उसे स्वपारिस्थितिकी कहते हैं।

  • उदाहरण: यदि हम केवल यह अध्ययन करें कि ‘शेर’ पर वहां के तापमान, बारिश और जंगल का क्या प्रभाव पड़ता है, तो यह स्वपारिस्थितिकी कहलाएगा।

2. समपारिस्थितिकी (Synecology): जब हम किसी एक प्रजाति का नहीं, बल्कि एक विशेष स्थान पर रहने वाले विभिन्न प्रजातियों के पूरे समूह (Community) का उनके पर्यावरण के साथ अध्ययन करते हैं, तो उसे समपारिस्थितिकी कहते हैं।

  • उदाहरण: यदि हम एक ही जंगल में रहने वाले शेर, हिरण, घास, सांप और पक्षियों—इन सभी के आपस में और वहां के पर्यावरण के साथ संबंधों का एक साथ अध्ययन करें, तो यह समपारिस्थितिकी कहलाएगा।

पारिस्थितिक संगठन के स्तर (Levels of Ecological Organization)

पारिस्थितिकी

पारिस्थितिकी का अध्ययन सबसे छोटे स्तर (एक जीव) से लेकर सबसे बड़े स्तर (पूरी पृथ्वी) तक किया जाता है। इसके कुल 6 प्रमुख स्तर होते हैं (नीचे से ऊपर के क्रम में):

1. व्यष्टि या जीव (Individual / Organism): यह पारिस्थितिकी की सबसे छोटी इकाई है। यह कोई एक जीवित प्राणी (एक पेड़, एक इंसान या एक चूहा) होता है, जो पर्यावरण के साथ सीधे क्रिया करता है।

2. समष्टि या जनसंख्या (Population): जब एक ही स्थान पर और एक ही समय में ‘एक ही प्रजाति’ (Same Species) के कई जीव एक साथ रहते हैं, तो उसे समष्टि कहते हैं। (जैसे— किसी जंगल में केवल हाथियों का समूह)।

3. समुदाय (Community): जब किसी एक स्थान पर ‘अलग-अलग प्रजातियों’ की जनसंख्या एक साथ निवास करती है और एक-दूसरे पर निर्भर होती है, तो उसे समुदाय कहते हैं। (जैसे— जंगल में हाथी, हिरण, शेर और पेड़ों का एक साथ रहना)।

4. पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem): जब कोई सजीव समुदाय अपने आस-पास के निर्जीव पर्यावरण (हवा, पानी, मिट्टी) के साथ मिलकर ऊर्जा और पोषण का आदान-प्रदान करता है, तो वह एक पारितंत्र बनाता है। (जैसे— एक तालाब या जंगल)।

5. बायोम (Biome): यह पारितंत्र से भी बड़ा स्तर है। एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र को बायोम कहते हैं जहाँ की जलवायु एक जैसी होती है और वहां एक विशेष प्रकार की वनस्पति और जीव पाए जाते हैं। (जैसे— सहारा मरुस्थल, टुंड्रा बायोम, या उष्णकटिबंधीय वर्षावन)।

6. जैवमंडल (Biosphere): यह पारिस्थितिकी का सबसे बड़ा स्तर है। पृथ्वी का वह पूरा हिस्सा (जल, थल और वायु का वह संकीर्ण क्षेत्र) जहाँ कहीं भी जीवन पाया जाता है, उसे सम्मिलित रूप से जैवमंडल कहते हैं।

पारिस्थितिकी की महत्वपूर्ण अवधारणाएँ (Key Ecological Concepts)

UPSC और PSC की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में कुछ विशेष तकनीकी शब्दों (Terminology) से सीधे प्रश्न आते हैं। एक छात्र के लिए इन्हें समझना अत्यंत आवश्यक है:

1. आवास (Habitat) और नीश (Niche)

  • आवास (Habitat): यह वह वास्तविक भौतिक स्थान है जहाँ कोई जीव रहता है (यानी जीव का ‘पता’ या Address)। जैसे— शेर का आवास जंगल है और मछली का आवास पानी है।

  • पारिस्थितिक नीश (Ecological Niche): नीश केवल रहने की जगह नहीं है, बल्कि यह वह भूमिका (Profession) है जो जीव अपने पारितंत्र में निभाता है। वह क्या खाता है, कब सोता है, और शिकार कैसे करता है—यह सब उसका नीश है।

नियम (गॉस का सिद्धांत): किन्हीं भी दो अलग-अलग प्रजातियों का ‘नीश’ (Niche) बिल्कुल एक जैसा नहीं हो सकता। यदि ऐसा होगा, तो उनमें प्रतिस्पर्धा (Competition) होगी और एक प्रजाति को खत्म होना पड़ेगा।

2. इकोटोन (Ecotone) और एज इफेक्ट (Edge Effect)

  • इकोटोन: यह वह संक्रमणकालीन (Transitional) क्षेत्र है जहाँ दो अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्र आपस में मिलते हैं। (जैसे— जंगल और घास के मैदान के बीच का क्षेत्र, या समुद्र और नदी के बीच का दलदल – मैंग्रोव)।

  • एज इफेक्ट: चूँकि इकोटोन में दोनों पारितंत्रों (जैसे पानी और जमीन) की विशेषताएं पाई जाती हैं, इसलिए यहाँ जीवों और पक्षियों की विविधता सबसे अधिक होती है। इकोटोन में प्रजातियों की इस अत्यधिक विविधता को ही ‘एज इफेक्ट’ कहते हैं।

3. प्रजातियों के विशेष प्रकार (Types of Species)

  • कीस्टोन प्रजाति (Keystone Species): यह वह प्रजाति है जिसकी पारितंत्र में संख्या तो कम हो सकती है, लेकिन उसका प्रभाव सबसे ज्यादा होता है। यदि इसे हटा दिया जाए तो पूरा पारितंत्र नष्ट हो जाएगा (जैसे— जंगल में शीर्ष शिकारी ‘शेर’)।

  • संकेतक प्रजाति (Indicator Species): ये वे प्रजातियां हैं जो पर्यावरण में हो रहे बदलाव (प्रदूषण) के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं और खतरे की चेतावनी देती हैं। (जैसे— वायु प्रदूषण जांचने के लिए ‘लाइकेन’ और जल प्रदूषण के लिए ‘मेंढक’)।

  • अम्ब्रेला प्रजाति (Umbrella Species): यह वह बड़ी प्रजाति है जिसके संरक्षण से अपने आप ही उसके नीचे रहने वाली अन्य छोटी प्रजातियों का संरक्षण हो जाता है (जैसे— टाइगर रिजर्व बनाकर बाघ को बचाने से वहां के अन्य जीव और जंगल अपने आप बच जाते हैं)।

  • फाउंडेशन प्रजाति (Foundation Species): ये वे प्रजातियां हैं जो किसी पारितंत्र का निर्माण करती हैं (जैसे— समुद्र में ‘कोरल रीफ’ या प्रवाल भित्तियां)।

परीक्षा के लिए 40+ अति महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Bullet Notes)

  • ‘Ecology’ (पारिस्थितिकी) ग्रीक भाषा के शब्द Oikos और Logos से मिलकर बना है।

  • पारिस्थितिकी शब्द का प्रयोग और व्याख्या सर्वप्रथम अर्न्स्ट हेकेल (1869) ने की थी।

  • ‘भारतीय पारिस्थितिकी के जनक’ के रूप में रामदेव मिश्रा को जाना जाता है।

  • जब केवल एक प्रजाति का अध्ययन उसके पर्यावरण के साथ किया जाए, तो उसे स्वपारिस्थितिकी (Autecology) कहते हैं।

  • जब पूरे समुदाय का उसके पर्यावरण के साथ अध्ययन किया जाए, तो उसे समपारिस्थितिकी (Synecology) कहते हैं।

  • पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) शब्द का सबसे पहला प्रयोग ए.जी. टांसले (1935) ने किया था।

  • पारिस्थितिकी के संगठन का सबसे निचला स्तर ‘जीव’ (Individual) और सबसे ऊपरी स्तर ‘जैवमंडल’ (Biosphere) है।

  • किसी प्रजाति के निवास स्थान और पारितंत्र में उसकी कार्यात्मक भूमिका को सम्मिलित रूप से नीश (Niche) कहा जाता है।

  • ‘नीश’ (Niche) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जोसेफ ग्रिनेल (1917) ने किया था।

  • किन्हीं भी दो अलग-अलग प्रजातियों का ‘नीश’ कभी भी एक समान नहीं हो सकता (इसे प्रतिस्पर्धी अपवर्जन का सिद्धांत कहते हैं)।

  • दो अलग-अलग पारितंत्रों के मिलने वाले क्षेत्र (संक्रमण क्षेत्र) को इकोटोन (Ecotone) कहा जाता है।

  • मैंग्रोव वन, मुहाना (Estuary) और दलदली भूमि इकोटोन के सबसे बेहतरीन उदाहरण हैं।

  • इकोटोन क्षेत्र में जीवों की विविधता का अचानक बढ़ जाना ‘एज इफेक्ट’ (Edge Effect) कहलाता है।

  • वह प्रजाति जिसके न होने से पूरा पारितंत्र तबाह हो सकता है, उसे कीस्टोन प्रजाति (Keystone Species) कहते हैं।

  • हाथी, शेर और समुद्री ऊदबिलाव (Sea Otter) कीस्टोन प्रजातियों के उदाहरण हैं।

  • वायु में सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) प्रदूषण का सबसे अच्छा संकेतक लाइकेन (Lichen) को माना जाता है।

  • किसी पारितंत्र में एक प्रजाति को फायदा और दूसरी को नुकसान हो, तो उसे परजीविता (Parasitism) कहते हैं (जैसे— मनुष्य और जूँ)।

  • जब दोनों प्रजातियों को एक-दूसरे से फायदा हो, तो उसे सहजीविता (Mutualism) कहते हैं (जैसे— लाइकेन में शैवाल और कवक)।

  • जब एक प्रजाति को फायदा हो और दूसरी को न फायदा हो न नुकसान, तो उसे सहभोजिता (Commensalism) कहते हैं।

  • किसी बंजर या बिना जीवन वाले क्षेत्र में धीरे-धीरे नई वनस्पतियों का उगना पारिस्थितिक अनुक्रमण (Ecological Succession) कहलाता है।

  • अनुक्रमण के अंत में जो सबसे स्थिर समुदाय बनता है, उसे चरम समुदाय (Climax Community) कहते हैं।

  • महासागर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे अधिक स्थायी (Stable) पारिस्थितिक तंत्र है।

  • पृथ्वी का वह क्षेत्र जहां सजीव और निर्जीव तत्व मिलते हैं, जैवमंडल (Biosphere) कहलाता है।

  • टुंड्रा, टैगा और सवाना पारिस्थितिकी के संगठन स्तर में बायोम (Biome) के उदाहरण हैं।

  • ‘गहन पारिस्थितिकी’ (Deep Ecology) का सिद्धांत अर्नेस नेस (Arne Naess) ने दिया था।

  • पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों की मानव द्वारा खपत को मापने की इकाई पारिस्थितिक पदछाप (Ecological Footprint) है।

  • पारिस्थितिक पदछाप (Ecological Footprint) को ‘ग्लोबल हेक्टेयर’ (gha) में मापा जाता है।

  • ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) शब्द का पहली बार प्रयोग 1987 की ब्रंटलैंड रिपोर्ट (Brundtland Report) में किया गया था।

  • ब्रंटलैंड रिपोर्ट का मूल शीर्षक ‘हमारा साझा भविष्य’ (Our Common Future) था।

  • लाइकेन (Lichen) और मॉस नंगी चट्टानों पर अनुक्रमण शुरू करने वाली ‘पायोनियर प्रजाति’ (Pioneer Species) हैं।

  • उष्णकटिबंधीय वर्षावनों (Tropical Rainforests) में दुनिया की सर्वाधिक जैव विविधता (Biodiversity) पाई जाती है।

  • भारत में ‘पश्चिमी घाट’ (Western Ghats) और ‘पूर्वी हिमालय’ सबसे बड़े जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं।

  • पारिस्थितिक विज्ञान केंद्र (Center for Ecological Sciences) बैंगलोर में स्थित है।

  • विश्व का सबसे बड़ा स्थलीय बायोम टैगा बायोम (शंकुधारी वन) है।

  • पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा हमेशा एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर में घटती है।

  • ऊर्जा का यह 10% का नियम 1942 में रेमंड लिंडमैन ने दिया था।

  • पारिस्थितिक पिरामिड की अवधारणा चार्ल्स एल्टन (1927) ने दी थी।

  • ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा (Upright) होता है।

  • एक वृक्ष के पारितंत्र का जीव संख्या का पिरामिड हमेशा उल्टा (Inverted) होता है।

  • महासागर या तालाब के पारितंत्र का जैवभार (Biomass) का पिरामिड हमेशा उल्टा होता है।

निष्कर्ष

पारिस्थितिकी हमें प्रकृति का वह छिपा हुआ सत्य दिखाती है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यह हमें बताती है कि पृथ्वी पर कोई भी जीव “अकेला” नहीं है; सब एक-दूसरे से अदृश्य तारों से जुड़े हुए हैं। यदि जंगल से सभी कीड़े-मकोड़े (Insects) खत्म हो जाएं, तो इंसान का अस्तित्व भी चंद हफ्तों में खत्म हो जाएगा क्योंकि परागण (Pollination) रुक जाएगा और फसलें पैदा नहीं होंगी। आज जब हम अंधाधुंध विकास की दौड़ में भाग रहे हैं, तब पारिस्थितिकी के सिद्धांत हमें यह चेतावनी देते हैं कि “प्रकृति पर विजय प्राप्त करने की कोशिश मत करो, बल्कि उसके नियमों को समझकर उसके साथ सह-अस्तित्व (Co-existence) बनाना सीखो।”

अभ्यास प्रश्न (UPSC & State PSC Prelims Level)

प्रश्न 1: पारिस्थितिकी के संदर्भ में ‘इकोटोन’ (Ecotone) क्या है? (A) यह वह क्षेत्र है जहां केवल एक ही प्रकार की प्रजाति पाई जाती है। (B) यह दो अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्रों के बीच का एक संक्रमणकालीन (Transitional) क्षेत्र है। (C) यह महासागर की सबसे निचली सतह को कहा जाता है। (D) यह ओजोन परत में होने वाले क्षरण का तकनीकी नाम है।

उत्तर: (B) यह दो अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्रों के बीच का एक संक्रमणकालीन क्षेत्र है।

प्रश्न 2: निम्नलिखित में से किस प्रजाति के बारे में यह माना जाता है कि वह अपने पारिस्थितिक तंत्र के स्वरूप और संरचना को बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और उसके विलुप्त होने से पूरा पारितंत्र नष्ट हो सकता है? (A) अम्ब्रेला प्रजाति (Umbrella Species) (B) कीस्टोन प्रजाति (Keystone Species) (C) आक्रामक प्रजाति (Invasive Species) (D) स्थानिक प्रजाति (Endemic Species)

उत्तर: (B) कीस्टोन प्रजाति

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